एलिफेंटा गुफाएँ मुंबई बंदरगाह में स्थित घारापुरी (एलिफेंटा) द्वीप पर बने शैलकृत गुफा मंदिर हैं, जो मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित हैं। गेटवे ऑफ इंडिया से लगभग 10–11 किमी पूर्व में स्थित यह द्वीप प्रशासनिक रूप से रायगढ़ जिले की उरण तालुका में आता है। 1987 में इन गुफाओं को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित किया गया और इनकी देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण करता है।
इतिहास और नाम
अधिकांश विद्वान इन गुफाओं को 5वीं–6वीं शताब्दी का मानते हैं, और कई लगभग 550 ई. का समय बताते हैं। द्वीप का पुराना नाम घारापुरी है, जिसका अर्थ “गुफाओं का स्थान” माना जाता है। 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों ने यहाँ पत्थर की एक विशाल हाथी की मूर्ति देखी और द्वीप को “एलिफेंटा” कहने लगे। पश्चिमी पहाड़ी पर पाँच हिंदू गुफाएँ हैं, जबकि पूर्वी पहाड़ी पर दो बौद्ध गुफाएँ और स्तूप के अवशेष हैं।
महागुफा और लिंग गर्भगृह
सबसे प्रसिद्ध गुफा 1 (महागुफा) है। इसके भीतर एक स्वतंत्र, चौकोर पत्थर का गर्भगृह है जिसके चारों ओर एक-एक द्वार है। हर द्वार के दोनों ओर विशाल द्वारपाल खड़े हैं। सीढ़ियाँ चढ़कर गर्भगृह में पहुँचते हैं, जहाँ ऊँचे आसन पर शिवलिंग स्थापित है। शिवरात्रि पर यहाँ आने वालों की संख्या विशेष रूप से बढ़ जाती है।
सदाशिव त्रिमूर्ति और शिव कथाओं के शिल्प
महागुफा का सबसे प्रसिद्ध शिल्प सदाशिव त्रिमूर्ति है – शिव का तीन मुखों वाला विशाल स्वरूप, जो भारतीय कला की श्रेष्ठ कृतियों में गिना जाता है। गुफा की दीवारों पर शिव कथाओं के बड़े फलक हैं:
- गंगाधर – शिव द्वारा गंगा का अवतरण।
- अर्धनारीश्वर – शिव और पार्वती का संयुक्त रूप।
- कल्याणसुंदर – शिव-पार्वती विवाह।
- नटराज और योगीश्वर – नृत्य और योग के स्वामी।
- अंधकासुर वध – भैरव रूप में शिव।
- रावणानुग्रह – कैलाश पर्वत उठाते रावण पर शिव की कृपा।
यात्रा सुझाव
गेटवे ऑफ इंडिया से नाव द्वारा लगभग एक घंटे में द्वीप पहुँचते हैं। जेट्टी से मुख्य गुफा तक लगभग एक किलोमीटर की चढ़ाई और सीढ़ियाँ हैं। गुफाएँ सोमवार को बंद रहती हैं, इसलिए यात्रा की योजना उसी अनुसार बनाएँ और लौटने की अंतिम नाव का समय पहले से जान लें।
दर्शन का समय
- गुफाएँ: लगभग सुबह 9:00 से शाम 5:30 बजे तक
- सोमवार: बंद
गेटवे ऑफ इंडिया से नावें सुबह से दोपहर तक चलती हैं; लौटने की अंतिम नाव का समय पहले से पता कर लें।
मुख्य आकर्षण
- सदाशिव त्रिमूर्ति – शिव का तीन मुखों वाला विशाल शिल्प।
- चार द्वारों और आठ द्वारपालों वाला लिंग गर्भगृह।
- गंगाधर, अर्धनारीश्वर, कल्याणसुंदर (शिव विवाह), नटराज, योगीश्वर और अंधकासुर वध के फलक।
- रावणानुग्रह – कैलाश उठाते रावण का शिल्प।
- पूर्वी पहाड़ी पर बौद्ध गुफाएँ और स्तूप के अवशेष।
कैसे पहुँचें
- जल मार्ग: मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया से नाव (लगभग 10–11 किमी, लगभग एक घंटा)। जेट्टी से गुफा तक लगभग 1 किमी चढ़ाई और सीढ़ियाँ।
- रेल मार्ग: छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस या चर्चगेट से टैक्सी द्वारा गेटवे ऑफ इंडिया।
- हवाई मार्ग: छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, मुंबई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एलिफेंटा गुफाएँ किस जिले में हैं?
एलिफेंटा गुफाएँ कितनी पुरानी हैं?
एलिफेंटा की मुख्य गुफा में किसकी पूजा होती है?
द्वीप का नाम एलिफेंटा क्यों पड़ा?
एलिफेंटा गुफाएँ कब बंद रहती हैं?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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Solapur, महाराष्ट्र श्री स्वामी समर्थ महाराज वटवृक्ष मंदिर, अक्कलकोट श्री स्वामी समर्थ महाराज (दत्तात्रेय परंपरा के संत, दत्त अवतार माने जाते हैं)
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सिंधुदुर्ग, महाराष्ट्र स्वयंभू गणपति मंदिर, रेडी (सिंधुदुर्ग) स्वयंभू श्री गणपति (द्विभुज, बैठी मूर्ति)
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पुणे, महाराष्ट्र श्री खंडोबा मंदिर (मल्हारी मार्तंड), जेजुरी श्री खंडोबा (मल्हारी मार्तंड, शिव का अवतार) और देवी म्हालसा
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पुणे, महाराष्ट्र पळसनाथ मंदिर (उजनी जलाशय), पळसदेव, इंदापुर भगवान शिव (पळसनाथ)
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पुणे, महाराष्ट्र तुलशीबाग राम मंदिर, पुणे श्रीराम, सीता और लक्ष्मण; परिसर में हनुमान, गणेश, विट्ठल-रुक्मिणी, दत्तात्रेय, शिव
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Ambarnath, महाराष्ट्र अंबरेश्वर शिव मंदिर, अंबरनाथ भगवान शिव (अंबरेश्वर)