गोंदवले महाराष्ट्र के सातारा जिले के माण तालुका का एक छोटा गाँव है, जो रामभक्त संत श्री ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज की जन्मभूमि और समाधि स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ का समाधि मंदिर रामनाम उपासकों का प्रमुख केंद्र है। रामनाम, अन्नदान और गोरक्षण – महाराज की ये तीन सीखें आज भी संस्थान के कार्य का आधार हैं।
गोंदवलेकर महाराज का जीवन
महाराज का जन्म 19 फरवरी 1845 को गोंदवले बुद्रुक में हुआ। उनका बचपन का नाम गणपति था। गुरु की खोज में वे नांदेड़ के पास येहळेगाँव पहुँचे, जहाँ श्री तुकामाई ने उन्हें दीक्षा देकर “ब्रह्मचैतन्य” नाम दिया। जीवनभर उन्होंने “श्रीराम जय राम जय जय राम” के जप को भक्ति का सरल मार्ग बताया और महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा अन्य स्थानों पर अनेक राम मंदिरों की स्थापना करवाई। 1912 में उन्होंने अपनी संपत्ति एक ट्रस्ट को सौंप दी, और 22 दिसंबर 1913 को गोंदवले में देह त्याग किया।
समाधि मंदिर और परिसर
जहाँ महाराज का अंतिम संस्कार हुआ, उसी स्थान पर उनकी समाधि बनी। समाधि मंदिर के भूतल पर कुछ सीढ़ियाँ उतरकर है और उसके ऊपर देव-मूर्तियों की पूजा होती है। परिसर में नाम मंदिर, आईसाहेब समाधि, महाराज के घोड़े की स्मृति में बताशा समाधि, ब्रह्मानंद हॉल और भोजन के लिए बड़े महाप्रसाद मंडप हैं। गाँव में संस्थान के राम मंदिर, विठ्ठल, दत्त और शनि मंदिर भी हैं। महाराज का पैतृक घर अब संग्रहालय है।
उपासना और उत्सव
- नित्य नामजप, भजन और प्रवचन।
- अन्नदान: आने वाले भक्तों के लिए महाप्रसाद।
- पुण्यतिथि उत्सव – महाराज के समाधि दिवस (दिसंबर 1913) की स्मृति में; 2013 में समाधि शताब्दी पर हज़ारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
- राम मंदिरों में श्रीराम नवमी जैसे रामभक्ति के पर्व।
यात्रा
गोंदवले सातारा से लगभग 64–70 किमी दूर सातारा–म्हसवड मार्ग पर, दहिवडी के आगे है। आसपास म्हसवड का सिद्धनाथ मंदिर और शिखर शिंगणापुर का शंभू महादेव मंदिर भी दर्शनीय हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: तड़के लगभग 5:00 से रात लगभग 10:00 बजे तक
- दैनिक क्रम: काकड़ आरती, नामजप, भजन-प्रवचन, संध्या आरती
दोपहर और रात्रि में भक्तों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था रहती है।
मुख्य आकर्षण
- श्री गोंदवलेकर महाराज की समाधि।
- नाम मंदिर – निरंतर रामनाम जप।
- महाराज का पैतृक घर (अब संग्रहालय)।
- संस्थान के राम मंदिर, विठ्ठल, दत्त और शनि मंदिर।
- आईसाहेब समाधि और महाप्रसाद मंडप।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: सातारा रेलवे स्टेशन, वहाँ से सड़क मार्ग।
- सड़क मार्ग: सातारा से सातारा–म्हसवड मार्ग पर लगभग 64–70 किमी, दहिवडी के आगे; दहिवडी से लगभग 5 किमी। एसटी बसें उपलब्ध।
- हवाई मार्ग: पुणे हवाई अड्डा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गोंदवलेकर महाराज कौन थे?
गोंदवलेकर महाराज के गुरु कौन थे?
गोंदवलेकर महाराज ने किस मंत्र का जप सिखाया?
महाराज की समाधि कब हुई?
गोंदवले कैसे पहुँचें?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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Solapur, महाराष्ट्र श्री स्वामी समर्थ महाराज वटवृक्ष मंदिर, अक्कलकोट श्री स्वामी समर्थ महाराज (दत्तात्रेय परंपरा के संत, दत्त अवतार माने जाते हैं)
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रायगढ़, महाराष्ट्र एलिफेंटा गुफाएँ (घारापुरी) – शिव गुफा मंदिर, मुंबई के पास भगवान शिव – गर्भगृह में शिवलिंग; सदाशिव (त्रिमूर्ति) स्वरूप
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पुणे, महाराष्ट्र श्री खंडोबा मंदिर (मल्हारी मार्तंड), जेजुरी श्री खंडोबा (मल्हारी मार्तंड, शिव का अवतार) और देवी म्हालसा
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पुणे, महाराष्ट्र पळसनाथ मंदिर (उजनी जलाशय), पळसदेव, इंदापुर भगवान शिव (पळसनाथ)
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पुणे, महाराष्ट्र तुलशीबाग राम मंदिर, पुणे श्रीराम, सीता और लक्ष्मण; परिसर में हनुमान, गणेश, विट्ठल-रुक्मिणी, दत्तात्रेय, शिव
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Ambarnath, महाराष्ट्र अंबरेश्वर शिव मंदिर, अंबरनाथ भगवान शिव (अंबरेश्वर)