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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री देवी तालाब मंदिर (त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ), जालंधर

Shri Devi Talab Mandir (Tripurmalini Shaktipeeth), Jalandhar

जालंधर, पंजाब माँ त्रिपुरमालिनी (माँ दुर्गा); भैरव – भीषण निःशुल्क प्रवेश

श्री देवी तालाब मंदिर पंजाब के जालंधर नगर के बीच, रेलवे स्टेशन के पास स्थित माँ दुर्गा का प्रसिद्ध मंदिर और शक्तिपीठ है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार जालंधर में सती का बायाँ स्तन गिरा था। यहाँ की शक्ति त्रिपुरमालिनी और भैरव भीषण हैं। मंदिर के सामने एक विशाल प्राचीन सरोवर (तालाब) है, जिसके कारण इसका नाम देवी तालाब मंदिर पड़ा। पंजाब में यह देवी उपासना का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।

जालंधर नाम और पौराणिक संबंध

जालंधर नगर का नाम पुराणों में वर्णित असुर जालंधर से जोड़ा जाता है, जिसकी पत्नी वृंदा के पतिव्रत की कथा प्रसिद्ध है। इसी क्षेत्र को पुराने ग्रंथों में “जालंधर पीठ” कहा गया है – शाक्त और नाथ परंपरा में यह चार प्रमुख तांत्रिक पीठों (ओड्डियान, जालंधर, पूर्णगिरि और कामरूप) में से एक माना गया है। सती का अंग गिरने के कारण यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में पूजित हुआ।

मंदिर परिसर

परिसर में माँ त्रिपुरमालिनी (दुर्गा) का मुख्य मंदिर है, जिसका सुनहरा शिखर तालाब के जल में सुंदर प्रतिबिंब बनाता है। परिसर का सबसे पुराना भाग माँ काली का प्राचीन मंदिर है, जिसे शक्तिपीठ का मूल स्थान माना जाता है। परिसर में अमरनाथ गुफा की झाँकी भी बनाई गई है, जहाँ बर्फ़ानी बाबा का स्वरूप दर्शाया गया है। मंदिर में नियमित लंगर चलता है और नवरात्रि में यहाँ देशभर से श्रद्धालु आते हैं।

हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन

देवी तालाब मंदिर भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में भी विशेष स्थान रखता है। संत बाबा हरिवल्लभ की स्मृति में हर वर्ष दिसंबर में यहाँ हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन होता है, जो 19वीं शताब्दी से लगातार चल रहा है और भारत के सबसे पुराने संगीत समारोहों में गिना जाता है। देश के बड़े-बड़े शास्त्रीय गायक और वादक माँ के दरबार में अपनी प्रस्तुति देना सौभाग्य मानते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: विशाल मेला, जागरण और भारी भीड़।
  • दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन और विशेष श्रृंगार।
  • हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन (दिसंबर)।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात 10:00 बजे तक
  • आरती: सुबह और संध्या

नवरात्रि में मंदिर देर रात तक खुला रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ त्रिपुरमालिनी (दुर्गा) का मुख्य मंदिर – सुनहरा शिखर।
  • पवित्र तालाब – जिसके नाम पर मंदिर का नाम है।
  • प्राचीन काली मंदिर – परिसर का सबसे पुराना मंदिर।
  • अमरनाथ गुफा की झाँकी – परिसर में बनी कृत्रिम गुफा।
  • हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन – हर दिसंबर।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन (लगभग 1.5 किमी) – दिल्ली, अमृतसर, जम्मू से ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: अमृतसर से लगभग 80 किमी, लुधियाना से लगभग 60 किमी; शहर में ऑटो और रिक्शा।
  • हवाई मार्ग: आदमपुर हवाई अड्डा (लगभग 25 किमी) या अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 90 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जालंधर शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार जालंधर में सती का बायाँ स्तन गिरा था। यहाँ की शक्ति त्रिपुरमालिनी और भैरव भीषण हैं।
देवी तालाब मंदिर का नाम कैसे पड़ा?
मंदिर के सामने एक विशाल प्राचीन सरोवर (तालाब) है, जिसे पवित्र माना जाता है। देवी के मंदिर और इसी तालाब के कारण इसे देवी तालाब मंदिर कहा जाता है।
हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन कब होता है?
हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन हर वर्ष दिसंबर में देवी तालाब मंदिर परिसर में होता है। यह भारत के सबसे पुराने शास्त्रीय संगीत समारोहों में से एक है।
जालंधर स्टेशन से देवी तालाब मंदिर कितनी दूर है?
जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन से देवी तालाब मंदिर लगभग 1.5 किमी दूर है। ऑटो या रिक्शा से 5-10 मिनट लगते हैं।
देवी तालाब मंदिर में अमरनाथ गुफा क्या है?
मंदिर परिसर में अमरनाथ गुफा की एक झाँकी (कृत्रिम गुफा) बनाई गई है, जिसमें बर्फ़ानी बाबा का स्वरूप दिखाया गया है। जो श्रद्धालु अमरनाथ नहीं जा पाते, वे यहाँ दर्शन करते हैं।

श्री देवी तालाब मंदिर (त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ), जालंधर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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