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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

विमला देवी मंदिर, जगन्नाथ मंदिर परिसर पुरी

Vimala (Bimala) Temple, Jagannath Temple Complex, Puri

पुरी, ओडिशा माँ विमला; भैरव – भगवान जगन्नाथ निःशुल्क प्रवेश

विमला देवी मंदिर (ओड़िया में बिमला) ओडिशा के पुरी में विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के भीतरी परिसर में स्थित माँ विमला का मंदिर है। यह रोहिणी कुंड के पास, मुख्य मंदिर के दक्षिण-पश्चिमी कोने में है। शाक्त परंपरा में माँ विमला को जगन्नाथ धाम की अधिष्ठात्री शक्ति और भगवान जगन्नाथ को उनका भैरव माना जाता है। इसी कारण पुरी को वैष्णव और शाक्त – दोनों परंपराओं का संगम कहा जाता है।

शक्तिपीठ की मान्यता

तंत्र चूड़ामणि की सूची में उत्कल पीठ का उल्लेख है, जहाँ सती की नाभि गिरी थी – वहाँ की शक्ति विमला और भैरव जगन्नाथ बताए गए हैं। इस पीठ का स्थान आम तौर पर जाजपुर का बिरजा मंदिर माना जाता है, जबकि एक मत पुरी के विमला मंदिर को ही शक्तिपीठ मानता है। कुछ परंपराएँ पुरी में सती के चरण गिरने की बात भी कहती हैं। ओडिशा के लोग दोनों स्थानों को समान श्रद्धा से पूजते हैं।

महाप्रसाद और विमला

जगन्नाथ मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा माँ विमला से जुड़ी है। मंदिर की रसोई में बना भोग पहले भगवान जगन्नाथ को चढ़ाया जाता है और उसके बाद माँ विमला को अर्पित किया जाता है। विमला को अर्पण होने के बाद ही वह भोग महाप्रसाद कहलाता है और आनंद बाज़ार में भक्तों को मिलता है। मंदिर कलिंग स्थापत्य की रेखा देउल शैली में बलुआ पत्थर से बना है; गर्भगृह में माँ विमला की चतुर्भुजा प्रतिमा है।

दुर्गा पूजा और उत्सव

  • दुर्गा पूजा (आश्विन): माँ विमला की सोलह दिनों की विशेष पूजा, जिसे षोडश पूजा कहते हैं – इसके साथ तांत्रिक विधि से कुछ गुप्त अनुष्ठान भी होते हैं।
  • रथ यात्रा और स्नान पूर्णिमा के समय पूरे मंदिर परिसर में भारी भीड़ रहती है।
  • नवरात्रि में देवी के अलग-अलग वेश (बेश) सजाए जाते हैं।

दर्शन के नियम

जगन्नाथ मंदिर परिसर में केवल हिंदुओं को प्रवेश मिलता है। मोबाइल, कैमरा, चमड़े की बेल्ट-पर्स आदि बाहर जमा करने होते हैं। मुख्य मंदिर के दर्शन के बाद परिक्रमा मार्ग में विमला मंदिर आता है। पुरी चार धामों में से एक है, इसलिए यहाँ आने वाले यात्री जगन्नाथ, विमला, लक्ष्मी मंदिर और स्वर्गद्वार के दर्शन एक साथ करते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: जगन्नाथ मंदिर खुलने के समय के अनुसार – सुबह लगभग 5:00 से रात 11:00 बजे तक
  • भोग और विशेष अनुष्ठानों के समय कुछ देर दर्शन बंद रहते हैं।

जगन्नाथ मंदिर परिसर में केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति है। मोबाइल, कैमरा और चमड़े का सामान अंदर ले जाना मना है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ विमला – चतुर्भुजा प्रतिमा।
  • रोहिणी कुंड – मंदिर के पास पवित्र कुंड।
  • श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन (मुख्य मंदिर)।
  • आनंद बाज़ार – महाप्रसाद का बाज़ार।
  • स्वर्गद्वार समुद्र तट और गुंडिचा मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: पुरी रेलवे स्टेशन (लगभग 3 किमी) – देश के कई शहरों से सीधी ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: भुवनेश्वर से लगभग 60 किमी; बस और टैक्सी आसानी से मिलती हैं।
  • हवाई मार्ग: बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर (लगभग 60 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विमला मंदिर पुरी कहाँ स्थित है?
विमला मंदिर पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के भीतरी परिसर में, रोहिणी कुंड के पास स्थित है। जगन्नाथ के दर्शन के बाद भक्त माँ विमला के दर्शन करते हैं।
विमला मंदिर को शक्तिपीठ क्यों माना जाता है?
तंत्र चूड़ामणि में उत्कल पीठ की शक्ति विमला और भैरव जगन्नाथ बताए गए हैं। उस पीठ का स्थान जाजपुर (बिरजा) माना जाता है, जबकि एक मत पुरी के विमला मंदिर को शक्तिपीठ मानता है।
पुरी में महाप्रसाद कब बनता है?
परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ को चढ़ाया गया भोग पहले माँ विमला को अर्पित होता है, उसके बाद ही वह महाप्रसाद कहलाता है।
क्या विमला मंदिर में गैर-हिंदू जा सकते हैं?
नहीं। विमला मंदिर जगन्नाथ मंदिर परिसर के अंदर है, जहाँ केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति है।
विमला मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव कौन सा है?
आश्विन मास की दुर्गा पूजा सबसे बड़ा उत्सव है। इस समय माँ विमला की सोलह दिनों तक विशेष पूजा होती है।

विमला देवी मंदिर, जगन्नाथ मंदिर परिसर पुरी इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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