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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

मांढरदेवी काळूबाई मंदिर, मांढरदेव (सातारा)

Mandhardevi Kalubai Temple, Mandhardev (Satara)

Satara, महाराष्ट्र श्री काळेश्वरी देवी (काळूबाई) निःशुल्क प्रवेश

मांढरदेवी काळूबाई मंदिर महाराष्ट्र के सातारा जिले में वाई के पास एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित देवी मंदिर है। यहाँ श्री काळेश्वरी देवी विराजमान हैं, जिन्हें भक्त काळूबाई कहते हैं। वे पश्चिम महाराष्ट्र के अनेक परिवारों की कुलदेवी हैं। पहाड़ी से पांडवगढ़ किला और आसपास की घाटियाँ दिखाई देती हैं।

मंदिर और विग्रह

स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर 400 वर्ष से अधिक पुराना है, पर इसकी स्थापना की निश्चित तिथि ज्ञात नहीं है। मंदिर की भूमि भगवान मांढरेश्वर और काळेश्वरी देवी के नाम पर दर्ज है। देवी की मूर्ति पर चाँदी के दो मुखवटे और रेशमी वस्त्र चढ़ाए जाते हैं। पूजा-अर्चना का अधिकार परंपरागत रूप से गुरव परिवार के पास है, जिसके सदस्य बारी-बारी से सेवा करते हैं। मंदिर के आसपास के वन-कुंज को भी भक्त पवित्र मानते हैं।

काळूबाई जत्रा

हर वर्ष जनवरी के आसपास पौष (शाकंभरी) पूर्णिमा पर दस दिवसीय काळूबाई जत्रा होती है। पूर्णिमा का दिन मुख्य होता है, जब देवी द्वारा असुरों के संहार के स्मरण में चौबीस घंटे का उत्सव चलता है। भक्त पूरणपोळी और दही-भात का नैवेद्य चढ़ाते हैं और प्रवेश के पास मांगीरबाबा के स्थान पर नारियल फोड़ते हैं। जत्रा में लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं।

2005 की दुर्घटना

25 जनवरी 2005 को जत्रा के दौरान नारियल पानी से फिसलन भरी पत्थर की सीढ़ियों पर भगदड़ मची, जिसमें लगभग 300 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई। इसके बाद प्रशासन ने जत्रा में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की। जत्रा के समय दर्शन करने वाले भक्तों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

यात्रा

मंदिर तक वाई से घाट मार्ग द्वारा पहुँचा जाता है। निकटतम रेलवे स्टेशन सातारा है। यात्रा में कृष्णा तट पर बसे वाई के घाट और ढोल्या गणपति मंदिर जोड़े जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से शाम लगभग 8:00 बजे तक
  • आरती: प्रातः और संध्या

जत्रा के दिनों में समय और व्यवस्था प्रशासन के निर्देशों के अनुसार बदलती है।

मुख्य आकर्षण

  • काळूबाई (काळेश्वरी देवी) की मूर्ति – चाँदी के मुखवटे और रेशमी वस्त्र।
  • प्रवेश के पास मांगीरबाबा का स्थान।
  • पहाड़ी से पांडवगढ़ और आसपास की घाटियों का दृश्य।
  • वाई का ढोल्या गणपति और कृष्णा घाट।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: सातारा रेलवे स्टेशन, वहाँ से सड़क मार्ग।
  • सड़क मार्ग: वाई से घाट मार्ग द्वारा लगभग 12–20 किमी; वाई से एसटी बसें और टैक्सी। जत्रा में प्रशासन की ओर से विशेष बस व्यवस्था।
  • हवाई मार्ग: पुणे हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मांढरदेवी में कौन-सी देवी विराजमान हैं?
मांढरदेव के मंदिर में श्री काळेश्वरी देवी विराजमान हैं, जिन्हें भक्त प्रेम से काळूबाई कहते हैं। वे महाराष्ट्र के अनेक परिवारों की कुलदेवी हैं।
काळूबाई जत्रा कब होती है?
काळूबाई जत्रा हर वर्ष जनवरी के आसपास पौष (शाकंभरी) पूर्णिमा पर होती है। यह लगभग दस दिन चलती है और पूर्णिमा का दिन मुख्य होता है, जब लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
मांढरदेवी मंदिर कहाँ है?
मंदिर सातारा जिले में वाई के पास एक ऊँची पहाड़ी पर है। वाई से घाट मार्ग द्वारा मंदिर तक पहुँचा जा सकता है; पहाड़ी से पांडवगढ़ किला दिखाई देता है।
मांढरदेवी में 2005 में क्या हुआ था?
25 जनवरी 2005 को जत्रा के दौरान मंदिर की फिसलन भरी पत्थर की सीढ़ियों पर भगदड़ मची, जिसमें लगभग 300 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई। इसके बाद जत्रा में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई।
मंदिर की पूजा कौन करता है?
मंदिर में पूजा-अर्चना का अधिकार परंपरागत रूप से गुरव परिवार के पास है। जत्रा में देवी के चाँदी के मुखवटों की पालकी भी यही परिवार निकालता है।

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