किरीटेश्वरी मंदिर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले में भागीरथी नदी के पास किरीटकोना गाँव में स्थित माँ किरीटेश्वरी का शक्तिपीठ है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ सती का किरीट (मुकुट) गिरा था। यहाँ की शक्ति विमला और भैरव संवर्त हैं। मुकुट गिरने के कारण देवी को मुकुटेश्वरी भी कहा जाता है। यह बंगाल के सबसे पुराने शक्ति स्थलों में गिना जाता है।
पवित्र शिला और गुप्त मठ
मंदिर में देवी की कोई बड़ी मानवाकार प्रतिमा नहीं है। गर्भगृह में लाल वस्त्र से ढकी एक पवित्र शिला की पूजा होती है, जिसे देवी का स्वरूप माना जाता है। पास में एक प्राचीन गुप्त मठ है – मान्यता है कि सती के मुकुट का अंश वहीं सुरक्षित रखा गया है। प्राचीन मंदिर समय के साथ नष्ट हो गया था; वर्तमान मंदिर 19वीं शताब्दी का माना जाता है। परिसर में कई छोटे शिव मंदिर भी हैं।
सौहार्द की परंपरा
किरीटकोना गाँव की एक विशेषता यह है कि मंदिर और उसके मेले में आसपास के सभी समुदायों के लोग भाग लेते हैं। मुर्शिदाबाद कभी बंगाल के नवाबों की राजधानी था, और यहाँ के इतिहास में हिंदू-मुस्लिम मेल-जोल की अनेक कहानियाँ हैं। किरीटेश्वरी मंदिर को इसी साझी विरासत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
प्रमुख उत्सव
- पौष मास का मेला: पौष के मंगलवारों को लगने वाला बड़ा मेला, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
- दुर्गा पूजा और काली पूजा पर विशेष आराधना।
- नवरात्रि में शक्तिपीठ की पूजा और हवन।
मुर्शिदाबाद में आसपास के दर्शन
किरीटेश्वरी के दर्शन को मुर्शिदाबाद के ऐतिहासिक स्थलों के साथ जोड़ा जा सकता है – हज़ारदुआरी पैलेस, निज़ामत इमामबाड़ा, कटरा मस्जिद और भागीरथी के किनारे के पुराने मंदिर। बंगाल के अन्य शक्तिपीठों में नलहाटी और बीरभूम के पीठ यहाँ से लगभग 100 किमी के दायरे में हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 8:00 बजे तक
समय स्थानीय रूप से बदल सकता है; पौष मास और विशेष तिथियों पर पूजा देर तक चलती है।
मुख्य आकर्षण
- माँ किरीटेश्वरी मंदिर – लाल वस्त्र से ढकी पवित्र शिला।
- गुप्त मठ – प्राचीन मंदिर, जहाँ मुकुट का अंश सुरक्षित माना जाता है।
- परिसर के शिव मंदिर।
- हज़ारदुआरी पैलेस और कटरा मस्जिद, मुर्शिदाबाद।
- भागीरथी नदी का तट।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: मुर्शिदाबाद या डाहापाड़ा धाम रेलवे स्टेशन – कोलकाता (सियालदह) से ट्रेनें; वहाँ से ऑटो या टोटो।
- सड़क मार्ग: लालबाग (मुर्शिदाबाद) से भागीरथी पार करके; कोलकाता से लगभग 220 किमी।
- हवाई मार्ग: कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 220 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
किरीटेश्वरी शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
किरीटेश्वरी मंदिर में मूर्ति है क्या?
किरीटेश्वरी मंदिर कहाँ है?
किरीटेश्वरी में मेला कब लगता है?
कोलकाता से किरीटेश्वरी कैसे पहुँचें?
किरीटेश्वरी शक्तिपीठ, मुर्शिदाबाद इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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कोलकाता, पश्चिम बंगाल कालीघाट काली मंदिर, कोलकाता माँ काली (कालिका); भैरव – नकुलेश्वर
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल बक्रेश्वर (वक्रेश्वर) शक्तिपीठ, बीरभूम पश्चिम बंगाल माँ महिषमर्दिनी; भैरव – वक्रनाथ (बक्रेश्वर शिव)
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल कंकालीतला शक्तिपीठ, बोलपुर बीरभूम माँ कंकाली (देवगर्भा); भैरव – रुरु
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पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल बर्गभीमा मंदिर (विभाष शक्तिपीठ), तमलुक माँ बर्गभीमा (कपालिनी / भीमरूपा); भैरव – सर्वानंद
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल नलातेश्वरी शक्तिपीठ, नलहाटी बीरभूम माँ नलातेश्वरी (कालिका); भैरव – योगेश
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जयपुर, राजस्थान
श्री गोविंद देव जी मंदिर
श्री राधा कृष्णा