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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

बर्गभीमा मंदिर (विभाष शक्तिपीठ), तमलुक

Bargabhima Temple (Vibhash Shaktipeeth), Tamluk

पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल माँ बर्गभीमा (कपालिनी / भीमरूपा); भैरव – सर्वानंद निःशुल्क प्रवेश

बर्गभीमा मंदिर पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में रूपनारायण नदी के किनारे बसे प्राचीन नगर तमलुक में स्थित माँ बर्गभीमा का शक्तिपीठ है। तंत्र चूड़ामणि की सूची में यह विभाष पीठ है, जहाँ सती की बायीं एड़ी गिरी थी। यहाँ की शक्ति कपालिनी (भीमरूपा) और भैरव सर्वानंद हैं। स्थानीय लोग देवी को बर्गभीमा नाम से पूजते हैं और उन्हें तमलुक नगर की अधिष्ठात्री देवी मानते हैं।

प्राचीन ताम्रलिप्त

तमलुक का प्राचीन नाम ताम्रलिप्त है, जो कभी भारत का प्रसिद्ध बंदरगाह था। यहाँ से श्रीलंका, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया तक समुद्री व्यापार होता था, और चीनी यात्री फ़ाह्यान और ह्वेनसांग ने भी इस नगर का उल्लेख किया है। महाभारत में भी ताम्रलिप्त राज्य का वर्णन आता है। इतने पुराने नगर की अधिष्ठात्री होने के कारण बर्गभीमा मंदिर को बंगाल के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है।

मछुआरिन की कथा

लोककथा के अनुसार तमलुक के राजा के यहाँ एक मछुआरिन रोज़ ताज़ी मछली पहुँचाती थी। एक दिन राजा ने पूछा कि वह सूखी मछली को भी ताज़ा कैसे कर देती है। मछुआरिन ने बताया कि जंगल के एक कुंड के जल में डालते ही मरी मछली जीवित हो उठती है। राजा ने वहाँ जाकर देखा तो कुंड में देवी का स्वरूप प्रकट हुआ, और उसी स्थान पर बर्गभीमा मंदिर बनवाया गया। इसी कारण यहाँ देवी को मछली का भोग लगाने की परंपरा भी है – बंगाल के कई शक्ति मंदिरों की तरह।

मंदिर और प्रतिमा

मंदिर बंगाल की देउल शैली में बना है और इसका ऊँचा शिखर दूर से दिखाई देता है। गर्भगृह में माँ बर्गभीमा की काले पत्थर की उग्र रूप प्रतिमा है, जिसे माँ काली और उग्रतारा का स्वरूप माना जाता है। तमलुक में विवाह, गृह प्रवेश या कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले लोग माँ बर्गभीमा का आशीर्वाद लेते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • काली पूजा (कार्तिक अमावस्या): सबसे बड़ा उत्सव, रात भर पूजा।
  • दुर्गा पूजा और नवरात्रि में विशेष आराधना।
  • बंगाली नववर्ष (पोइला बोइशाख) पर भारी भीड़।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 9:00 बजे तक
  • दोपहर भोग के समय कुछ देर बंद।

काली पूजा की रात मंदिर पूरी रात खुला रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ बर्गभीमा – काले पत्थर की उग्र रूप प्रतिमा।
  • मंदिर का ऊँचा शिखर और प्राचीन परिसर।
  • रूपनारायण नदी का तट।
  • ताम्रलिप्त संग्रहालय – प्राचीन बंदरगाह के अवशेष।
  • दीघा समुद्र तट (लगभग 100 किमी)।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: तमलुक रेलवे स्टेशन (लगभग 2 किमी) – हावड़ा से पांसकुड़ा होते हुए ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: कोलकाता से NH-16 द्वारा लगभग 90 किमी; हल्दिया से लगभग 30 किमी।
  • हवाई मार्ग: कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 100 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तमलुक शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार विभाष पीठ (तमलुक) में सती की बायीं एड़ी गिरी थी। यहाँ की शक्ति कपालिनी (भीमरूपा) और भैरव सर्वानंद हैं।
बर्गभीमा देवी कौन हैं?
बर्गभीमा माँ काली और उग्रतारा जैसा उग्र स्वरूप मानी जाती हैं। तमलुक के लोग उन्हें नगर की अधिष्ठात्री देवी मानते हैं और हर शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा करते हैं।
बर्गभीमा मंदिर से जुड़ी मछुआरे की कथा क्या है?
लोककथा के अनुसार एक मछुआरिन को देवी ने ऐसा कुंड दिखाया था जिसके जल से मरी मछलियाँ भी जीवित हो जाती थीं। राजा को यह पता चलने पर वहाँ देवी का मंदिर बनवाया गया।
कोलकाता से तमलुक कितनी दूर है?
कोलकाता से तमलुक लगभग 90 किमी दूर है। हावड़ा से ट्रेन या NH-16 से बस और कार द्वारा लगभग 2-3 घंटे लगते हैं।
तमलुक का प्राचीन नाम क्या है?
तमलुक का प्राचीन नाम ताम्रलिप्त है। यह प्राचीन भारत का प्रसिद्ध बंदरगाह था, जहाँ से दक्षिण-पूर्व एशिया तक व्यापार होता था।

बर्गभीमा मंदिर (विभाष शक्तिपीठ), तमलुक इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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