शंकरी देवी मंदिर श्रीलंका के पूर्वी तट पर त्रिंकोमाली नगर में, समुद्र से ऊपर उठी स्वामी रॉक चट्टान पर स्थित कोणेश्वरम मंदिर क्षेत्र में माँ शंकरी का मंदिर है। एक प्रचलित मत के अनुसार यही 51 शक्तिपीठों में गिना जाने वाला लंका शक्तिपीठ है। पीठनिर्णय के अनुसार लंका में सती की पायल (नूपुर) गिरी थी, यहाँ की शक्ति इंद्राक्षी और भैरव राक्षसेश्वर हैं। त्रिंकोमाली में देवी की पूजा शंकरी रूप में और शिव की कोणेश्वर रूप में होती है। इस पीठ का वास्तविक स्थान विवादित है – नीचे दोनों मत दिए गए हैं।
अष्टादश शक्तिपीठों में पहला नाम
अष्टादश (18) महाशक्तिपीठ स्तोत्र, जिसे परंपरा आदि शंकराचार्य से जोड़ती है, “लंकायां शंकरी देवी” से आरंभ होता है। इसी कारण दक्षिण भारत और श्रीलंका के श्रद्धालु शंकरी देवी को 18 महाशक्तिपीठों में पहला मानते हैं।
कोणेश्वरम और रावण की कथा
कोणेश्वरम भगवान शिव (कोणेश्वर) और देवी माथुमई का प्राचीन मंदिर है। कथा के अनुसार रावण और उसकी माता यहाँ शिव की पूजा करते थे। जब रावण ने इस स्थान को उखाड़ने का प्रयास किया, तो शिव की लीला से उसकी तलवार गिर गई और चट्टान में दरार बन गई, जिसे आज “रावण वेट्टु” कहा जाता है।
विध्वंस और पुनर्निर्माण
17वीं शताब्दी (1622–1624) में पुर्तगालियों ने प्राचीन मंदिर को नष्ट कर दिया और इसके पत्थरों से फ़ोर्ट फ़्रेडरिक किला बनवाया। लंबे अंतराल के बाद 1952 में श्रद्धालुओं ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। शंकरी देवी का वर्तमान मंदिर भी 20वीं शताब्दी में इसी क्षेत्र में फिर से बनाया गया।
स्थान को लेकर मत
लंका शक्तिपीठ का सटीक स्थान ज्ञात नहीं है। एक मत इसे त्रिंकोमाली का शंकरी देवी मंदिर मानता है। दूसरा प्रचलित मत जाफ़ना के पास नैनातिवु द्वीप के नागपूषणी अम्मन मंदिर को इंद्राक्षी पीठ मानता है, जहाँ देवी को इंद्राक्षी और शिव को राक्षसेश्वर भी कहा जाता है। कुछ परंपराएँ त्रिंकोमाली को सती के किसी अन्य अंग से भी जोड़ती हैं। श्रद्धालु दोनों स्थानों को समान आदर देते हैं।
यात्रा सुझाव
भारत से श्रीलंका जाने के लिए पासपोर्ट और वीज़ा/यात्रा अनुमति चाहिए; नियम बदलते रहते हैं, इसलिए वर्तमान आधिकारिक जानकारी अवश्य लें। मंदिर तक पहुँचने का रास्ता फ़ोर्ट फ़्रेडरिक से होकर जाता है। मंदिर में शालीन वस्त्र पहनें और जूते बाहर उतारें।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर लगभग 12:00 और संध्या लगभग 4:00 से 7:00 बजे तक
समय पर्वों पर बदल सकता है; जाने से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।
मुख्य आकर्षण
- माँ शंकरी का मंदिर – समुद्र के ऊपर चट्टान पर।
- कोणेश्वरम मंदिर – भगवान शिव (कोणेश्वर) का प्राचीन धाम।
- रावण वेट्टु – चट्टान की दरार, जिसे रावण की कथा से जोड़ा जाता है।
- स्वामी रॉक से हिंद महासागर का दृश्य।
कैसे पहुँचें
- भारत से: भारतीय नागरिकों को श्रीलंका जाने के लिए पासपोर्ट और वीज़ा/यात्रा अनुमति आवश्यक है। नियम बदलते रहते हैं, इसलिए यात्रा से पहले वर्तमान आधिकारिक नियम अवश्य जाँच लें।
- हवाई मार्ग: भारत के कई शहरों से कोलंबो (बंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) के लिए उड़ानें; वहाँ से सड़क या रेल द्वारा त्रिंकोमाली।
- रेल मार्ग: कोलंबो से त्रिंकोमाली के लिए ट्रेन।
- शहर में: त्रिंकोमाली शहर से फ़ोर्ट फ़्रेडरिक होकर स्वामी रॉक तक टुक-टुक या टैक्सी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लंका शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
लंका शक्तिपीठ की शक्ति और भैरव कौन हैं?
लंका शक्तिपीठ वास्तव में कहाँ है?
शंकरी देवी का अष्टादश शक्तिपीठों से क्या संबंध है?
मूल कोणेश्वरम मंदिर का क्या हुआ?
शंकरी देवी मंदिर (कोणेश्वरम), त्रिंकोमाली श्रीलंका इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
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