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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

विराट शक्तिपीठ (अंबिका माता), विराटनगर

Virat Shaktipeeth (Ambika Mata Temple), Viratnagar

विराटनगर, राजस्थान माँ अंबिका; भैरव – अमृतेश्वर निःशुल्क प्रवेश

विराट शक्तिपीठ को सामान्यतः राजस्थान के विराटनगर (बैराठ) में स्थित अंबिका माता मंदिर से जोड़ा जाता है। अरावली की पहाड़ियों से घिरा यह कस्बा जयपुर से लगभग 85–90 किमी उत्तर में है। इसे 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता के अनुसार यहाँ सती के बाएँ पैर की उँगलियाँ गिरी थीं। यहाँ की शक्ति अंबिका और भैरव अमृतेश्वर हैं।

माँ अंबिका और अमृतेश्वर

मंदिर में देवी की पूजा अंबिका रूप में होती है – अंबिका का अर्थ है जगत की माता। शिव यहाँ अमृतेश्वर रूप में भैरव के रूप में पूजे जाते हैं। एक स्थानीय मान्यता के अनुसार अज्ञातवास के समय युधिष्ठिर ने यहाँ देवी की मानस पूजा की थी, इसलिए कुछ लोग देवी को मनसा देवी भी कहते हैं।

महाभारत की विराट नगरी

विराटनगर को प्राचीन मत्स्य देश की राजधानी माना जाता है, जो सोलह महाजनपदों में से एक था। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास का अंतिम वर्ष यहीं राजा विराट के दरबार में बिताया था। कस्बे की भीम की डूंगरी इसी कथा से जुड़ी है। यहाँ इतिहास के भी महत्वपूर्ण चिह्न हैं – बीजक की पहाड़ी पर ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के बौद्ध चैत्य के अवशेष और सम्राट अशोक का बैराठ शिलालेख।

स्थान को लेकर मत

कई शक्तिपीठ सूचियों में विराट पीठ को “भरतपुर के पास” लिखा जाता है, जबकि अधिकतर स्रोत इसे विराटनगर (बैराठ) के अंबिका मंदिर से जोड़ते हैं, जो भरतपुर से काफ़ी दूर है। अंग को लेकर भी स्रोत अलग हैं – कुछ इसे पैर की उँगलियाँ, कुछ बाएँ पैर का अँगूठा बताते हैं। प्रशासनिक रूप से विराटनगर पहले जयपुर ज़िले में था और अब नए कोटपुतली-बहरोड़ ज़िले में आता है।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि में विशेष पूजा और भीड़।
  • महाशिवरात्रि पर अमृतेश्वर की पूजा और मेला।
  • गणगौर और तीज जैसे राजस्थानी पर्व।

यात्रा सुझाव

जयपुर से एक दिन की यात्रा में अंबिका मंदिर के साथ भीम की डूंगरी, बीजक की पहाड़ी और अशोक शिलालेख देखे जा सकते हैं। गर्मियों में अरावली क्षेत्र बहुत गर्म रहता है, इसलिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:30 से रात लगभग 8:00 बजे तक

नवरात्रि और पर्वों पर समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ अंबिका – विराट शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री देवी।
  • अमृतेश्वर – शिव भैरव रूप में।
  • भीम की डूंगरी – पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ी गुफा।
  • बीजक की पहाड़ी – मौर्य काल के बौद्ध चैत्य के अवशेष।
  • अशोक का बैराठ शिलालेख।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: जयपुर से लगभग 85–90 किमी; जयपुर–दिल्ली मार्ग से शाहपुरा होकर बस या टैक्सी।
  • रेल मार्ग: निकटतम बड़ा स्टेशन जयपुर जंक्शन; वहाँ से सड़क मार्ग।
  • हवाई मार्ग: जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 90 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विराट शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
मान्यता के अनुसार विराट पीठ में सती के बाएँ पैर की उँगलियाँ गिरी थीं। कुछ स्रोत इसे बाएँ पैर का अँगूठा या केवल पैर की उँगली बताते हैं।
विराट शक्तिपीठ की शक्ति और भैरव कौन हैं?
यहाँ की शक्ति अंबिका हैं और भैरव अमृतेश्वर (अमृत) हैं।
विराट शक्तिपीठ कहाँ है?
यह पीठ सामान्यतः राजस्थान के विराटनगर (बैराठ) में अंबिका माता मंदिर से जोड़ा जाता है, जो जयपुर से लगभग 85–90 किमी उत्तर में अरावली पहाड़ियों के बीच है। कुछ सूचियों में इसे भरतपुर के पास लिखा जाता है।
विराटनगर का महाभारत से क्या संबंध है?
विराटनगर को प्राचीन मत्स्य देश की राजधानी माना जाता है। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास का एक वर्ष यहीं राजा विराट के यहाँ बिताया था; भीम की डूंगरी इसी कथा से जुड़ी है।
विराटनगर में और क्या देखें?
बीजक की पहाड़ी पर मौर्य काल के बौद्ध चैत्य के अवशेष, सम्राट अशोक का बैराठ शिलालेख और भीम की डूंगरी यहाँ के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।

विराट शक्तिपीठ (अंबिका माता), विराटनगर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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