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कार्तिक कृष्ण द्वादशी

भक्तिरस – BhaktiRas

थिल्लई नटराज मंदिर, चिदंबरम

Thillai Nataraja Temple, Chidambaram

चिदंबरम, तमिलनाडु भगवान शिव (नटराज) – आकाश लिंगम; देवी शिवकामसुंदरी निःशुल्क प्रवेश

थिल्लई नटराज मंदिर तमिलनाडु के कडलूर ज़िले में चिदंबरम नगर में स्थित भगवान शिव का अत्यंत प्राचीन मंदिर है। यहाँ शिव नटराज – नृत्य के स्वामी – के रूप में आनंद तांडव करते हुए विराजमान हैं। यह पंचभूत स्थलों में आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। शैव परंपरा में चिदंबरम को इतना महत्व दिया जाता है कि तमिल में केवल “कोइल” (मंदिर) कहने से इसी मंदिर का बोध होता है।

आनंद तांडव की कथा

स्थल पुराण के अनुसार थिल्लई (मैंग्रोव) के वन में तपस्या कर रहे ऋषियों के अहंकार को दूर करने के लिए शिव भिक्षु रूप में आए। ऋषियों ने यज्ञ से उत्पन्न बाघ, सर्प और अपस्मार नामक बौने राक्षस को शिव पर छोड़ा। शिव ने बाघ की खाल ओढ़ ली, सर्प को आभूषण बना लिया और अपस्मार (अज्ञान का प्रतीक) को पैर के नीचे दबाकर आनंद तांडव किया। इस नृत्य के दर्शन के लिए तपस्या करने वाले ऋषि पतंजलि और व्याघ्रपाद को शिव ने यहीं नृत्य के दर्शन कराए। नटराज की मूर्ति सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह – शिव के पाँच कार्यों (पंचकृत्य) का प्रतीक है।

चिदंबर रहस्य – आकाश लिंगम

यहाँ शिव तीन रूपों में पूजे जाते हैं – साकार रूप में नटराज, साकार-निराकार रूप में स्फटिक लिंगम (चंद्रमौलीश्वर), और निराकार रूप में आकाश। नटराज के पास एक पर्दे के पीछे का स्थान खाली दिखाई देता है, जहाँ केवल सुनहरे बिल्व पत्रों की माला लटकी होती है – इसे चिदंबर रहस्य कहते हैं। आरती के समय पर्दा हटाकर यह दिखाया जाता है कि ईश्वर निराकार आकाश के रूप में सर्वत्र है। “चिदंबरम” का अर्थ ही है – चित् (चेतना) का अंबर (आकाश)।

स्वर्ण छत और वास्तुकला

नटराज का गर्भगृह चित् सभा (कनक सभा) कहलाता है, जिसकी छत सोने की प्लेटों से मढ़ी है। परंपरा के अनुसार इसमें 21,600 स्वर्ण पट्टिकाएँ हैं – मनुष्य द्वारा दिन भर में ली जाने वाली साँसों की संख्या – और 72,000 कीलें, जो शरीर की नाड़ियों का प्रतीक हैं। चोल राजाओं ने नटराज को अपना कुलदेवता माना और मंदिर को भव्य रूप दिया। मंदिर के पूर्वी और पश्चिमी गोपुरमों पर भरतनाट्यम के 108 करण (नृत्य मुद्राएँ) उकेरे गए हैं। मंदिर का प्रबंधन परंपरा से पोदु दीक्षितर करते हैं। परिसर के भीतर भगवान विष्णु का गोविंदराज पेरुमल मंदिर भी है, जो दिव्य देशमों में गिना जाता है – एक ही स्थान से शिव और विष्णु दोनों के दर्शन होते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • आरुद्रा दर्शनम: तमिल माह मार्गऴि (दिसंबर-जनवरी) में – नटराज की रथ यात्रा और विशेष दर्शन।
  • आनि तिरुमंजनम: तमिल माह आनि (जून-जुलाई) में नटराज का महाभिषेक।
  • नाट्यांजलि: महाशिवरात्रि पर देशभर के शास्त्रीय नर्तक नटराज को नृत्य अर्पित करते हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • दोपहर विश्राम: 12:00 से 5:00 बजे तक
  • शाम: 5:00 से रात लगभग 10:00 बजे तक
  • दैनिक छह काल पूजा – स्फटिक लिंगम का अभिषेक प्रातः और रात्रि पूजा में

आरुद्रा दर्शन और आनि तिरुमंजनम पर समय बदल जाता है।

मुख्य आकर्षण

  • नटराज का आनंद तांडव स्वरूप और चिदंबर रहस्य।
  • कनक सभा की स्वर्ण छत।
  • गोपुरमों पर भरतनाट्यम के 108 करण।
  • शिवगंगा सरोवर और सहस्र स्तंभ मंडप।
  • गोविंदराज पेरुमल – परिसर में दिव्य देशम; पिचावरम मैंग्रोव वन (लगभग 15 किमी)।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: चिदंबरम रेलवे स्टेशन (लगभग 1.5 किमी) – चेन्नई, तिरुचिरापल्ली और तंजावुर से ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: चेन्नई से लगभग 230 किमी, पुडुचेरी से लगभग 65 किमी – नियमित बसें।
  • हवाई मार्ग: पुडुचेरी (लगभग 65 किमी), तिरुचिरापल्ली (लगभग 165 किमी) और चेन्नई (लगभग 230 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चिदंबरम मंदिर किस तत्व का प्रतीक है?
चिदंबरम नटराज मंदिर पंचभूत स्थलों में आकाश तत्व का प्रतीक है। यहाँ शिव की निराकार आकाश रूप में भी पूजा होती है।
चिदंबर रहस्य क्या है?
नटराज के पास पर्दे के पीछे एक खाली स्थान है, जहाँ केवल सुनहरे बिल्व पत्रों की माला लटकी होती है। आरती के समय पर्दा हटाकर दिखाया जाता है कि ईश्वर निराकार आकाश रूप में सर्वत्र हैं – इसे चिदंबर रहस्य कहते हैं।
नटराज की मूर्ति का क्या अर्थ है?
नटराज का आनंद तांडव शिव के पाँच कार्यों – सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह – का प्रतीक है। पैर के नीचे दबा अपस्मार अज्ञान का प्रतीक है।
चिदंबरम मंदिर का दर्शन समय क्या है?
मंदिर सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे और शाम 5:00 से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है।
क्या चिदंबरम में विष्णु मंदिर भी है?
हाँ, नटराज मंदिर परिसर के भीतर गोविंदराज पेरुमल मंदिर है, जो 108 दिव्य देशमों में गिना जाता है। यहाँ से शिव और विष्णु दोनों के दर्शन एक साथ होते हैं।

थिल्लई नटराज मंदिर, चिदंबरम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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