विराट रामायण मंदिर बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में चकिया–केसरिया मार्ग पर कैथवलिया और बहुआरा गाँवों के पास बन रहा एक विशाल निर्माणाधीन मंदिर परिसर है। इसके मुख्य विग्रह श्रीराम और माता सीता होंगे और परिसर में अनेक देवी-देवताओं के मंदिर प्रस्तावित हैं। इसका निर्माण पटना का महावीर मंदिर न्यास करा रहा है। मंदिर अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन जनवरी 2026 में यहाँ स्थापित विशाल शिवलिंग के कारण श्रद्धालु अभी से यहाँ पहुँचने लगे हैं।
परियोजना का इतिहास
इस मंदिर की परिकल्पना महावीर मंदिर न्यास के सचिव रहे आचार्य किशोर कुणाल ने की थी। आरंभ में इसे हाजीपुर में “विराट अंगकोर वाट राम मंदिर” के रूप में प्रस्तावित किया गया था, बाद में न्यास ने पूर्वी चंपारण में भूमि ली। कंबोडिया की आपत्ति के बाद अगस्त 2012 में भारत सरकार ने अंगकोर वाट की हूबहू प्रतिकृति न बनाने को कहा, जिसके बाद परियोजना का नाम विराट रामायण मंदिर रखा गया। 13 नवंबर 2013 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंदिर के मॉडल का अनावरण किया था। प्रस्तावित रूपरेखा अंगकोर वाट, रामेश्वरम के रामनाथस्वामी मंदिर और मदुरै के मीनाक्षी मंदिर से प्रेरित बताई जाती है।
सहस्रलिंगम शिवलिंग
परिसर के शिव मंडप में 17 जनवरी 2026 को वैदिक अनुष्ठानों के साथ विशाल सहस्रलिंगम शिवलिंग की स्थापना हुई। काले ग्रेनाइट की एक ही शिला से तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तराशा गया यह शिवलिंग लगभग 33 फीट ऊँचा और लगभग 210 टन वज़नी बताया गया है, और इसकी सतह पर 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं। स्थापना के अवसर पर भारी भीड़ उमड़ी और हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई।
निर्माण की स्थिति
मुख्य राम-सीता मंदिर और अन्य देवालयों का निर्माण अभी जारी है। मंदिर के आकार, ऊँचाई और पूर्ण होने की तिथि को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में भिन्न आँकड़े मिलते हैं, इसलिए अंतिम जानकारी के लिए महावीर मंदिर न्यास की घोषणाओं को ही देखना चाहिए। पूर्ण होने पर यहाँ रामनवमी, दीपावली और विजयादशमी जैसे पर्व प्रमुख रूप से मनाए जाने की योजना है।
यात्रा क्रम / आसपास के दर्शन
मंदिर स्थल पटना से लगभग 120 किमी उत्तर में है और चकिया तथा मोतिहारी से सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है। पास ही विश्व के सबसे ऊँचे बौद्ध स्तूपों में गिना जाने वाला केसरिया स्तूप है।
दर्शन का समय
मंदिर अभी निर्माणाधीन है। शिव मंडप में स्थापित सहस्रलिंगम के दर्शन और पूजा की व्यवस्था की गई है, पर समय और प्रवेश की व्यवस्था निर्माण के कारण बदल सकती है। जाने से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।
मुख्य आकर्षण
- सहस्रलिंगम शिवलिंग – काले ग्रेनाइट की एक ही शिला से बना, लगभग 33 फीट ऊँचा और लगभग 210 टन का शिवलिंग, जिस पर 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं।
- निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर – कई देवालयों वाला प्रस्तावित विशाल परिसर।
- पास में केसरिया बौद्ध स्तूप।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: चकिया–केसरिया मार्ग पर कैथवलिया-बहुआरा गाँवों के पास; पटना से लगभग 120 किमी।
- रेल मार्ग: चकिया और मोतिहारी (बापूधाम) निकटतम प्रमुख स्टेशन।
- हवाई मार्ग: जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पटना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विराट रामायण मंदिर कहाँ बन रहा है?
क्या विराट रामायण मंदिर बनकर तैयार हो गया है?
विराट रामायण मंदिर कौन बना रहा है?
विराट रामायण मंदिर का शिवलिंग कितना बड़ा है?
इस मंदिर का पहले नाम क्या था?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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Patna, बिहार शीतला माता मंदिर, पटना माँ शीतला, सप्तमातृकाएँ
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मधुबनी, बिहार मिथिला शक्तिपीठ (उच्चैठ भगवती), मधुबनी माँ उच्चैठ भगवती (उमा / वनदुर्गा, छिन्नमस्तिका दुर्गा); भैरव – महोदर
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Sasaram, बिहार माँ ताराचंडी मंदिर, सासाराम माँ ताराचंडी (देवी तारा / दुर्गा)
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Gaya, बिहार मंगला गौरी मंदिर, गया माँ मंगला गौरी (सती / गौरी)
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गोपालगंज, बिहार थावे भवानी मंदिर, गोपालगंज माँ थावेवाली (सिंहासिनी भवानी / रहषु भवानी) – देवी दुर्गा
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Chapra, बिहार अंबिका भवानी मंदिर (आमी मंदिर), दिघवारा, सारण माँ अंबिका भवानी (सती), साथ में भगवान शिव