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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

औंढा नागनाथ मंदिर, हिंगोली

Aundha Nagnath Temple, Hingoli

हिंगोली, महाराष्ट्र भगवान शिव (नागनाथ) निःशुल्क प्रवेश

औंढा नागनाथ मंदिर महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में हिंगोली जिले के औंढा नागनाथ नगर में स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। “नागनाथ” का अर्थ है नागों के स्वामी। महाराष्ट्र की परंपरा में इसे बारह ज्योतिर्लिंगों में आठवें, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है, और कालसर्प दोष की शांति के लिए भी श्रद्धालु यहाँ आते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसे राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित किया है।

इतिहास और कथा

लोककथा के अनुसार वनवास के समय पांडवों ने, विशेषकर युधिष्ठिर ने, यह मंदिर बनवाया था। ऐतिहासिक रूप से मूल मंदिर 13वीं शताब्दी में देवगिरि के यादवों के समय का माना जाता है। मध्यकाल के आक्रमणों में मंदिर को क्षति पहुँची। 18वीं शताब्दी में ऊपरी भाग और शिखर का जीर्णोद्धार हुआ, जिसका श्रेय प्रायः अहिल्याबाई होलकर को दिया जाता है।

संत नामदेव और घूमा हुआ मंदिर

वारकरी संत नामदेव से जुड़ी कथा यहाँ बहुत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि मंदिर के सामने कीर्तन करते नामदेव को पुजारियों ने पीछे जाने को कहा। वे पीछे जाकर भजन गाने लगे, तो उनकी भक्ति से पूरा मंदिर घूम गया और उसका द्वार उनकी ओर हो गया। नंदी मंडप का मंदिर के पीछे की ओर होना इसी कथा से जोड़ा जाता है। नामदेव के पद गुरु ग्रंथ साहिब में भी संकलित हैं।

मंदिर और गर्भगृह

मंदिर का आधार हेमाडपंती शैली में है – बिना गारे के एक-दूसरे में फँसाए गए पत्थर – और बाहरी दीवारों पर सुंदर नक्काशी है। ऊपरी भाग और शिखर मराठा शैली के हैं। ज्योतिर्लिंग भूतल से नीचे के गर्भगृह में है, जहाँ संकरी सीढ़ियों से उतरकर पहुँचा जाता है।

स्थान को लेकर मत

शिव पुराण में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को “दारुकावन” में बताया गया है, पर इस वन की पहचान स्पष्ट नहीं है। इसलिए तीन स्थान इसके दावेदार माने जाते हैं – गुजरात में द्वारका के पास का नागेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र का औंढा नागनाथ और उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का जागेश्वर। औंढा के पक्ष में शंकराचार्य के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र की पंक्ति “याम्ये सदंगे नगरेऽतिरम्ये” का उल्लेख किया जाता है, जिसमें “सदंग” को औंढा का प्राचीन नाम माना जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार इन स्थानों पर नागेश्वर रूप में शिव की आराधना करते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि: सबसे बड़ा उत्सव – रात में रथोत्सव।
  • श्रावण सोमवार: दूर-दूर से कावड़ यात्री जल लेकर पैदल आते हैं।
  • विजयादशमी पर पालकी शोभायात्रा।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक
  • आरती: प्रातः और संध्या

महाशिवरात्रि और श्रावण सोमवार को भारी भीड़ रहती है और समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • भूमिगत गर्भगृह – संकरी सीढ़ियों से नीचे उतरकर शिवलिंग के दर्शन।
  • बाहरी दीवारों पर हेमाडपंती नक्काशी।
  • मंदिर के पीछे की ओर नंदी – संत नामदेव की कथा से जुड़ा।
  • महाशिवरात्रि रथोत्सव।
  • नांदेड़ का तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब (लगभग 60 किमी)।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: हिंगोली (लगभग 25 किमी), परभणी जंक्शन (लगभग 50 किमी) या नांदेड़ (लगभग 60 किमी)।
  • सड़क मार्ग: हिंगोली, परभणी और नांदेड़ से राज्य परिवहन की बसें।
  • हवाई मार्ग: नांदेड़ हवाई अड्डा (लगभग 60 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या औंढा नागनाथ ज्योतिर्लिंग है?
महाराष्ट्र की परंपरा में औंढा नागनाथ को आठवाँ ज्योतिर्लिंग, नागेश्वर, माना जाता है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के स्थान को लेकर मत भिन्न हैं – गुजरात में द्वारका के पास का नागेश्वर मंदिर और उत्तराखंड का जागेश्वर भी इसी रूप में पूजे जाते हैं।
औंढा नागनाथ का मंदिर किसने बनवाया?
मूल मंदिर 13वीं शताब्दी में देवगिरि के यादवों के समय बना माना जाता है। कथाओं में इसका संबंध पांडवों से जोड़ा जाता है, और 18वीं शताब्दी में ऊपरी भाग का जीर्णोद्धार अहिल्याबाई होलकर से जोड़ा जाता है।
संत नामदेव और औंढा नागनाथ की कथा क्या है?
कथा है कि कीर्तन करते संत नामदेव को पुजारियों ने मंदिर के पीछे जाने को कहा। उनकी भक्ति से मंदिर घूम गया और उसका द्वार नामदेव की ओर हो गया। इसी कारण नंदी आज मंदिर के पीछे की ओर बताया जाता है।
औंढा नागनाथ में गर्भगृह कहाँ है?
यहाँ का गर्भगृह भूतल से नीचे है। श्रद्धालु संकरी सीढ़ियों से नीचे उतरकर शिवलिंग के दर्शन करते हैं।
हिंगोली से औंढा नागनाथ कितनी दूर है?
औंढा नागनाथ हिंगोली से लगभग 25 किमी, परभणी से लगभग 50 किमी और नांदेड़ से लगभग 60 किमी दूर है। तीनों जगहों से बसें मिलती हैं।

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