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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

सालासर बालाजी मंदिर, सालासर (चूरू)

Salasar Balaji Temple, Salasar (Churu)

Churu, राजस्थान श्री हनुमान जी (सालासर बालाजी) निःशुल्क प्रवेश

सालासर बालाजी मंदिर राजस्थान के चूरू जिले में सुजानगढ़ के पास, जयपुर–बीकानेर राजमार्ग पर बसे सालासर कस्बे के बीचोंबीच स्थित हनुमान जी का प्रसिद्ध धाम है। यहाँ बालाजी दाढ़ी और मूँछ वाले स्वरूप में विराजते हैं, जो हनुमान जी की प्रतिमाओं में बहुत दुर्लभ माना जाता है। श्रद्धालु इसे “सालासर धाम” कहते हैं और खाटू श्याम जी के साथ यह शेखावाटी क्षेत्र का सबसे बड़ा तीर्थ माना जाता है।

आसोटा के खेत से प्रकट हुई प्रतिमा

मंदिर की कथा के अनुसार विक्रम संवत 1811 (1754 ई.) में श्रावण शुक्ल नवमी, मंगलवार के दिन नागौर क्षेत्र के आसोटा गाँव में एक किसान खेत जोत रहा था। उसका हल किसी पत्थर से टकराकर रुक गया। खुदाई करने पर हनुमान जी की प्रतिमा निकली। उसी समय किसान की पत्नी बाजरे का चूरमा लेकर आई थी, जो पहले भोग के रूप में बालाजी को चढ़ाया गया – तभी से यहाँ चूरमे का भोग लगाने की परंपरा है।

कहा जाता है कि उसी रात आसोटा के ठाकुर को स्वप्न में प्रतिमा सालासर भेजने का आदेश मिला, और सालासर के हनुमान भक्त मोहनदास जी महाराज को भी स्वप्न में बालाजी के आने का संकेत मिला। प्रतिमा सालासर लाई गई और मोहनदास जी ने यहाँ मंदिर की स्थापना की।

दाढ़ी-मूँछ वाले बालाजी और मोहनदास जी की धूणी

मान्यता है कि हनुमान जी ने मोहनदास जी को पहली बार दाढ़ी-मूँछ वाले रूप में दर्शन दिए थे, इसलिए उनकी इच्छा पर बालाजी का यही स्वरूप बनाया गया। मंदिर परिसर में मोहनदास जी की धूणी है – श्रद्धालु मानते हैं कि उनके द्वारा जलाई अग्नि आज तक प्रज्वलित है। मंदिर की पूजा-व्यवस्था पुजारी परिवार और श्री हनुमान सेवा समिति के हाथ में है।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती): वर्ष का पहला बड़ा मेला, लाखों श्रद्धालु।
  • आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा): दूसरा बड़ा मेला; दूर-दूर से पदयात्री पहुँचते हैं।
  • मंगलवार और शनिवार को नियमित रूप से भारी भीड़ रहती है।

यात्रा क्रम और आसपास के दर्शन

बालाजी के दर्शन के बाद भक्त पास के अंजनी माता मंदिर जाते हैं, जहाँ हनुमान जी की माता की पूजा होती है। शेखावाटी यात्रा में सालासर के साथ प्रायः खाटू श्याम जी (सीकर), जीण माता और रानी सती दादी मंदिर (झुंझुनूं) के दर्शन भी किए जाते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 10:00 बजे तक
  • आरती: सुबह मंगला आरती और संध्या आरती

मंगलवार, शनिवार और पूर्णिमा को भीड़ अधिक रहती है; मेलों के समय दर्शन का समय बढ़ा दिया जाता है।

मुख्य आकर्षण

  • सालासर बालाजी – दाढ़ी और मूँछ वाले हनुमान जी का अनोखा स्वरूप।
  • मोहनदास जी की धूणी – मान्यता है कि उनकी जलाई अग्नि आज भी प्रज्वलित है।
  • नारियल की भेंट – मन्नत माँगते समय भक्त नारियल अर्पित करते हैं।
  • अंजनी माता मंदिर – मुख्य मंदिर से थोड़ी दूरी पर।
  • खाटू श्याम जी (सीकर) इसी यात्रा मार्ग पर।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: सुजानगढ़ रेलवे स्टेशन (लगभग 25–30 किमी); सीकर जंक्शन से भी बसें मिलती हैं।
  • सड़क मार्ग: जयपुर–बीकानेर राजमार्ग पर; जयपुर से लगभग 170 किमी, सीकर से लगभग 55 किमी।
  • हवाई मार्ग: जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 180 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सालासर बालाजी की प्रतिमा कहाँ से आई थी?
कथा के अनुसार संवत 1811 (1754 ई.) में आसोटा गाँव के एक किसान का हल खेत में एक पत्थर से टकराया और खुदाई करने पर हनुमान जी की प्रतिमा निकली। स्वप्न में मिले संकेत के अनुसार यह प्रतिमा सालासर लाकर स्थापित की गई।
सालासर बालाजी के दाढ़ी-मूँछ क्यों हैं?
मान्यता है कि हनुमान जी ने भक्त मोहनदास जी को पहली बार दाढ़ी-मूँछ वाले रूप में दर्शन दिए थे। इसी कारण मोहनदास जी की इच्छा पर बालाजी का यही स्वरूप स्थापित हुआ।
सालासर बालाजी को चूरमे का भोग क्यों लगता है?
कथा है कि जिस दिन प्रतिमा निकली, किसान की पत्नी खेत में बाजरे का चूरमा लेकर आई थी और उसने वही चूरमा पहले भोग के रूप में चढ़ाया। तभी से बालाजी को चूरमे का भोग लगाने की परंपरा है।
सालासर में मेले कब लगते हैं?
सालासर में वर्ष में दो बड़े मेले लगते हैं – चैत्र (मार्च–अप्रैल) में हनुमान जयंती के आसपास और आश्विन (सितंबर–अक्टूबर) में शरद पूर्णिमा के आसपास। इनमें लाखों श्रद्धालु आते हैं।
सालासर बालाजी जयपुर से कितनी दूर है?
सालासर जयपुर से सड़क मार्ग से लगभग 170 किमी दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन सुजानगढ़ है और सीकर से भी नियमित बसें चलती हैं।

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