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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री भावनारायण स्वामी मंदिर, सर्पवरम

Sri Bhavanarayana Swamy Temple, Sarpavaram

Kakinada, आंध्र प्रदेश भगवान श्री भावनारायण स्वामी, देवी श्री राज्यलक्ष्मी निःशुल्क प्रवेश

श्री भावनारायण स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के काकीनाडा शहर से लगभग 5 किमी दूर सर्पवरम में स्थित भगवान विष्णु का प्राचीन मंदिर है। यहाँ भगवान भावनारायण स्वामी देवी श्री राज्यलक्ष्मी के साथ विराजते हैं। गोदावरी क्षेत्र में इसे एक पवित्र पुण्य क्षेत्र माना जाता है और पीठापुरम के राजाओं ने लंबे समय तक इसे संरक्षण दिया।

स्थल पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण से जुड़ी कथा के अनुसार नैमिषारण्य में महर्षि अगस्त्य ने ऋषियों को सर्पवरम की महिमा सुनाई। कद्रू के पुत्र नाग अनंत ने यहाँ भगवान विष्णु की शरण पाने के लिए तपस्या की। प्रसन्न होकर भगवान ने कहा कि यह स्थान सर्पपुर कहलाएगा, वे यहाँ लक्ष्मी सहित निवास करेंगे और देवर्षि नारद उनकी प्रतिष्ठा करेंगे। इसी से गाँव का नाम सर्पवरम पड़ा।

इतिहास और अभिलेख

मंदिर से 11वीं से 14वीं शताब्दी के 32 अभिलेख प्रकाशित हुए हैं। सबसे पुराना 1073 ई. का है, जिसमें मीनवन महादेवी नाम की एक महिला द्वारा अखंड दीप के लिए 50 गायों के दान का उल्लेख है। पूर्वी चालुक्य राजाओं, चोल राजा कुलोत्तुंग और 1414 ई. में रेड्डी राजा कटय वेम रेड्डी ने भी मंदिर को दान दिए। 15वीं शताब्दी के महाकवि श्रीनाथ ने अपने ग्रंथों “काशी खंडमु” और “भीमेश्वर पुराणमु” में इस मंदिर का उल्लेख किया है।

मंदिर और स्थापत्य

मंदिर में चालुक्य और चोल शैलियों का मेल है और इसमें लाल पत्थर की चिनाई है। स्तंभ मंडप, अंतराल और गर्भगृह चालुक्य काल के माने जाते हैं; मंडप के स्तंभों पर द्वारपाल जय-विजय की नक्काशी है। परिसर में पाताल भावनारायण स्वामी का सन्निधि भी है, जहाँ भगवान गरुड़ पर विराजमान हैं। साथ ही मणवाल महामुनि, गरुड़ और हनुमान के सन्निधि हैं। गोपुरम का निर्माण पीठापुरम के एक राजा ने कराया था। यह मंदिर राज्य संरक्षित स्मारक है; हाल के वर्षों में स्तंभों में दरारें और पानी रिसने जैसी समस्याओं के कारण इसके संरक्षण की माँग उठी है।

प्रमुख उत्सव

  • रथ सप्तमी (फरवरी)
  • उगादि (मार्च-अप्रैल)
  • वैशाख शुक्ल एकादशी और ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
  • कार्तिक पूर्णिमा और एकादशी (नवंबर)

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक
  • उत्सवों पर समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • भावनारायण स्वामी – देवी राज्यलक्ष्मी सहित, मान्यता के अनुसार नारद द्वारा प्रतिष्ठित।
  • पाताल भावनारायण – गरुड़ पर विराजमान भगवान का सन्निधि।
  • प्राचीन अभिलेख – 11वीं से 14वीं शताब्दी के।
  • स्तंभ मंडप – जय-विजय द्वारपालों की नक्काशी वाले स्तंभ।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: काकीनाडा टाउन रेलवे स्टेशन (लगभग 5 किमी)।
  • सड़क मार्ग: काकीनाडा शहर से लगभग 5 किमी; ऑटो और स्थानीय बसें।
  • हवाई मार्ग: राजमहेंद्रवरम हवाई अड्डा (लगभग 60 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सर्पवरम नाम कैसे पड़ा?
ब्रह्मवैवर्त पुराण की कथा के अनुसार कद्रू के पुत्र नाग अनंत ने यहाँ भगवान विष्णु की तपस्या की। प्रसन्न होकर भगवान ने कहा कि यह स्थान 'सर्पपुर' कहलाएगा, और यही नाम आगे चलकर सर्पवरम बना।
सर्पवरम मंदिर में भगवान की प्रतिष्ठा किसने की?
मान्यता है कि देवर्षि नारद ने यहाँ देवी राज्यलक्ष्मी सहित भगवान भावनारायण स्वामी की प्रतिष्ठा की थी, जैसा भगवान ने अनंत को वचन दिया था।
सर्पवरम मंदिर कितना पुराना है?
मंदिर से 11वीं से 14वीं शताब्दी के 32 अभिलेख प्रकाशित हुए हैं। सबसे पुराना 1073 ई. का है, जिसमें अखंड दीप के लिए 50 गायों के दान का उल्लेख है – इससे पता चलता है कि मंदिर उससे पहले भी मौजूद था।
सर्पवरम में कौन-से उत्सव मनाए जाते हैं?
यहाँ रथ सप्तमी, उगादि, वैशाख शुक्ल एकादशी, ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा व एकादशी प्रमुख रूप से मनाए जाते हैं।
काकीनाडा से सर्पवरम कितनी दूर है?
सर्पवरम काकीनाडा शहर से लगभग 5 किमी दूर है। ऑटो या स्थानीय बस से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

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