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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

सुंधा माता मंदिर, जालोर

Sundha Mata Temple, Jalore

जालोर, राजस्थान माँ चामुंडा (सुंधा माता / अघटेश्वरी) निःशुल्क प्रवेश

सुंधा माता मंदिर राजस्थान के जालोर ज़िले में भीनमाल के पास अरावली की सुंधा पहाड़ी पर स्थित माँ चामुंडा का प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर 900 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है। मारवाड़ क्षेत्र में सुंधा माता की गहरी आस्था है, और पहाड़ी पर बने इस मंदिर तक पहुँचने के लिए अब रोपवे की सुविधा भी है।

इतिहास और सुंधा शिलालेख

मान्यता है कि मंदिर का निर्माण देवल प्रतिहारों ने जालोर के चौहानों के सहयोग से करवाया। पहाड़ी पर मिला सुंधा शिलालेख विक्रम संवत 1319 (लगभग 1262 ई.) का है और जालोर के चौहान राजा चाचिगदेव से जुड़ा है। संस्कृत के इस शिलालेख में नाडोल और जालोर के चाहमान (चौहान) शासकों की वंशावली दी गई है और देवी के मंदिर को दिए गए दान का उल्लेख है। इसमें देवी को अघटेश्वरी कहा गया है। यह शिलालेख जालोर के चौहानों के इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।

मंदिर और दर्शन

मुख्य मंदिर में माँ चामुंडा (सुंधा माता) विराजती हैं, और उनके पास एक शिवलिंग भी स्थापित है। श्रद्धालु सीढ़ी मार्ग से पैदल या रोपवे से ऊपर पहुँचते हैं। पहाड़ी से अरावली के हरे-भरे दृश्य दिखाई देते हैं, विशेषकर वर्षा ऋतु के बाद।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि – वर्ष में दो बार बड़े मेले और सबसे अधिक भीड़।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00–7:00 से रात लगभग 8:00–9:00 बजे तक
  • आरती: सुबह और संध्या आरती

रोपवे का समय अलग होता है; नवरात्रि में भीड़ के कारण व्यवस्था बदल सकती है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ चामुंडा (सुंधा माता) – पहाड़ी पर स्थित मुख्य मंदिर।
  • सुंधा शिलालेख – जालोर के चौहान राजा चाचिगदेव का 1262 ई. का शिलालेख।
  • रोपवे – पहाड़ी पर चढ़ने के लिए।
  • चामुंडा माता के पास स्थापित शिवलिंग।
  • अरावली की पहाड़ियों के प्राकृतिक दृश्य।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: भीनमाल से लगभग 22 किमी, जसवंतपुरा के पास; जालोर, भीनमाल और माउंट आबू की ओर से बसें और टैक्सी।
  • रेल मार्ग: भीनमाल रेलवे स्टेशन (लगभग 22 किमी); छोटा स्टेशन मारवाड़ कोरी लगभग 13 किमी बताया जाता है।
  • हवाई मार्ग: निकटतम बड़े हवाई अड्डे जोधपुर और उदयपुर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सुंधा माता मंदिर कहाँ है?
सुंधा माता मंदिर राजस्थान के जालोर ज़िले में भीनमाल से लगभग 22 किमी दूर, जसवंतपुरा के पास अरावली की सुंधा पहाड़ी पर स्थित है।
सुंधा माता कौन सी देवी हैं?
सुंधा माता देवी चामुंडा का स्वरूप हैं। 1262 ई. के सुंधा शिलालेख में देवी को अघटेश्वरी नाम से संबोधित किया गया है।
सुंधा शिलालेख क्या है?
सुंधा पहाड़ी पर मिला यह संस्कृत शिलालेख विक्रम संवत 1319 (लगभग 1262 ई.) का है और जालोर के चौहान राजा चाचिगदेव से जुड़ा है। इसमें नाडोल और जालोर के चाहमान (चौहान) शासकों की वंशावली और देवी के मंदिर को दिए गए दान का उल्लेख है।
क्या सुंधा माता मंदिर तक रोपवे है?
हाँ, पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुँचने के लिए रोपवे की सुविधा है। श्रद्धालु सीढ़ी मार्ग से पैदल भी चढ़ सकते हैं।
सुंधा माता मंदिर में मेला कब लगता है?
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहाँ वर्ष में दो बार बड़े मेले लगते हैं, जब दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

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