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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

शीतलेश्वर महादेव मंदिर, झालरापाटन

Sitaleshwar Mahadev Temple, Jhalrapatan

झालावाड़, राजस्थान भगवान शिव (शीतलेश्वर महादेव) – शिवलिंग निःशुल्क प्रवेश

शीतलेश्वर महादेव मंदिर राजस्थान के झालावाड़ ज़िले में झालरापाटन के पास चंद्रभागा नदी के बाएँ तट पर स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार इसकी स्थापना 689 ई. में हुई थी, और यह राजस्थान के सबसे पुराने तिथियुक्त मंदिरों में गिना जाता है। यह नदी तट पर बने चंद्रभागा मंदिर समूह का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।

मंदिर और विग्रह

पूर्वमुखी मंदिर में स्तंभयुक्त मंडप, अंतराल और वर्गाकार गर्भगृह है। गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है और मंडप में उसके सामने नंदी विराजते हैं। मूल शिखर समय के साथ गिर चुका है; अब ऊपर सपाट छत और छोटा गुंबद है। मंडप, जिसे लगभग 10वीं शताब्दी में जोड़ा गया माना जाता है, के स्तंभों पर स्त्री आकृतियाँ, अष्टदिक्पाल और तपस्वी उकेरे गए हैं। गर्भगृह के द्वार पर पुष्प पट्टियाँ, नीचे गंगा-यमुना और ऊपर ललाट बिंब पर शैव आचार्य लकुलीश की प्रतिमा है।

इतिहास और संरक्षण

19वीं शताब्दी में पुरातत्ववेत्ता जेम्स फर्ग्यूसन और अलेक्ज़ेंडर कनिंघम ने इस मंदिर का सर्वेक्षण किया था। उस समय यह खंडहर अवस्था में था और मुख्यतः मंडप के स्तंभ ही बचे थे; फर्ग्यूसन ने इन स्तंभों की सुंदरता की विशेष प्रशंसा की। बाद में वहीं के पत्थरों से मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। आज यह ASI द्वारा “चंद्रभागा के पास पुराने मंदिर” नाम से राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में संरक्षित है।

चंद्रभागा मेला और आसपास के दर्शन

  • चंद्रभागा मेला: कार्तिक मास में, विशेषकर कार्तिक पूर्णिमा पर, श्रद्धालु चंद्रभागा नदी में स्नान करते हैं; साथ में बड़ा पशु मेला भी लगता है।
  • चंद्रभागा मंदिर समूह – शीतलेश्वर के पीछे और आसपास के अन्य प्राचीन शिव और विष्णु मंदिर।
  • झालरापाटन का सूर्य मंदिर और झालावाड़ का गढ़ पैलेस।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सामान्यतः सूर्योदय से सूर्यास्त तक

यह ASI संरक्षित स्मारक है; मंदिर समूह को दिन के उजाले में देखना सबसे अच्छा रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • शिवलिंग और मंडप में सामने विराजमान नंदी।
  • नक्काशीदार स्तंभ – स्त्री आकृतियाँ, अष्टदिक्पाल और तपस्वी।
  • गर्भगृह का द्वार – गंगा-यमुना और ललाट बिंब पर लकुलीश।
  • चंद्रभागा मंदिर समूह और नदी का घाट।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: झालरापाटन कस्बे के पास चंद्रभागा नदी तट पर; झालावाड़ शहर से लगभग 6-7 किमी, कोटा से सड़क द्वारा जुड़ा।
  • रेल मार्ग: झालावाड़ सिटी रेलवे स्टेशन; बड़ा जंक्शन कोटा।
  • हवाई मार्ग: निकटतम बड़े हवाई अड्डे जयपुर, उदयपुर या इंदौर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शीतलेश्वर महादेव मंदिर कितना पुराना है?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार यह मंदिर 689 ई. में बना था और राजस्थान के सबसे पुराने तिथियुक्त मंदिरों में गिना जाता है। इसका स्तंभयुक्त मंडप बाद में, लगभग 10वीं शताब्दी में जोड़ा गया माना जाता है।
यह मंदिर कहाँ स्थित है?
मंदिर राजस्थान के झालावाड़ ज़िले में झालरापाटन के पास चंद्रभागा नदी के बाएँ तट पर है। यह चंद्रभागा मंदिर समूह का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।
क्या यह संरक्षित स्मारक है?
हाँ, यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा 'चंद्रभागा के पास पुराने मंदिर' नाम से राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में संरक्षित है।
मंदिर की वास्तुकला की क्या विशेषता है?
पूर्वमुखी मंदिर में स्तंभयुक्त मंडप, अंतराल और वर्गाकार गर्भगृह है। स्तंभों पर स्त्री आकृतियाँ, दिक्पाल और तपस्वी उकेरे गए हैं, और गर्भगृह के द्वार पर गंगा-यमुना तथा लकुलीश की प्रतिमाएँ हैं। मूल शिखर गिर चुका है।
चंद्रभागा मेला कब लगता है?
झालरापाटन में चंद्रभागा नदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा के आसपास प्रसिद्ध चंद्रभागा मेला लगता है, जिसमें श्रद्धालु नदी में स्नान करते हैं।

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