मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

कात्यायनी शक्तिपीठ, वृंदावन

Katyayani Shaktipeeth, Vrindavan

वृंदावन, उत्तर प्रदेश माँ कात्यायनी (उमा); भैरव – भूतेश निःशुल्क प्रवेश

कात्यायनी पीठ उत्तर प्रदेश के वृंदावन में राधाबाग क्षेत्र में, रंगजी मंदिर के पास स्थित माँ कात्यायनी का शक्तिपीठ है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार वृंदावन में सती के केश (चूड़ामणि सहित) गिरे थे। यहाँ की शक्ति उमा और भैरव भूतेश हैं। श्रीकृष्ण की लीलाभूमि वृंदावन में यह गिनी-चुनी शक्ति उपासना की जगहों में सबसे प्रमुख है – यहाँ वैष्णव भक्ति और शक्ति उपासना एक साथ दिखाई देती हैं।

गोपियों का कात्यायनी व्रत

श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कंध में वर्णन है कि ब्रज की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए मार्गशीर्ष मास में प्रतिदिन यमुना में स्नान करके बालू से देवी की प्रतिमा बनाई और माँ कात्यायनी की पूजा की। उनकी प्रार्थना का भाव था – “हे कात्यायनी, नंदगोप के पुत्र को हमारा पति बना दो”। इसी कथा के कारण आज भी अविवाहित कन्याएँ मनचाहे वर के लिए माँ कात्यायनी का व्रत करती हैं, और नवरात्रि के छठे दिन देवी के कात्यायनी स्वरूप की पूजा होती है।

मंदिर का इतिहास

शक्तिपीठ का यह स्थान प्राचीन काल से पूजित माना जाता है, पर वर्तमान मंदिर का निर्माण 1923 ई. में संत स्वामी केशवानंद ने कराया था। मंदिर के गर्भगृह में माँ कात्यायनी की प्रतिमा के साथ परिसर में पंचानन शिव, गणेश, लक्ष्मी-नारायण और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ हैं। मंदिर शांत और साफ़-सुथरा है, और यहाँ नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: विशेष श्रृंगार, हवन और कन्या पूजन।
  • मार्गशीर्ष मास: गोपियों के व्रत की परंपरा में कात्यायनी व्रत और पूजा।
  • दुर्गा पूजा में बंगाली परंपरा से पूजा और विसर्जन यात्रा।

वृंदावन में आसपास के दर्शन

कात्यायनी पीठ के पास ही दक्षिण भारतीय शैली का विशाल रंगनाथ (रंगजी) मंदिर है। एक ही दिन में बांके बिहारी मंदिर, राधा वल्लभ मंदिर, इस्कॉन मंदिर, प्रेम मंदिर और केशी घाट की संध्या आरती के दर्शन किए जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • गर्मी: सुबह लगभग 7:00 से 11:00 बजे, शाम 5:30 से रात 8:00 बजे तक
  • सर्दी: सुबह लगभग 7:30 से 11:00 बजे, शाम 5:00 से 7:30 बजे तक

नवरात्रि में दर्शन का समय बढ़ाया जाता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ कात्यायनी की अष्टधातु प्रतिमा (मान्यता)।
  • परिसर में पंचानन शिव, गणेश, लक्ष्मी-नारायण आदि की प्रतिमाएँ।
  • रंगनाथ (रंगजी) मंदिर – पास में।
  • बांके बिहारी, इस्कॉन और प्रेम मंदिर, वृंदावन।
  • यमुना के घाट – केशी घाट की संध्या आरती।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: मथुरा जंक्शन (लगभग 12 किमी) – दिल्ली, आगरा आदि से ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे द्वारा लगभग 160 किमी; मथुरा से ऑटो और ई-रिक्शा।
  • हवाई मार्ग: आगरा हवाई अड्डा (लगभग 70 किमी) या दिल्ली हवाई अड्डा (लगभग 170 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वृंदावन शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार वृंदावन में सती के केश (चूड़ामणि सहित) गिरे थे। यहाँ की शक्ति उमा (कात्यायनी) और भैरव भूतेश हैं।
गोपियों ने कात्यायनी व्रत क्यों किया था?
श्रीमद्भागवत के अनुसार वृंदावन की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए मार्गशीर्ष मास में यमुना स्नान करके देवी कात्यायनी की पूजा और व्रत किया था।
कात्यायनी पीठ वृंदावन में कहाँ है?
कात्यायनी पीठ वृंदावन के राधाबाग क्षेत्र में रंगजी (रंगनाथ) मंदिर के पास स्थित है।
कात्यायनी मंदिर में विवाह की मन्नत क्यों माँगी जाती है?
गोपियों के कात्यायनी व्रत की कथा के कारण माना जाता है कि यहाँ पूजा करने से अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। नवरात्रि में बहुत सी कन्याएँ यहाँ व्रत-पूजा करती हैं।
मथुरा से कात्यायनी पीठ कितनी दूर है?
मथुरा जंक्शन से वृंदावन का कात्यायनी पीठ लगभग 12 किमी दूर है। ऑटो या टैक्सी से लगभग 30 मिनट लगते हैं।

कात्यायनी शक्तिपीठ, वृंदावन इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook