करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर ज़िले में, बीकानेर से लगभग 30 किमी दक्षिण में देशनोक कस्बे में स्थित है। करणी माता को शक्ति का स्वरूप माना जाता है और वे बीकानेर राजघराने सहित अनेक परिवारों की आराध्य देवी हैं। यह मंदिर यहाँ रहने वाले हज़ारों पवित्र काबा (चूहों) के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है – मंदिर परिसर में लगभग 20,000 काबा रहते हैं, जिनकी पूजा और देखभाल की जाती है।
काबा की कथा
कथा के अनुसार करणी माता के सबसे छोटे दत्तक पुत्र लक्ष्मण कोलायत के कपिल सरोवर में डूब गए थे। देवी उनका शरीर मंदिर में लाईं और यमराज से उन्हें जीवित करने की विनती की। साथ ही उन्होंने निश्चय किया कि उनके परिवार के लोग फिर यमराज के पास नहीं जाएँगे, बल्कि काबा के रूप में जन्म लेकर उनके निकट रहेंगे। इसी कारण यहाँ के चूहे देवी के परिवार के रूप में पूजे जाते हैं।
मंदिर और काबा से जुड़ी परंपराएँ
मूल स्थान लगभग 1530 में करणी माता के देहावसान के बाद स्थापित हुआ। वर्तमान भवन बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने 20वीं शताब्दी के आरंभ में राजपूत शैली में पूरा करवाया। इसका संगमरमर का मुखभाग और ठोस चाँदी के द्वार विशेष दर्शनीय हैं, जिन पर देवी की कथाएँ अंकित हैं।
- काबा द्वारा चखा गया प्रसाद ग्रहण करना सौभाग्य माना जाता है।
- कुछ सफ़ेद काबा भी हैं, जिन्हें करणी माता और उनके परिवार का स्वरूप माना जाता है – इनके दर्शन विशेष शुभ समझे जाते हैं।
- परंपरा है कि यदि किसी से काबा की मृत्यु हो जाए तो उसके बदले चाँदी या सोने का काबा अर्पित किया जाता है।
प्रमुख उत्सव और ओरण परिक्रमा
करणी माता का मेला वर्ष में दो बार नवरात्रि में लगता है – बड़ा मेला चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) में और दूसरा शारदीय नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर) में। इन दिनों हज़ारों श्रद्धालु पैदल चलकर देशनोक पहुँचते हैं। देशनोक के चारों ओर लगभग 42 किमी का पवित्र ओरण क्षेत्र है, जहाँ जीवों को हानि पहुँचाना और पेड़ काटना वर्जित है; नवरात्रि में इसकी परिक्रमा में हज़ारों लोग शामिल होते हैं।
आसपास के दर्शन
देशनोक की यात्रा प्रायः बीकानेर के साथ की जाती है, जहाँ जूनागढ़ किला और पुराने शहर के मंदिर देखे जा सकते हैं। करणी माता की कथा से जुड़ा कोलायत का कपिल सरोवर भी बीकानेर ज़िले में ही है, जहाँ कार्तिक पूर्णिमा पर बड़ा स्नान-मेला लगता है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 4:00 बजे से रात लगभग 10:00 बजे तक
- आरती: प्रातः मंगला आरती और संध्या आरती
मंदिर में नंगे पैर चलना होता है और काबा हर ओर घूमते हैं, इसलिए धीरे और सावधानी से चलें।
मुख्य आकर्षण
- करणी माता का गर्भगृह।
- मंदिर में रहने वाले लगभग 20,000 पवित्र काबा (चूहे)।
- सफ़ेद काबा – जिनके दर्शन विशेष शुभ माने जाते हैं।
- महाराजा गंगा सिंह द्वारा बनवाए चाँदी के द्वार, जिन पर देवी की कथाएँ अंकित हैं।
- लगभग 42 किमी की ओरण परिक्रमा।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: बीकानेर से लगभग 30 किमी दक्षिण में, बीकानेर-जोधपुर मार्ग पर; बस और टैक्सी उपलब्ध।
- रेल मार्ग: देशनोक रेलवे स्टेशन (मंदिर के पास) या बीकानेर जंक्शन।
- हवाई मार्ग: बीकानेर (नाल) हवाई अड्डा, या जोधपुर हवाई अड्डा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
करणी माता मंदिर में चूहे क्यों हैं?
करणी माता मंदिर में कितने चूहे हैं?
सफ़ेद चूहे का दर्शन क्यों शुभ माना जाता है?
करणी माता मंदिर किसने बनवाया?
करणी माता का मेला कब लगता है?
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