अरसवल्ली श्री सूर्यनारायण स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम शहर से लगभग 1 किमी पूर्व में स्थित भगवान सूर्य का प्राचीन मंदिर है। कोणार्क और मार्तंड के साथ इसे देश के प्रमुख सूर्य मंदिरों में गिना जाता है, और कोणार्क के विपरीत यहाँ आज भी नियमित पूजा-अर्चना होती है। उत्तरी आंध्र और ओडिशा के भक्तों के लिए यह आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना का बड़ा केंद्र है।
कथा और इतिहास
पद्म पुराण के अनुसार महर्षि कश्यप ने लोक-कल्याण के लिए अरसवल्ली में सूर्य देव की प्रतिमा स्थापित की थी। परंपरा मंदिर के निर्माण को कलिंग के पूर्वी गंग राजा देवेंद्र वर्मा से जोड़ती है और इसे 7वीं शताब्दी का माना जाता है। समय के साथ मंदिर जीर्ण हो गया; 1778 ई. में एलमंचिलि पुल्लाजी पंतुलु ने इसका पुनर्निर्माण कराया। इसलिए आज दिखने वाली संरचना मुख्यतः 18वीं शताब्दी की है।
मंदिर और विग्रह
मंदिर कलिंग शैली के रेखा देउल रूप में बना है, जो पुरी के जगन्नाथ मंदिर की याद दिलाता है। गर्भगृह में काले पत्थर की सूर्यनारायण प्रतिमा है – हाथों में कमल, सात घोड़ों वाला रथ, और साथ में देवी उषा और छाया। मंदिर की सबसे अद्भुत विशेषता यह है कि वर्ष में दो बार – लगभग 9–11 मार्च और 1–3 अक्टूबर – प्रातःकाल की सूर्य किरणें पाँचों द्वारों से होकर सीधे प्रतिमा के चरणों पर पड़ती हैं। इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु यह दृश्य देखने आते हैं।
प्रमुख उत्सव
- रथ सप्तमी (माघ शुक्ल सप्तमी, जनवरी-फरवरी): सूर्य जयंती, मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव।
- महाशिवरात्रि पर भी विशेष पूजा होती है।
- रविवार सूर्य देव का दिन होने से हर सप्ताह भीड़ रहती है।
आसपास के दर्शन
अरसवल्ली के साथ भक्त प्रायः श्रीकाकुलम ज़िले के दो और प्राचीन मंदिरों की यात्रा करते हैं – लगभग 15 किमी दूर श्रीकूर्मम का कूर्मनाथ स्वामी मंदिर, जहाँ भगवान विष्णु कूर्म (कछुआ) अवतार में पूजे जाते हैं, और वंशधारा नदी के तट पर श्रीमुखलिंगम के शिव मंदिर।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:30 बजे तक
- शाम: लगभग 3:30 से रात 8:00 बजे तक
- रथ सप्तमी और रविवार को भारी भीड़ रहती है; समय बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- सूर्यनारायण स्वामी – काले पत्थर की प्रतिमा, हाथों में कमल, सात घोड़ों वाले रथ पर।
- चरणों पर सूर्य किरणें – वर्ष में दो बार (मार्च और अक्टूबर के आरंभ में) प्रातःकालीन किरणें प्रतिमा के चरण छूती हैं।
- कलिंग शैली का शिखर – पुरी के जगन्नाथ मंदिर जैसी रेखा देउल शैली।
- रथ सप्तमी – मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: श्रीकाकुलम रोड (आमदालवलसा) रेलवे स्टेशन – हावड़ा-चेन्नई मार्ग पर।
- सड़क मार्ग: श्रीकाकुलम शहर से लगभग 1 किमी, विशाखापत्तनम से लगभग 115 किमी।
- हवाई मार्ग: विशाखापत्तनम हवाई अड्डा (लगभग 115 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अरसवल्ली सूर्य मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
अरसवल्ली में सूर्य किरणें प्रतिमा पर कब पड़ती हैं?
अरसवल्ली मंदिर की स्थापना किसने की?
अरसवल्ली में रथ सप्तमी कब मनाई जाती है?
श्रीकाकुलम से अरसवल्ली कितनी दूर है?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, श्रीनिवासमंगापुरम भगवान श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी (चतुर्भुज, पूर्वमुखी)
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Kakinada, आंध्र प्रदेश श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी मंदिर, तोलि तिरुपति (चदलाड) श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी (भगवान वेंकटेश्वर का स्वरूप), श्रीदेवी और भूदेवी सहित
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श्रीकालहस्ती, आंध्र प्रदेश श्रीकालहस्तीश्वर मंदिर, श्रीकालहस्ती भगवान शिव (श्रीकालहस्तीश्वर) – वायु लिंगम; देवी ज्ञानप्रसूनाम्बा
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Vijayawada, आंध्र प्रदेश श्री कनक दुर्गा मंदिर, इंद्रकीलाद्रि, विजयवाड़ा देवी श्री कनक दुर्गा, भगवान श्री मल्लेश्वर स्वामी
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Kakinada, आंध्र प्रदेश श्री सूर्यनारायण स्वामी मंदिर, गोल्लल मामिडाडा भगवान श्री सूर्यनारायण स्वामी
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तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी), तिरुमला भगवान श्री वेंकटेश्वर (बालाजी / श्रीनिवास)