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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

सोमाराम – श्री सोमेश्वर स्वामी मंदिर, भीमवरम

Somarama – Sri Someswara Swamy Temple, Bhimavaram

पश्चिम गोदावरी, आंध्र प्रदेश भगवान सोमेश्वर स्वामी, देवी राजराजेश्वरी निःशुल्क प्रवेश

सोमाराम – श्री सोमेश्वर स्वामी मंदिर – आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी ज़िले में भीमवरम शहर के पास गुनुपुडी में स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। यह पंचाराम क्षेत्रों में से एक है। यहाँ का शिवलिंग चंद्रदेव (सोम) द्वारा स्थापित माना जाता है, इसलिए शिव यहाँ सोमेश्वर कहलाते हैं और देवी राजराजेश्वरी के रूप में पूजी जाती हैं। यह भारत सरकार द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक भी है।

पंचाराम की कथा

कथा के अनुसार असुर तारकासुर के पास एक शिवलिंग था, जिसके रहते वह मर नहीं सकता था। कार्तिकेय ने आग्नेयास्त्र से उस लिंग को तोड़ा तो उसके पाँच टुकड़े पाँच स्थानों पर गिरे, जिन्हें वहीं प्रतिष्ठित कर दिया गया। यही पाँच धाम पंचाराम हैं। सोमाराम का लिंग चंद्रदेव ने स्थापित किया – इसी से स्थान का नाम सोमाराम पड़ा।

रंग बदलने वाला सोमेश्वर लिंग

सोमाराम की सबसे प्रसिद्ध मान्यता यह है कि यहाँ का लिंग चंद्रमा की कलाओं के साथ रंग बदलता है – पूर्णिमा पर श्वेत और अमावस्या पर श्याम दिखाई देता है। अन्य पंचारामों की तुलना में यहाँ का लिंग छोटा है। मंदिर दो तलों का है: नीचे सोमेश्वर का गर्भगृह और उसके ठीक ऊपर देवी अन्नपूर्णा का मंदिर। यहाँ अन्नपूर्णा की प्रतिमा यज्ञोपवीत धारण किए और चरणों के पास एक शिशु के साथ दिखाई जाती है, जो सामान्य रूप से अलग है।

मंदिर के सामने कमलों से भरा चंद्रकुंड सरोवर है। परिसर में ऊँचा गोपुरम, नंदी, श्रीराम और हनुमान के मंदिर तथा दक्षिण में आदिलक्ष्मी का सन्निधि है। यहाँ का सबसे पुराना ज्ञात शिलालेख पूर्वी चालुक्य राजा शक्तिवर्मा प्रथम (11वीं शताब्दी का आरंभ) के काल का है; बाद में मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार हुआ।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि: सबसे बड़ा उत्सव, रात भर अभिषेक और दर्शन।
  • शरन्नवरात्रि: राजराजेश्वरी और अन्नपूर्णा देवी की विशेष पूजा।
  • कार्तिक मास: सोमवार और पूर्णिमा पर पंचाराम यात्रियों की भीड़।

आसपास के दर्शन

सोमाराम से लगभग 25 किमी दूर पालकोल्लु में क्षीराराम है, इसलिए यात्री प्रायः दोनों के दर्शन एक ही दिन करते हैं। आगे गोदावरी पार करके द्राक्षाराम (द्राक्षारामम) और कुमाराराम (सामर्लकोट), तथा कृष्णा तट पर अमराराम (अमरावती) के साथ पंचाराम यात्रा पूरी होती है। भीमवरम में मावुल्लम्मा मंदिर भी प्रसिद्ध है।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक

महाशिवरात्रि और कार्तिक मास में समय बढ़ाया जा सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • सोमेश्वर लिंग – चंद्र कलाओं के साथ रंग बदलता बताया जाता है।
  • अन्नपूर्णा देवी – शिव के गर्भगृह के ठीक ऊपर, ऊपरी तल पर।
  • देवी राजराजेश्वरी का सन्निधि।
  • चंद्रकुंड – मंदिर के सामने कमलों से भरा सरोवर।
  • परिसर में श्रीराम, हनुमान और आदिलक्ष्मी के मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: भीमवरम शहर से लगभग 2 किमी (गुनुपुडी); ऑटो आसानी से मिलते हैं। पालकोल्लु लगभग 25 किमी।
  • रेल मार्ग: भीमवरम टाउन और भीमवरम जंक्शन स्टेशन (लगभग 2–3 किमी)।
  • हवाई मार्ग: राजमुंदरी हवाई अड्डा (लगभग 90 किमी) या विजयवाड़ा हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सोमाराम का शिवलिंग रंग क्यों बदलता है?
मान्यता है कि सोमेश्वर लिंग चंद्रदेव ने स्थापित किया था, इसलिए यह चंद्रमा की कलाओं के साथ रंग बदलता है – पूर्णिमा पर श्वेत और अमावस्या पर श्याम (काला-भूरा) दिखाई देता है।
सोमाराम मंदिर की क्या विशेषता है?
यहाँ शिव के गर्भगृह के ठीक ऊपर ऊपरी तल पर देवी अन्नपूर्णा का मंदिर है, जो दुर्लभ व्यवस्था है। मंदिर के सामने चंद्रकुंड नाम का सरोवर है।
सोमाराम किस पंचाराम से जुड़ा है?
सोमाराम पाँच पंचाराम क्षेत्रों में से एक है। बाकी चार हैं अमराराम (अमरावती), द्राक्षाराम (द्राक्षारामम), क्षीराराम (पालकोल्लु) और कुमाराराम (सामर्लकोट)।
सोमाराम में कौन से उत्सव मनाए जाते हैं?
महाशिवरात्रि सबसे बड़ा उत्सव है। शरन्नवरात्रि में देवी की विशेष पूजा होती है और कार्तिक मास में पंचाराम यात्री बड़ी संख्या में आते हैं।
भीमवरम से पालकोल्लु का क्षीराराम कितनी दूर है?
सोमाराम (भीमवरम) से क्षीराराम (पालकोल्लु) लगभग 25 किमी दूर है, इसलिए दोनों पंचारामों के दर्शन एक ही दिन में आसानी से हो जाते हैं।

सोमाराम – श्री सोमेश्वर स्वामी मंदिर, भीमवरम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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