एकाम्बरेश्वर मंदिर तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित भगवान शिव का विशाल प्राचीन मंदिर है। यह पंचभूत स्थलों में पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है – यहाँ का शिवलिंग पृथ्वी लिंगम कहलाता है, जो बालू (मिट्टी) से बना माना जाता है। लगभग 25 एकड़ में फैला यह मंदिर कांचीपुरम का सबसे बड़ा मंदिर है और इसका दक्षिणी राजगोपुरम भारत के सबसे ऊँचे मंदिर गोपुरमों में गिना जाता है।
एकाम्बरेश्वर नाम और आम्र वृक्ष की कथा
“एकाम्बरेश्वर” का अर्थ है – एक आम्र (आम) वृक्ष के ईश्वर। स्थल पुराण के अनुसार एक बार माता पार्वती ने खेल-खेल में भगवान शिव की आँखें बंद कर दीं, जिससे पूरे संसार में अंधकार छा गया। प्रायश्चित के लिए पार्वती ने कांची में वेगवती नदी के तट पर एक आम के वृक्ष के नीचे बालू से शिवलिंग बनाकर तपस्या की। शिव ने उनकी परीक्षा के लिए नदी में बाढ़ भेजी, तो पार्वती ने शिवलिंग को अपनी बाहों में भरकर उसे बहने से बचा लिया। प्रसन्न होकर शिव प्रकट हुए और यहीं उनका विवाह हुआ। शिवलिंग पर आज भी देवी के आलिंगन के चिह्न माने जाते हैं।
प्राचीन आम का पेड़
मंदिर के भीतरी प्रांगण में एक प्राचीन आम का वृक्ष है, जिसे इसी कथा का वृक्ष माना जाता है। मान्यता है कि इसकी चार शाखाएँ चार वेदों की प्रतीक हैं और हर शाखा के आम का स्वाद अलग होता है। मूल वृक्ष के सूखने के बाद उसके तने को सुरक्षित रखा गया है और उसी से निकला नया वृक्ष आज पूजा जाता है। वृक्ष के नीचे शिव-पार्वती के विवाह की प्रतिमा है।
पृथ्वी लिंगम की पूजा
क्योंकि शिवलिंग बालू से बना माना जाता है, इसलिए इस पर जल से अभिषेक नहीं किया जाता। मुख्य लिंगम पर चमेली का तेल चढ़ाया जाता है, जबकि अन्य अभिषेक उसके सामने स्थापित छोटे लिंगम पर किए जाते हैं। गर्भगृह के चारों ओर के गलियारे में 1,008 शिवलिंग स्थापित हैं।
इतिहास और वास्तुकला
मंदिर का उल्लेख तमिल शैव संतों (नयनारों) के तेवारम भजनों में मिलता है, इसलिए यह पाडल पेट्र स्थलम है। पल्लवों ने प्रारंभिक मंदिर बनवाया, फिर चोलों ने विस्तार किया। लगभग 59 मीटर (192 फ़ीट) ऊँचा ग्यारह मंज़िला दक्षिणी राजगोपुरम 1509 में विजयनगर सम्राट कृष्णदेव राय ने बनवाया। मंदिर में एक हज़ार स्तंभों वाला मंडप भी है। रोचक तथ्य यह है कि परिसर के भीतर भगवान विष्णु का निलाथिंगल तुंडम पेरुमल मंदिर भी है, जो 108 दिव्य देशमों में से एक है।
प्रमुख उत्सव
- पंगुनी उत्तिरम (मार्च-अप्रैल): शिव-पार्वती विवाह का 13 दिन का महोत्सव – सबसे बड़ा उत्सव।
- महाशिवरात्रि और कार्तिगै दीपम।
- हर सोमवार और प्रदोष पर विशेष पूजा।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:30 बजे तक
- दोपहर विश्राम: 12:30 से 4:00 बजे तक
- शाम: 4:00 से रात लगभग 8:30 बजे तक
प्रदोष, महाशिवरात्रि और पंगुनी उत्तिरम पर समय बढ़ जाता है।
मुख्य आकर्षण
- प्राचीन आम का वृक्ष और उसके नीचे शिव-पार्वती विवाह की प्रतिमा।
- 1,008 शिवलिंग वाला गलियारा (सहस्र लिंगम)।
- दक्षिणी राजगोपुरम – भारत के सबसे ऊँचे गोपुरमों में से एक।
- निलाथिंगल तुंडम पेरुमल – परिसर के भीतर दिव्य देशम।
- कामाक्षी अम्मन मंदिर लगभग 1 किमी दूर।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: कांचीपुरम रेलवे स्टेशन लगभग 2 किमी।
- सड़क मार्ग: चेन्नई से लगभग 75 किमी; कांचीपुरम बस स्टैंड से मंदिर लगभग 1 किमी।
- हवाई मार्ग: चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 65 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एकाम्बरेश्वर मंदिर किस तत्व का प्रतीक है?
पृथ्वी लिंगम पर जल अभिषेक क्यों नहीं होता?
एकाम्बरेश्वर नाम का अर्थ क्या है?
पंचभूत स्थल कौन-कौन से हैं?
एकाम्बरेश्वर मंदिर का दर्शन समय क्या है?
एकाम्बरेश्वर मंदिर, कांचीपुरम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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तिरुवन्नामलई, तमिलनाडु अरुणाचलेश्वर मंदिर, तिरुवन्नामलई भगवान शिव (अरुणाचलेश्वर / अण्णामलैयार) – अग्नि लिंगम; देवी उण्णामुलै अम्मन
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चिदंबरम, तमिलनाडु थिल्लई नटराज मंदिर, चिदंबरम भगवान शिव (नटराज) – आकाश लिंगम; देवी शिवकामसुंदरी
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तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु जंबुकेश्वर मंदिर, तिरुवनैकावल भगवान शिव (जंबुकेश्वर) – जल लिंगम; देवी अखिलांडेश्वरी
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कांचीपुरम, तमिलनाडु कामाक्षी अम्मन मंदिर, कांचीपुरम माँ कामाक्षी (देवी पार्वती / ललिता त्रिपुरसुंदरी)
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रामेश्वरम, तमिलनाडु
रामेश्वर ज्योतिर्लिंग
शिव
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वाराणसी, उत्तर प्रदेश विशालाक्षी मंदिर, वाराणसी माँ विशालाक्षी; भैरव – काल भैरव