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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

एकलिंगजी मंदिर, कैलाशपुरी (उदयपुर)

Eklingji Temple, Kailashpuri (Udaipur)

उदयपुर, राजस्थान भगवान शिव – श्री एकलिंगनाथ (चतुर्मुखी शिवलिंग) निःशुल्क प्रवेश

एकलिंगजी मंदिर राजस्थान के उदयपुर ज़िले में कैलाशपुरी गाँव में स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है। यह उदयपुर से लगभग 22 किमी उत्तर में, अरावली की पहाड़ियों के बीच, मेवाड़ की पुरानी राजधानी नागदा के पास है। श्री एकलिंगनाथ मेवाड़ राजवंश के कुलदेवता हैं – परंपरा में मेवाड़ का वास्तविक शासक एकलिंगजी को माना गया और महाराणा स्वयं को उनका दीवान कहकर राज करते थे।

इतिहास और बप्पा रावल की परंपरा

15वीं शताब्दी के ग्रंथ एकलिंग माहात्म्य के अनुसार मूल मंदिर 8वीं शताब्दी के शासक बप्पा रावल ने बनवाया था। दिल्ली सल्तनत के आक्रमणों में मूल मंदिर और प्रतिमा नष्ट हुई। 14वीं शताब्दी में हम्मीर सिंह ने प्रतिमा स्थापित कर मंदिर का जीर्णोद्धार किया और 15वीं शताब्दी में राणा कुंभा ने इसे फिर बनवाया – 1460 के एक अभिलेख में कुंभा स्वयं को “एकलिंग का सेवक” कहते हैं। बाद में मालवा के सुल्तान ग़यासुद्दीन ने मंदिर को क्षति पहुँचाई, तब राणा रायमल (शासन 1473–1509) ने अंतिम बड़ा पुनर्निर्माण कराया और वर्तमान प्रतिमा स्थापित की।

मंदिर की पूजा परंपरा भी समय के साथ बदली – माना जाता है कि आरंभ में यह पाशुपत संप्रदाय से जुड़ा था, बाद में नाथ संप्रदाय और 16वीं शताब्दी से रामानंदी परंपरा के अधीन आया।

मंदिर और विग्रह

गर्भगृह में काले पत्थर का चतुर्मुखी शिवलिंग विराजमान है, जिसके चारों मुख शिव के अलग-अलग स्वरूपों के प्रतीक माने जाते हैं। ऊँची प्राचीर से घिरे परिसर में अनेक छोटे-बड़े मंदिर हैं, जिन्हें परंपरा में 108 मंदिर कहा जाता है। परिसर का लकुलीश मंदिर 10वीं शताब्दी का माना जाता है और पाशुपत परंपरा के प्रवर्तक लकुलीश से जुड़ा दुर्लभ मंदिर है।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि: सबसे बड़ा पर्व – दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
  • एकलिंगजी पाटोत्सव: मंदिर का वार्षिक उत्सव।
  • श्रावण मास के सोमवार को विशेष भीड़ रहती है।

आसपास के दर्शन

पास ही नागदा के प्राचीन सास-बहू मंदिर हैं। उदयपुर से नाथद्वारा जाने वाले यात्री प्रायः रास्ते में एकलिंगजी के दर्शन करते हुए आगे श्रीनाथजी के दर्शन के लिए जाते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 4:30 से 7:00, दिन में लगभग 10:30 से 1:30 और शाम लगभग 5:00 से 7:30 बजे तक

बीच के समय पट बंद रहते हैं; समय पर्वों के अनुसार बदल सकता है, इसलिए जाने से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।

मुख्य आकर्षण

  • चतुर्मुखी शिवलिंग – काले पत्थर का, चारों मुख शिव के अलग-अलग स्वरूप माने जाते हैं।
  • परिसर के अनेक छोटे-बड़े मंदिर (परंपरा में 108 मंदिर कहे जाते हैं)।
  • लकुलीश मंदिर – परिसर का 10वीं शताब्दी का मंदिर।
  • नागदा के सास-बहू मंदिर (पास ही)।
  • श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा (इसी मार्ग पर आगे)।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: उदयपुर से लगभग 22 किमी उत्तर में, नाथद्वारा जाने वाले राजमार्ग पर; बस, टैक्सी और ऑटो उपलब्ध।
  • रेल मार्ग: उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन (लगभग 25 किमी)।
  • हवाई मार्ग: महाराणा प्रताप हवाई अड्डा, डबोक, उदयपुर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एकलिंगजी किसके कुलदेवता हैं?
एकलिंगजी (भगवान शिव) मेवाड़ राजवंश के कुलदेवता हैं। परंपरा में मेवाड़ के वास्तविक राजा एकलिंगनाथ माने गए और महाराणा स्वयं को उनका दीवान कहकर शासन करते थे।
एकलिंगजी मंदिर किसने बनवाया?
15वीं शताब्दी के ग्रंथ एकलिंग माहात्म्य के अनुसार मूल मंदिर 8वीं शताब्दी में बप्पा रावल ने बनवाया। आक्रमणों के बाद हम्मीर सिंह और राणा कुंभा ने इसका जीर्णोद्धार किया और वर्तमान स्वरूप राणा रायमल के समय के पुनर्निर्माण का है।
एकलिंगजी के शिवलिंग की क्या विशेषता है?
गर्भगृह में काले पत्थर का चतुर्मुखी शिवलिंग है। इसके चारों मुख शिव के अलग-अलग स्वरूपों के प्रतीक माने जाते हैं।
उदयपुर से एकलिंगजी कितनी दूर है?
एकलिंगजी मंदिर उदयपुर से लगभग 22 किमी उत्तर में कैलाशपुरी गाँव में है। नाथद्वारा जाते हुए रास्ते में इसके दर्शन किए जा सकते हैं।
क्या एकलिंगजी मंदिर में फोटो खींच सकते हैं?
मंदिर के भीतर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। मोबाइल और कैमरा बाहर रखने की व्यवस्था रहती है।

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