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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

ललिता देवी शक्तिपीठ, मीरापुर प्रयागराज

Lalita Devi Shaktipeeth, Meerapur Prayagraj

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश माँ ललिता देवी; भैरव – भव निःशुल्क प्रवेश

ललिता देवी मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज नगर में यमुना के पास मीरापुर मोहल्ले में स्थित माँ ललिता का शक्तिपीठ है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार प्रयाग में सती के हाथ की उँगलियाँ गिरी थीं। यहाँ की शक्ति ललिता और भैरव भव हैं। प्रयागराज को “तीर्थराज” कहा जाता है – गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम वाली इस नगरी में शक्तिपीठ होना इसका महत्व और बढ़ा देता है।

शक्तिपीठ की कथा

दक्ष यज्ञ में सती के देह-त्याग के बाद भगवान शिव उनके शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड में घूमने लगे। सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अंग अलग किए, और जहाँ-जहाँ वे गिरे वहाँ शक्तिपीठ बने। प्रयाग में सती की उँगलियाँ गिरीं। ललिता देवी को श्री विद्या परंपरा की महादेवी – त्रिपुर सुंदरी – का स्वरूप माना जाता है, जो सौंदर्य, करुणा और ऐश्वर्य की देवी हैं।

ललिता देवी और अलोपी देवी

प्रयागराज में शक्तिपीठ के स्थान को लेकर दो मान्यताएँ हैं। अधिकतर परंपरा मीरापुर के ललिता देवी मंदिर को शक्तिपीठ मानती है। वहीं अलोपीबाग के अलोपी देवी मंदिर को भी इसी पीठ से जोड़ा जाता है – वहाँ कोई प्रतिमा नहीं है, बल्कि एक लकड़ी के पालने (डोली) की पूजा होती है, क्योंकि मान्यता है कि देवी का अंग यहाँ आकर “अलोप” (अदृश्य) हो गया। श्रद्धालु प्रायः दोनों मंदिरों के दर्शन करते हैं। ललिता देवी मंदिर का ऊँचा शिखर दूर से दिखाई देता है और परिसर में अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी हैं।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: नौ दिनों तक विशेष श्रृंगार, हवन और भारी भीड़।
  • माघ मेला और कुंभ: संगम स्नान के बाद लाखों श्रद्धालु देवी के दर्शन करने आते हैं।
  • मनोकामना पूरी होने पर भक्त माँ को चुनरी और श्रृंगार अर्पित करते हैं।

प्रयागराज में आसपास के दर्शन

ललिता देवी के दर्शन के साथ त्रिवेणी संगम में स्नान, संगम तट पर लेटे हुए हनुमान जी, किले के भीतर अक्षयवट और पातालपुरी मंदिर, अलोपी देवी और कल्याणी देवी मंदिर के दर्शन एक ही दिन में किए जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से दोपहर 12:00 बजे और शाम 4:00 से रात 10:00 बजे तक
  • आरती: सुबह और संध्या

नवरात्रि और माघ मेले के दिनों में समय बढ़ा दिया जाता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ ललिता देवी की प्रतिमा और ऊँचा शिखर।
  • त्रिवेणी संगम – गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम।
  • अलोपी देवी मंदिर – जहाँ प्रतिमा नहीं, पालने की पूजा होती है।
  • लेटे हुए हनुमान जी (बड़े हनुमान), संगम तट।
  • अक्षयवट और पातालपुरी मंदिर, किले के भीतर।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन (लगभग 5 किमी) – देश के सभी बड़े शहरों से ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: वाराणसी से लगभग 120 किमी, लखनऊ से लगभग 200 किमी; शहर में ऑटो और ई-रिक्शा।
  • हवाई मार्ग: प्रयागराज हवाई अड्डा, बमरौली (लगभग 15 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रयागराज शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार प्रयाग में सती के हाथ की उँगलियाँ गिरी थीं। यहाँ की शक्ति ललिता और भैरव भव हैं।
प्रयागराज का शक्तिपीठ ललिता देवी है या अलोपी देवी?
दोनों मान्यताएँ हैं। अधिकतर परंपरा मीरापुर के ललिता देवी मंदिर को शक्तिपीठ मानती है, जबकि अलोपीबाग का अलोपी देवी मंदिर भी इसी पीठ से जोड़ा जाता है।
ललिता देवी मंदिर संगम से कितनी दूर है?
ललिता देवी मंदिर त्रिवेणी संगम से लगभग 3-4 किमी दूर है। ऑटो या ई-रिक्शा से 15-20 मिनट में पहुँचा जा सकता है।
प्रयागराज जंक्शन से ललिता देवी मंदिर कैसे पहुँचें?
प्रयागराज जंक्शन से मीरापुर का ललिता देवी मंदिर लगभग 5 किमी दूर है। स्टेशन से ऑटो, ई-रिक्शा और टैक्सी मिल जाती हैं।
ललिता देवी मंदिर में सबसे अधिक भीड़ कब होती है?
चैत्र और शारदीय नवरात्रि तथा माघ मेला और कुंभ के समय सबसे अधिक भीड़ होती है, जब संगम स्नान करने वाले श्रद्धालु देवी के दर्शन भी करते हैं।

ललिता देवी शक्तिपीठ, मीरापुर प्रयागराज इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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