बर्गभीमा मंदिर पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में रूपनारायण नदी के किनारे बसे प्राचीन नगर तमलुक में स्थित माँ बर्गभीमा का शक्तिपीठ है। तंत्र चूड़ामणि की सूची में यह विभाष पीठ है, जहाँ सती की बायीं एड़ी गिरी थी। यहाँ की शक्ति कपालिनी (भीमरूपा) और भैरव सर्वानंद हैं। स्थानीय लोग देवी को बर्गभीमा नाम से पूजते हैं और उन्हें तमलुक नगर की अधिष्ठात्री देवी मानते हैं।
प्राचीन ताम्रलिप्त
तमलुक का प्राचीन नाम ताम्रलिप्त है, जो कभी भारत का प्रसिद्ध बंदरगाह था। यहाँ से श्रीलंका, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया तक समुद्री व्यापार होता था, और चीनी यात्री फ़ाह्यान और ह्वेनसांग ने भी इस नगर का उल्लेख किया है। महाभारत में भी ताम्रलिप्त राज्य का वर्णन आता है। इतने पुराने नगर की अधिष्ठात्री होने के कारण बर्गभीमा मंदिर को बंगाल के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है।
मछुआरिन की कथा
लोककथा के अनुसार तमलुक के राजा के यहाँ एक मछुआरिन रोज़ ताज़ी मछली पहुँचाती थी। एक दिन राजा ने पूछा कि वह सूखी मछली को भी ताज़ा कैसे कर देती है। मछुआरिन ने बताया कि जंगल के एक कुंड के जल में डालते ही मरी मछली जीवित हो उठती है। राजा ने वहाँ जाकर देखा तो कुंड में देवी का स्वरूप प्रकट हुआ, और उसी स्थान पर बर्गभीमा मंदिर बनवाया गया। इसी कारण यहाँ देवी को मछली का भोग लगाने की परंपरा भी है – बंगाल के कई शक्ति मंदिरों की तरह।
मंदिर और प्रतिमा
मंदिर बंगाल की देउल शैली में बना है और इसका ऊँचा शिखर दूर से दिखाई देता है। गर्भगृह में माँ बर्गभीमा की काले पत्थर की उग्र रूप प्रतिमा है, जिसे माँ काली और उग्रतारा का स्वरूप माना जाता है। तमलुक में विवाह, गृह प्रवेश या कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले लोग माँ बर्गभीमा का आशीर्वाद लेते हैं।
प्रमुख उत्सव
- काली पूजा (कार्तिक अमावस्या): सबसे बड़ा उत्सव, रात भर पूजा।
- दुर्गा पूजा और नवरात्रि में विशेष आराधना।
- बंगाली नववर्ष (पोइला बोइशाख) पर भारी भीड़।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 9:00 बजे तक
- दोपहर भोग के समय कुछ देर बंद।
काली पूजा की रात मंदिर पूरी रात खुला रहता है।
मुख्य आकर्षण
- माँ बर्गभीमा – काले पत्थर की उग्र रूप प्रतिमा।
- मंदिर का ऊँचा शिखर और प्राचीन परिसर।
- रूपनारायण नदी का तट।
- ताम्रलिप्त संग्रहालय – प्राचीन बंदरगाह के अवशेष।
- दीघा समुद्र तट (लगभग 100 किमी)।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: तमलुक रेलवे स्टेशन (लगभग 2 किमी) – हावड़ा से पांसकुड़ा होते हुए ट्रेनें।
- सड़क मार्ग: कोलकाता से NH-16 द्वारा लगभग 90 किमी; हल्दिया से लगभग 30 किमी।
- हवाई मार्ग: कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 100 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तमलुक शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
बर्गभीमा देवी कौन हैं?
बर्गभीमा मंदिर से जुड़ी मछुआरे की कथा क्या है?
कोलकाता से तमलुक कितनी दूर है?
तमलुक का प्राचीन नाम क्या है?
बर्गभीमा मंदिर (विभाष शक्तिपीठ), तमलुक इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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कोलकाता, पश्चिम बंगाल कालीघाट काली मंदिर, कोलकाता माँ काली (कालिका); भैरव – नकुलेश्वर
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल बक्रेश्वर (वक्रेश्वर) शक्तिपीठ, बीरभूम पश्चिम बंगाल माँ महिषमर्दिनी; भैरव – वक्रनाथ (बक्रेश्वर शिव)
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल कंकालीतला शक्तिपीठ, बोलपुर बीरभूम माँ कंकाली (देवगर्भा); भैरव – रुरु
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मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल किरीटेश्वरी शक्तिपीठ, मुर्शिदाबाद माँ किरीटेश्वरी (विमला); भैरव – संवर्त
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल नलातेश्वरी शक्तिपीठ, नलहाटी बीरभूम माँ नलातेश्वरी (कालिका); भैरव – योगेश
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जयपुर, राजस्थान
श्री गोविंद देव जी मंदिर
श्री राधा कृष्णा