अंबिका माता मंदिर राजस्थान के उदयपुर ज़िले में जगत गाँव में स्थित देवी अंबिका (दुर्गा) का प्राचीन मंदिर है। उदयपुर से लगभग 50 किमी दक्षिण-पूर्व में, चट्टानों के बीच बसे इस मंदिर को इसकी उत्कृष्ट मूर्तिकला के कारण “मेवाड़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह शक्ति उपासना का केंद्र होने के साथ-साथ राजस्थान की प्राचीन मंदिर कला का अनमोल उदाहरण है।
इतिहास
मंदिर 10वीं शताब्दी का माना जाता है और इसका निर्माण मेवाड़ के रावल अल्लट के शासनकाल से जोड़ा जाता है। यहाँ का सबसे पुराना अभिलेख 961 ई. का है, जिसमें मंदिर की मरम्मत का उल्लेख है – इससे पता चलता है कि मूल मंदिर इससे भी पहले बन चुका था। आज यह राजस्थान राज्य पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा संरक्षित है।
स्थापत्य और मूर्तिकला
मंदिर मारू-गुर्जर शैली का प्रारंभिक उदाहरण है और एक विशाल प्राचीर से घिरा है। बाहरी दीवारों पर दुर्गा, लक्ष्मी और अन्य देवियों, उग्र रूप चामुंडा, गंधर्वों, अप्सराओं और नर्तकियों की मूर्तियाँ हैं, जो आज भी अच्छी अवस्था में हैं। मूर्तियों के आसपास लहराती बेलों की नक्काशी इस मंदिर की विशेष पहचान है।
दर्शन और यात्रा
मंदिर में आज भी माँ अंबिका की पूजा होती है और नवरात्रि में आसपास के गाँवों से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। गाँव छोटा है, इसलिए उदयपुर से टैक्सी या निजी वाहन लेकर दिन में जाना सुविधाजनक रहता है। मूर्तिकला को ध्यान से देखने के लिए पर्याप्त समय लेकर जाएँ।
आसपास के दर्शन
जगत की यात्रा उदयपुर से एक दिन में की जा सकती है। उदयपुर लौटकर पुराने शहर के जगदीश मंदिर, फतह सागर के पास नीमच माता मंदिर और कैलाशपुरी के एकलिंगजी मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से शाम लगभग 7:00 बजे तक
गाँव का मंदिर होने के कारण समय बदल सकता है; दिन के उजाले में जाना बेहतर है ताकि मूर्तिकला ठीक से देखी जा सके।
मुख्य आकर्षण
- माँ अंबिका का गर्भगृह।
- बाहरी दीवारों पर दुर्गा, लक्ष्मी, चामुंडा और अन्य देवियों की मूर्तियाँ।
- गंधर्व, अप्सराएँ और नर्तकियों की सुंदर नक्काशी।
- ऊँची प्राचीर से घिरा प्राचीन परिसर।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: उदयपुर से लगभग 50 किमी दक्षिण-पूर्व में; टैक्सी या निजी वाहन सबसे सुविधाजनक।
- रेल मार्ग: उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन (लगभग 50 किमी)।
- हवाई मार्ग: महाराणा प्रताप हवाई अड्डा, डबोक, उदयपुर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अंबिका माता मंदिर जगत कितना पुराना है?
अंबिका माता मंदिर को मेवाड़ का खजुराहो क्यों कहते हैं?
जगत उदयपुर से कितनी दूर है?
अंबिका माता मंदिर किस शैली में बना है?
अंबिका माता मंदिर की देखरेख कौन करता है?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
बूंदी, राजस्थान चारभुजा नाथ मंदिर, बूंदी श्री चारभुजा नाथ (भगवान विष्णु का चतुर्भुज रूप)
-
झालावाड़, राजस्थान शीतलेश्वर महादेव मंदिर, झालरापाटन भगवान शिव (शीतलेश्वर महादेव) – शिवलिंग
-
जयपुर, राजस्थान
श्री गोविंद देव जी मंदिर
श्री राधा कृष्णा
-
राजसमंद, राजस्थान चारभुजा मंदिर, गढ़बोर (राजसमंद) श्री चारभुजानाथ – चतुर्भुज विष्णु (श्रीकृष्ण स्वरूप)
-
जालोर, राजस्थान सुंधा माता मंदिर, जालोर माँ चामुंडा (सुंधा माता / अघटेश्वरी)
-
नाथद्वारा, राजस्थान
श्री नाथजी मंदिर
कृष्ण