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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

चंडिका देवी मंदिर, जूचंद्र (नायगांव)

Chandika Devi Temple, Juchandra (Naigaon)

पालघर, महाराष्ट्र माँ चंडिका; साथ में कालिका, महिषासुरमर्दिनी और गणेश निःशुल्क प्रवेश

चंडिका देवी मंदिर महाराष्ट्र के पालघर जिले की वसई तालुका में, नायगांव के पास जूचंद्र गाँव की लगभग 400 फुट ऊँची पहाड़ी पर स्थित माँ चंडिका का मंदिर है। चंडिका देवी जूचंद्र गाँव की कुलदेवी हैं, और वसई-नायगांव क्षेत्र के भक्त बड़ी संख्या में यहाँ दर्शन करने आते हैं।

मंदिर और विग्रह

मंदिर का गर्भगृह एक बड़ी चट्टान की गुफा में है, जहाँ माँ चंडिका के साथ कालिका, महिषासुरमर्दिनी और भगवान गणेश की पाषाण प्रतिमाएँ हैं। 2002 में मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और भक्तों के लिए एक बहुमंजिला भवन बनाया गया। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए लिफ्ट की सुविधा भी है।

लोक मान्यता

गाँव वालों की मान्यता है कि यह स्थान पांडव काल का है, हालाँकि इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं मिलता। एक लोक मान्यता यह भी है कि इस पहाड़ी के पत्थरों का उपयोग वसई किले के निर्माण में हुआ था। स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग 60–70 वर्ष पहले तक पहाड़ी पर चढ़ने के लिए कोई पगडंडी भी नहीं थी।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र यात्रा: सबसे बड़ा उत्सव, जिसमें दूर-दूर से भक्त आते हैं।
  • चैत्र और आश्विन नवरात्रि में विशेष पूजा।
  • मंदिर से जुड़ी लगभग एक सदी पुरानी नाटक परंपरा, जो यात्रा के समय होती है।

यात्रा क्रम

वसई रोड–दिवा रेल मार्ग के जूचंद्र स्टेशन से पहाड़ी कुछ मिनट की पैदल दूरी पर है। पश्चिम रेलवे के नायगांव या वसई रोड स्टेशन से ऑटो से भी पहुँचा जा सकता है। पश्चिम की ओर से लगभग 200 सीढ़ियाँ हैं और दूसरी ओर से ऊपर तक वाहन मार्ग है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह से शाम तक (लगभग 6:00 से 20:00)
  • आरती: सुबह और संध्या

नवरात्रि और चैत्र यात्रा के दिनों में समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • चट्टान की गुफा में चंडिका, कालिका, महिषासुरमर्दिनी और गणेश की पाषाण प्रतिमाएँ।
  • लगभग 400 फुट ऊँची पहाड़ी से आसपास का दृश्य।
  • चैत्र मास की बड़ी यात्रा।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: जूचंद्र स्टेशन (वसई रोड–दिवा मार्ग) से कुछ मिनट पैदल; या नायगांव / वसई रोड स्टेशन से ऑटो।
  • सड़क मार्ग: वसई और नायगांव से सड़क द्वारा; पहाड़ी के ऊपर तक वाहन मार्ग।
  • हवाई मार्ग: मुंबई (छत्रपति शिवाजी महाराज) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चंडिका देवी मंदिर जूचंद्र कहाँ है?
यह मंदिर वसई तालुका के जूचंद्र गाँव में, नायगांव (पूर्व) के पास लगभग 400 फुट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है।
मंदिर में किन देवियों की प्रतिमाएँ हैं?
एक बड़ी चट्टान की गुफा में माँ चंडिका, कालिका, महिषासुरमर्दिनी और भगवान गणेश की पाषाण प्रतिमाएँ हैं। चंडिका देवी जूचंद्र गाँव की कुलदेवी हैं।
मंदिर कितना पुराना है?
गाँव वालों की मान्यता है कि मंदिर पांडव काल का है, पर इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है। वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार 2002 में हुआ।
क्या मंदिर तक सीढ़ियों के अलावा कोई रास्ता है?
हाँ, पश्चिम की ओर से लगभग 200 सीढ़ियाँ हैं, एक ओर से ऊपर तक वाहन मार्ग है, और वरिष्ठ नागरिकों व दिव्यांगों के लिए लिफ्ट की सुविधा भी है।
चंडिका देवी मंदिर का मुख्य उत्सव कौन सा है?
चैत्र मास में बड़ी यात्रा लगती है। चैत्र और आश्विन दोनों नवरात्रि भी धूमधाम से मनाई जाती हैं।

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