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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

ब्रह्मा मंदिर (जगतपिता ब्रह्मा मंदिर), पुष्कर

Brahma Temple (Jagatpita Brahma Mandir), Pushkar

पुष्कर, राजस्थान भगवान ब्रह्मा (चतुर्मुख), साथ में गायत्री और सरस्वती निःशुल्क प्रवेश

ब्रह्मा मंदिर, जिसे जगतपिता ब्रह्मा मंदिर भी कहते हैं, राजस्थान के अजमेर ज़िले में पवित्र पुष्कर सरोवर के पास स्थित सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा का मंदिर है। भारत में ब्रह्मा जी के मंदिर गिने-चुने हैं और उनमें पुष्कर का यह मंदिर सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख है। इसी कारण पुष्कर को तीर्थों में विशेष स्थान प्राप्त है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।

सावित्री के श्राप की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी ने पुष्कर में एक महान यज्ञ किया। यज्ञ में पत्नी का साथ होना आवश्यक था, किंतु उनकी पत्नी सावित्री समय पर नहीं पहुँचीं। तब ब्रह्मा जी ने गायत्री से विवाह कर यज्ञ पूरा किया। रुष्ट होकर सावित्री ने श्राप दिया कि ब्रह्मा की कहीं पूजा नहीं होगी; बाद में उन्होंने श्राप को नरम करते हुए केवल पुष्कर में उनकी पूजा की अनुमति दी। मान्यता है कि मंदिर का स्थान स्वयं ब्रह्मा जी ने चुना था।

इतिहास

परंपरा के अनुसार मूल मंदिर ऋषि विश्वामित्र ने ब्रह्मा जी के यज्ञ के बाद बनवाया था, और 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा इसके जीर्णोद्धार की मान्यता है। वर्तमान भवन 14वीं शताब्दी का माना जाता है, जिसमें बाद में भी मरम्मत और आंशिक पुनर्निर्माण हुआ।

मंदिर और विग्रह

मंदिर संगमरमर और पत्थर से ऊँचे चबूतरे पर बना है, जहाँ संगमरमर की सीढ़ियों से पहुँचा जाता है। इसका लाल शिखर और ब्रह्मा जी के वाहन हंस की आकृतियाँ इसकी पहचान हैं। गर्भगृह में चतुर्मुख ब्रह्मा की संगमरमर की प्रतिमा है, जिनके हाथों में माला, पुस्तक, कुशा और कमंडल हैं; बाईं ओर गायत्री और दाईं ओर सरस्वती विराजती हैं। मंडप में चाँदी का कछुआ है और फ़र्श व दीवारों में भक्तों द्वारा जड़वाए चाँदी के सिक्के दिखते हैं। गर्भगृह में केवल संन्यासी पुजारी प्रवेश करते हैं, भक्तों का प्रसाद बाहरी मंडप से उनके माध्यम से चढ़ता है।

प्रमुख उत्सव

  • कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर-नवंबर): सबसे बड़ा पर्व – हज़ारों श्रद्धालु पुष्कर सरोवर में स्नान करते हैं; इसी समय प्रसिद्ध पुष्कर मेला लगता है।
  • हर पूर्णिमा और अमावस्या पर विशेष पूजा।

आसपास के दर्शन

ब्रह्मा मंदिर के पीछे रत्नागिरी पहाड़ी पर सावित्री माता मंदिर है, जहाँ सीढ़ियों से लगभग एक घंटे में पहुँचा जाता है और ऊपर से सरोवर का सुंदर दृश्य दिखता है। सरोवर के पूर्वी ओर एक छोटी पहाड़ी पर गायत्री मंदिर है। पुष्कर सरोवर के घाटों पर स्नान और संध्या आरती भी यात्रा का अभिन्न अंग है।

दर्शन का समय

  • सर्दियों में: सुबह लगभग 6:30 से रात 8:30 बजे तक
  • गर्मियों में: सुबह लगभग 6:00 से रात 9:00 बजे तक
  • दोपहर लगभग 1:30 से 3:00 बजे तक पट बंद

मंगला आरती सूर्योदय से पहले और संध्या आरती सूर्यास्त के कुछ देर बाद होती है।

मुख्य आकर्षण

  • चतुर्मुख ब्रह्मा – संगमरमर की प्रतिमा, बाईं ओर गायत्री और दाईं ओर सरस्वती।
  • लाल शिखर और प्रवेश पर हंस की आकृतियाँ।
  • मंडप में चाँदी का कछुआ और फ़र्श में जड़े चाँदी के सिक्के।
  • पुष्कर सरोवर और उसके घाट।
  • रत्नागिरी पहाड़ी पर सावित्री माता मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: अजमेर से लगभग 15 किमी; अजमेर से नियमित बसें और टैक्सी।
  • रेल मार्ग: अजमेर जंक्शन (लगभग 15 किमी) – देश के कई शहरों से ट्रेनें; पुष्कर में छोटा स्टेशन भी है।
  • हवाई मार्ग: किशनगढ़ हवाई अड्डा या जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पुष्कर में ही ब्रह्मा जी का मंदिर क्यों है?
कथा के अनुसार पुष्कर में यज्ञ के समय ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री देर से पहुँचीं, तब ब्रह्मा जी ने गायत्री से विवाह कर यज्ञ पूरा किया। रुष्ट सावित्री ने श्राप दिया कि ब्रह्मा की कहीं पूजा नहीं होगी, बाद में उन्होंने केवल पुष्कर में पूजा की छूट दी।
क्या पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर भारत का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है?
भारत में ब्रह्मा जी के कुछ और मंदिर भी हैं, लेकिन वे बहुत कम हैं। पुष्कर का जगतपिता ब्रह्मा मंदिर उनमें सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख है।
पुष्कर ब्रह्मा मंदिर कितना पुराना है?
वर्तमान भवन 14वीं शताब्दी का माना जाता है। परंपरा के अनुसार मूल मंदिर विश्वामित्र ने बनवाया था और आदि शंकराचार्य ने इसका जीर्णोद्धार किया।
पुष्कर में सावित्री माता का मंदिर कहाँ है?
सावित्री माता मंदिर ब्रह्मा मंदिर के पीछे रत्नागिरी पहाड़ी पर है। सीढ़ियों से चढ़ाई में लगभग एक घंटा लगता है और ऊपर से पुष्कर सरोवर का सुंदर दृश्य दिखता है।
पुष्कर का सबसे बड़ा पर्व कब होता है?
कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर-नवंबर) पुष्कर का सबसे बड़ा पर्व है। इस समय हज़ारों श्रद्धालु पुष्कर सरोवर में स्नान करते हैं और प्रसिद्ध पुष्कर मेला भी लगता है।

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