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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

चारभुजा नाथ मंदिर, बूंदी

Charbhuja Nath Temple, Bundi

बूंदी, राजस्थान श्री चारभुजा नाथ (भगवान विष्णु का चतुर्भुज रूप) निःशुल्क प्रवेश

चारभुजा नाथ मंदिर राजस्थान के बूंदी शहर के पुराने हिस्से में तिलक चौक पर स्थित भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप का मंदिर है। पूर्वमुखी यह मंदिर राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग के अधीन है और विशेष रूप से अपनी होली – फागोत्सव – के लिए प्रसिद्ध है।

स्थल का इतिहास

स्थानीय मान्यता के अनुसार यह स्थल पहले क्षरणेश्वर महादेव का शिव मंदिर था, जो 13वीं शताब्दी से भी पुराना बताया जाता है। 16वीं शताब्दी में बूंदी के हाड़ा चौहान राजा राव राजा सुर्जन सिंह को स्वप्न में चारभुजा नाथ ने आदेश दिया, और उन्होंने रणथंभौर किले से लाई गई चारभुजा प्रतिमा यहाँ स्थापित करवाई। पुरानी शिव प्रतिमा को बाहर के मंडप में रखा गया। इस प्रकार एक ही परिसर में विष्णु और शिव दोनों की परंपरा जुड़ी है।

प्रमुख उत्सव

  • फागोत्सव (होली): कई दिनों तक भगवान के साथ फूलों की पंखुड़ियों और गुलाल से होली – सदियों पुरानी परंपरा, जिसमें हज़ारों श्रद्धालु आते हैं।
  • जन्माष्टमी – विशेष श्रृंगार और उत्सव।
  • एकादशी पर विशेष दर्शन; प्रतिदिन आरती और भजन।

आसपास के दर्शन

पुराने बूंदी शहर में मंदिर के आसपास तारागढ़ किला, बूंदी पैलेस और प्रसिद्ध बावड़ियाँ हैं। बूंदी से कुछ दूरी पर केशोरायपाटन का केशवराय मंदिर भी दर्शनीय है। राजस्थान सरकार ने वर्ष 2024 में इस मंदिर को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने की योजना की घोषणा की थी।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह और शाम (दोपहर में कुछ समय पट बंद)
  • आरती: प्रतिदिन सुबह-शाम आरती और भजन

होली के फागोत्सव और जन्माष्टमी पर भीड़ अधिक रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • श्री चारभुजा नाथ – विष्णु का चतुर्भुज विग्रह।
  • क्षरणेश्वर महादेव – प्राचीन शिव प्रतिमा, बाहर के मंडप में।
  • फागोत्सव – फूलों और गुलाल की होली।
  • पास में तारागढ़ किला और बूंदी पैलेस।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: पुराने बूंदी शहर के तिलक चौक में; कोटा और जयपुर से नियमित बसें।
  • रेल मार्ग: बूंदी रेलवे स्टेशन; बड़ा जंक्शन कोटा (लगभग 40 किमी)।
  • हवाई मार्ग: जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 200 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चारभुजा नाथ मंदिर बूंदी में कहाँ है?
यह मंदिर बूंदी के पुराने शहर में तिलक चौक पर, ज़िला मुख्यालय से लगभग 1.5 किमी दूर स्थित है।
चारभुजा नाथ की प्रतिमा किसने स्थापित की?
स्थानीय मान्यता के अनुसार हाड़ा चौहान राजा राव राजा सुर्जन सिंह ने स्वप्न में मिले आदेश पर रणथंभौर किले से लाई गई चारभुजा प्रतिमा यहाँ स्थापित की।
क्या यहाँ पहले शिव मंदिर था?
स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थल पहले क्षरणेश्वर महादेव का शिव मंदिर था। चारभुजा प्रतिमा की स्थापना के बाद पुरानी शिव प्रतिमा बाहर के मंडप में रखी गई।
चारभुजा नाथ मंदिर का फागोत्सव क्या है?
होली पर यहाँ कई दिनों तक फागोत्सव मनाया जाता है, जिसमें भगवान के साथ फूलों की पंखुड़ियों और गुलाल से होली खेली जाती है। इसमें हज़ारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मंदिर में और कौन से पर्व मनाए जाते हैं?
होली के अलावा जन्माष्टमी यहाँ का प्रमुख पर्व है। एकादशी पर भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन को आते हैं।

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