चारभुजा मंदिर राजस्थान के राजसमंद ज़िले की कुंभलगढ़ तहसील के गढ़बोर गाँव में स्थित भगवान चारभुजानाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। चारभुजानाथ भगवान विष्णु का चतुर्भुज स्वरूप हैं, जिन्हें भक्त श्रीकृष्ण के रूप में भी पूजते हैं। मेवाड़ क्षेत्र में यह मंदिर अत्यंत लोकप्रिय है और गाँव को भी आम तौर पर “चारभुजा” नाम से ही जाना जाता है।
मंदिर और विग्रह
गर्भगृह में चारभुजानाथ की प्रतिमा विराजमान है, जिसके चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म हैं। गर्भगृह के ऊपर ऊँचा शिखर है और प्रवेश द्वार के दोनों ओर पत्थर के हाथी बने हैं।
स्थापना को लेकर मत
कुछ स्रोत मंदिर का निर्माण 1444 ई. का बताते हैं, किंतु निर्माणकर्ता के नाम पर अलग-अलग मत हैं। स्थानीय कथाएँ प्रतिमा को इससे कहीं अधिक प्राचीन मानती हैं – एक मान्यता के अनुसार इस प्रतिमा की पूजा पांडवों ने की थी और बाद में स्वप्न में मिले संकेत से इसे यहाँ स्थापित किया गया। ये कथाएँ परंपरा पर आधारित हैं।
प्रमुख उत्सव
- जलझूलनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल एकादशी): सबसे बड़ा मेला, भगवान की शोभायात्रा और भारी भीड़।
- फागोत्सव – होली के अवसर पर।
- जन्माष्टमी और अन्नकूट महोत्सव।
आसपास के दर्शन
चारभुजा से लगभग 32 किमी दूर कुंभलगढ़ किला है। उदयपुर से आने वाले यात्री प्रायः नाथद्वारा के श्रीनाथजी और कैलाशपुरी के एकलिंगजी के दर्शन के साथ चारभुजा की यात्रा करते हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 5:00 बजे से रात लगभग 9:00 बजे तक, दोपहर में कुछ समय पट बंद
समय पर्वों और ऋतु के अनुसार बदल सकता है; जलझूलनी एकादशी पर विशेष भीड़ रहती है।
मुख्य आकर्षण
- चारभुजानाथ – शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए चतुर्भुज प्रतिमा।
- प्रवेश द्वार के दोनों ओर पत्थर के हाथी।
- जलझूलनी एकादशी की शोभायात्रा और मेला।
- कुंभलगढ़ किला (लगभग 32 किमी)।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: उदयपुर से लगभग 112 किमी, राजसमंद और कुंभलगढ़ से सड़क मार्ग द्वारा; बस और टैक्सी उपलब्ध।
- रेल मार्ग: निकटतम बड़ा स्टेशन उदयपुर सिटी।
- हवाई मार्ग: महाराणा प्रताप हवाई अड्डा, डबोक, उदयपुर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चारभुजा मंदिर कहाँ है?
चारभुजानाथ कौन हैं?
चारभुजा का मेला कब लगता है?
चारभुजा मंदिर कितना पुराना है?
चारभुजा मंदिर में कौन से उत्सव मनाए जाते हैं?
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