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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

नलातेश्वरी शक्तिपीठ, नलहाटी बीरभूम

Nalateshwari Shaktipeeth, Nalhati Birbhum

बीरभूम, पश्चिम बंगाल माँ नलातेश्वरी (कालिका); भैरव – योगेश निःशुल्क प्रवेश

नलातेश्वरी मंदिर पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में नलहाटी नगर के पास एक छोटी पहाड़ी पर स्थित माँ नलातेश्वरी का शक्तिपीठ है। यहाँ की शक्ति कालिका और भैरव योगेश हैं। तंत्र चूड़ामणि की सूची में नलहाटी में सती के पैर की हड्डी गिरने का उल्लेख है, जबकि स्थानीय परंपरा मानती है कि यहाँ सती का “नला” (गले की नली) गिरा था – इसी से नगर का नाम नलहाटी पड़ा। प्रसिद्ध तारापीठ यहाँ से लगभग 20 किमी दूर है।

देवी का स्वरूप

मंदिर में देवी की पूर्ण प्रतिमा नहीं, बल्कि सिंदूर से रंगा देवी का मुख-स्वरूप है, जिसमें बड़ी-बड़ी आँखें और बाहर निकली जीभ दिखाई देती है – यह माँ काली का उग्र रूप है। गर्भगृह के पास भैरव योगेश का शिव मंदिर है।

पहाड़ी पर मंदिर

मंदिर तक पहुँचने के लिए पहाड़ी पर कुछ सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं। ऊपर से नलहाटी नगर और आसपास के हरे-भरे खेतों का सुंदर दृश्य दिखता है। मंदिर परिसर शांत है, और अमावस्या की रातों में यहाँ साधक विशेष पूजा के लिए आते हैं। बंगाल की शाक्त परंपरा में बीरभूम के इन शक्तिपीठों का विशेष महत्व है।

प्रमुख उत्सव

  • काली पूजा (कार्तिक अमावस्या): सबसे बड़ा उत्सव, रात भर पूजा और भारी भीड़।
  • दुर्गा पूजा और नवरात्रि में विशेष आराधना।
  • हर अमावस्या को विशेष पूजा।

तारापीठ और बीरभूम यात्रा

नलातेश्वरी के दर्शन को प्रायः तारापीठ की यात्रा के साथ जोड़ा जाता है – साधक बामाखेपा से जुड़ा माँ तारा का यह तीर्थ लगभग 20 किमी दूर है। बीरभूम ज़िले में कुल पाँच शक्तिपीठ माने जाते हैं – नलहाटी, कंकालीतला, बक्रेश्वर, अट्टहास और नंदीपुर – जिन्हें रामपुरहाट या बोलपुर को केंद्र बनाकर दो दिनों में देखा जा सकता है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 8:30 बजे तक

काली पूजा और अमावस्या पर मंदिर देर रात तक खुला रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ नलातेश्वरी – सिंदूर से रंगा देवी का मुख-स्वरूप।
  • योगेश भैरव का शिव मंदिर।
  • पहाड़ी से नलहाटी नगर का दृश्य।
  • तारापीठ (लगभग 20 किमी)।
  • बीरभूम के अन्य शक्तिपीठ – कंकालीतला, बक्रेश्वर, अट्टहास, नंदीपुर।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: नलहाटी जंक्शन (लगभग 2 किमी) – हावड़ा और सियालदह से ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: रामपुरहाट से लगभग 15 किमी; कोलकाता से लगभग 240 किमी।
  • हवाई मार्ग: काज़ी नज़रुल इस्लाम हवाई अड्डा, दुर्गापुर (लगभग 140 किमी) या कोलकाता (लगभग 240 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नलहाटी शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि की सूची में नलहाटी में सती के पैर की हड्डी गिरने का उल्लेख है, जबकि स्थानीय परंपरा कहती है कि यहाँ सती का 'नला' (गले की नली) गिरा, इसी से नगर का नाम नलहाटी पड़ा। यहाँ की शक्ति कालिका और भैरव योगेश हैं।
नलातेश्वरी देवी का स्वरूप कैसा है?
मंदिर में सिंदूर से रंगे देवी के मुख-स्वरूप की पूजा होती है, जिसमें आँखें और जीभ दिखाई देती हैं। देवी को माँ काली का स्वरूप माना जाता है।
तारापीठ से नलहाटी कितनी दूर है?
तारापीठ से नलहाटी लगभग 20 किमी दूर है। तारापीठ आने वाले बहुत से यात्री नलातेश्वरी के दर्शन भी करते हैं।
नलहाटी स्टेशन से नलातेश्वरी मंदिर कितनी दूर है?
नलहाटी जंक्शन से नलातेश्वरी मंदिर लगभग 2 किमी दूर है। टोटो या रिक्शा से कुछ ही मिनटों में पहुँचा जा सकता है।
नलातेश्वरी मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव कौन सा है?
काली पूजा (कार्तिक अमावस्या) सबसे बड़ा उत्सव है। दुर्गा पूजा और नवरात्रि में भी यहाँ विशेष पूजा होती है।

नलातेश्वरी शक्तिपीठ, नलहाटी बीरभूम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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