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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

बक्रेश्वर (वक्रेश्वर) शक्तिपीठ, बीरभूम पश्चिम बंगाल

Bakreshwar (Vakreshwar) Shaktipeeth, Birbhum West Bengal

बीरभूम, पश्चिम बंगाल माँ महिषमर्दिनी; भैरव – वक्रनाथ (बक्रेश्वर शिव) निःशुल्क प्रवेश

बक्रेश्वर (संस्कृत में वक्रेश्वर) पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में, दुबराजपुर के पास पापहरा नदी के तट पर स्थित शक्तिपीठ और प्राचीन शिव तीर्थ है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ सती का भ्रूमध्य – दोनों भौंहों के बीच का भाग, जिसे ग्रंथ में “मन” भी कहा गया है – गिरा था। यहाँ की शक्ति महिषमर्दिनी और भैरव वक्रनाथ हैं। बक्रेश्वर अपने प्राकृतिक गर्म पानी के कुंडों के लिए भी प्रसिद्ध है।

अष्टावक्र ऋषि की कथा

बक्रेश्वर नाम महाभारत में वर्णित ऋषि अष्टावक्र से जुड़ा है। कथा के अनुसार गर्भ में रहते हुए ही उन्होंने अपने पिता के वेद-पाठ की त्रुटि बताई, जिससे क्रोधित पिता के श्राप से उनका शरीर आठ जगह से टेढ़ा (वक्र) हो गया। मान्यता है कि अष्टावक्र ने इसी स्थान पर भगवान शिव की कठोर तपस्या की, इसलिए यहाँ के शिव वक्रेश्वर कहलाए। मंदिर परिसर में मुख्य शिव मंदिर के साथ माँ महिषमर्दिनी का मंदिर और कई छोटे मंदिर हैं, जो बंगाल की रेखा देउल शैली में बने हैं।

गर्म पानी के कुंड

मंदिर परिसर और उसके आसपास कई गर्म जल स्रोत हैं, जिन्हें अलग-अलग देवताओं के नाम पर कुंड कहा जाता है – जैसे अग्नि कुंड, सूर्य कुंड, ब्रह्म कुंड, खार कुंड और भैरव कुंड। इनमें से कुछ का पानी इतना गर्म है कि उसमें हाथ डालना भी कठिन है। जल में खनिज होने के कारण लोग इसे त्वचा रोगों में लाभकारी मानते हैं, और श्रद्धालु स्नान घाट वाले कुंडों में स्नान करके ही दर्शन करते हैं। पास में बक्रेश्वर ताप विद्युत केंद्र भी है।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि मेला: बक्रेश्वर का सबसे बड़ा उत्सव, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
  • श्रावण मास: सोमवार को शिव जी का जलाभिषेक।
  • दुर्गा पूजा और काली पूजा में माँ महिषमर्दिनी की विशेष आराधना।

बीरभूम शक्तिपीठ यात्रा

बीरभूम ज़िले में पाँच शक्तिपीठ माने जाते हैं – बक्रेश्वर, कंकालीतला, नलहाटी, अट्टहास और नंदीपुर। इनके साथ प्रसिद्ध तारापीठ भी इसी ज़िले में है। सिउड़ी या बोलपुर को केंद्र बनाकर दो दिनों में ये सभी स्थान देखे जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 8:00 बजे तक

शिवरात्रि और विशेष तिथियों पर समय बढ़ जाता है। कुंडों में स्नान सुबह के समय सबसे अच्छा रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ महिषमर्दिनी मंदिर – शक्तिपीठ।
  • वक्रनाथ (बक्रेश्वर) शिव मंदिर – भैरव।
  • गर्म पानी के कुंड – अग्नि कुंड, सूर्य कुंड, ब्रह्म कुंड आदि।
  • पापहरा नदी का तट।
  • तारापीठ (लगभग 60 किमी) और कंकालीतला (लगभग 60 किमी)।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: सिउड़ी रेलवे स्टेशन (लगभग 24 किमी) या दुबराजपुर स्टेशन (लगभग 10 किमी)।
  • सड़क मार्ग: सिउड़ी और दुबराजपुर से बस और टैक्सी; कोलकाता से लगभग 220 किमी।
  • हवाई मार्ग: काज़ी नज़रुल इस्लाम हवाई अड्डा, दुर्गापुर (लगभग 60 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बक्रेश्वर शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार वक्रेश्वर में सती का भ्रूमध्य (दोनों भौंहों के बीच का भाग, जिसे मन भी कहा गया है) गिरा था। यहाँ की शक्ति महिषमर्दिनी और भैरव वक्रनाथ हैं।
बक्रेश्वर नाम कैसे पड़ा?
मान्यता है कि अष्टावक्र ऋषि – जिनका शरीर आठ जगह से टेढ़ा (वक्र) था – ने यहाँ भगवान शिव की तपस्या की थी। इसलिए यहाँ के शिव वक्रेश्वर या बक्रेश्वर कहलाए।
बक्रेश्वर के गर्म पानी के कुंड कितने हैं?
बक्रेश्वर में कई गर्म जल स्रोत (कुंड) हैं, जिनमें अग्नि कुंड, सूर्य कुंड, ब्रह्म कुंड आदि प्रसिद्ध हैं। कुछ कुंडों का पानी बहुत गर्म होता है, इसलिए स्नान घाट वाले कुंडों में ही स्नान करें।
कोलकाता से बक्रेश्वर कैसे पहुँचें?
कोलकाता से बक्रेश्वर लगभग 220 किमी दूर है। हावड़ा से सिउड़ी या दुबराजपुर तक ट्रेन लेकर वहाँ से बस या टैक्सी द्वारा पहुँचा जा सकता है।
बक्रेश्वर में मेला कब लगता है?
महाशिवरात्रि पर बक्रेश्वर में सबसे बड़ा मेला लगता है। शिवरात्रि और नवरात्रि में यहाँ हज़ारों श्रद्धालु आते हैं।

बक्रेश्वर (वक्रेश्वर) शक्तिपीठ, बीरभूम पश्चिम बंगाल इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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