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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, दौसा

Mehandipur Balaji Temple, Dausa

दौसा, राजस्थान श्री बालाजी (बाल रूप हनुमान जी), श्री प्रेतराज सरकार, श्री भैरव बाबा निःशुल्क प्रवेश

श्री मेहंदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान के दौसा जिले की सिकराय तहसील में, दो पहाड़ियों के बीच बसे घाटा मेहंदीपुर में स्थित हनुमान जी का प्रसिद्ध धाम है। यहाँ हनुमान जी अपने बाल रूप (बालाजी) में विराजते हैं और उनके साथ श्री प्रेतराज सरकार तथा श्री भैरव बाबा की भी पूजा होती है। यह स्थान दौसा और करौली (अब गंगापुर सिटी) जिलों की सीमा के पास है। संकट और ऊपरी बाधा से मुक्ति की आस्था के कारण यहाँ राजस्थान ही नहीं, देश भर से श्रद्धालु आते हैं।

बालाजी के प्रकट होने की कथा

मंदिर की परंपरा के अनुसार बालाजी यहाँ दो पहाड़ियों के बीच स्वयं प्रकट हुए। वर्तमान महंत परिवार के पूर्वज गोसाईं जी महाराज को स्वप्न में बालाजी, प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा के दर्शन हुए और वे इस स्थान तक पहुँचे। कथा है कि जब कुछ लोगों ने प्रतिमा पर संदेह किया तो वह अदृश्य हो गई, और क्षमा माँगने पर फिर प्रकट हुई। गोसाईं जी ने अपने वंशजों को सेवा-पूजा का दायित्व सौंपा; मंदिर के अनुसार यह परिवार लगभग पंद्रह पीढ़ियों से सेवा कर रहा है।

मंदिर और विग्रह

बालाजी के चरणों में एक छोटा जलकुंड है, जिसके बारे में मान्यता है कि यह कभी नहीं सूखता। मंदिर के अनुसार प्रतिमा के वक्षस्थल के पास से जल की एक पतली धारा निकलती है, जो चोला चढ़ने के बाद भी बनी रहती है और भक्तों को चरणामृत के रूप में दी जाती है। सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को बालाजी का चोला श्रृंगार होता है।

महंत परंपरा और सेवा कार्य

बीसवीं शताब्दी में महंत गणेश पुरी जी ने मंदिर के विकास की नींव रखी और तीर्थ मार्ग, संस्कृत पाठशाला तथा पशु सेवा को बढ़ावा दिया। 1965 से महंत किशोर पुरी जी ने व्यवस्था संभाली और कन्या विद्यालय, महाविद्यालय तथा अस्पताल स्थापित किए। 21 अगस्त 2021 से महंत नरेश पुरी जी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं।

आस्था और अध्ययन

मेहंदीपुर बालाजी को संकट निवारण और ऊपरी बाधा से मुक्ति का स्थान माना जाता है। यहाँ की परंपराओं ने शोधकर्ताओं का ध्यान भी खींचा है – 2013 में जर्मनी और नीदरलैंड के विद्वानों, एम्स और दिल्ली विश्वविद्यालय के मनोचिकित्सकों की एक टीम ने यहाँ की पद्धतियों का अध्ययन शुरू किया था। गंभीर रोग की स्थिति में श्रद्धालुओं को चिकित्सकीय सलाह भी अवश्य लेनी चाहिए।

यात्रा क्रम

मेहंदीपुर जयपुर–आगरा राजमार्ग के पास है; सबसे निकट बड़ा रेलवे स्टेशन बांदीकुई जंक्शन है। मंगलवार और शनिवार को यहाँ विशेष भीड़ रहती है, इसलिए शांत दर्शन के लिए सप्ताह के अन्य दिन बेहतर रहते हैं।

दर्शन का समय

  • प्रातः आरती: लगभग 6:00 बजे
  • दर्शन: सुबह लगभग 7:00 से 11:00 बजे तक और दोपहर 12:00 बजे से शाम तक
  • संध्या आरती: लगभग 6:00 बजे; मंदिर रात लगभग 9:00 बजे बंद

सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चोला श्रृंगार के कारण दोपहर बाद कुछ समय दर्शन बंद रहते हैं। समय में बदलाव की सूचना मंदिर के लाउडस्पीकर से दी जाती है।

मुख्य आकर्षण

  • श्री बालाजी – बाल रूप हनुमान जी, जिनके चरणों में छोटा जलकुंड है।
  • श्री प्रेतराज सरकार और श्री भैरव बाबा – बालाजी के साथ पूजित।
  • दो पहाड़ियों के बीच का घाटा – जिससे स्थान का नाम घाटा मेहंदीपुर पड़ा।
  • संकट निवारण की आस्था – दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: बांदीकुई जंक्शन (लगभग 35–40 किमी) सबसे निकट बड़ा स्टेशन।
  • सड़क मार्ग: जयपुर–आगरा राजमार्ग के पास; जयपुर से लगभग 100–110 किमी, दौसा से लगभग 45 किमी।
  • हवाई मार्ग: जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 110 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर किस जिले में है?
मंदिर का पता घाटा मेहंदीपुर, तहसील सिकराय, जिला दौसा है। यह स्थान दौसा और करौली (अब गंगापुर सिटी) जिलों की सीमा के पास है, इसलिए कई जगह इसे करौली से भी जोड़ा जाता है।
मेहंदीपुर बालाजी में किन देवताओं की पूजा होती है?
यहाँ बाल रूप हनुमान जी (श्री बालाजी) के साथ श्री प्रेतराज सरकार और श्री भैरव बाबा की पूजा होती है।
मेहंदीपुर बालाजी किस लिए प्रसिद्ध है?
मंदिर संकट और ऊपरी बाधा से मुक्ति की आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की परंपराओं पर 2013 में भारतीय और यूरोपीय विद्वानों व मनोचिकित्सकों की एक टीम ने अध्ययन भी शुरू किया था।
मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन का समय क्या है?
प्रातः आरती लगभग 6:00 बजे होती है और दर्शन सुबह 7:00 बजे से शुरू होकर रात लगभग 9:00 बजे तक चलते हैं, बीच में भोग के समय थोड़ी देर पट बंद रहते हैं। सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चोला श्रृंगार के कारण दोपहर बाद कुछ समय दर्शन बंद रहते हैं।
मेहंदीपुर बालाजी कैसे पहुँचें?
सबसे निकट बड़ा रेलवे स्टेशन बांदीकुई है। सड़क मार्ग से यह जयपुर से लगभग 100 किमी दूर है और जयपुर, आगरा, दौसा से बसें व टैक्सी मिलती हैं।

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