कालमाधव शक्तिपीठ मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में मैकल पर्वत पर बसे तीर्थ अमरकंटक क्षेत्र में माना जाता है। इसकी गिनती 51 शक्तिपीठों में होती है। मान्यता है कि यहाँ सती का बायाँ नितंब गिरा था। यहाँ की शक्ति काली और भैरव असितांग हैं। कई स्रोतों के अनुसार यह पीठ अमरकंटक के पास पहाड़ी पर सोन नदी के तट की एक गुफा में है, जहाँ देवी की काली रूप में पूजा होती है।
नर्मदा उद्गम से अलग पीठ
अमरकंटक में दो शक्तिपीठ माने जाते हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग समझना ज़रूरी है। नर्मदा उद्गम मंदिर को शोणदेश शक्तिपीठ माना जाता है – वहाँ दायाँ नितंब गिरा, शक्ति नर्मदा और भैरव भद्रसेन हैं। कालमाधव इससे भिन्न पीठ है – यहाँ बायाँ नितंब, शक्ति काली और भैरव असितांग माने जाते हैं। नर्मदा उद्गम नगर के बीच बना बड़ा मंदिर परिसर है, जबकि कालमाधव की पहचान सोन नदी से जुड़े एक शांत, पर्वतीय देवी-स्थान के रूप में होती है।
काली रूप में देवी
कालमाधव में देवी सती की आराधना माँ काली के रूप में होती है और भगवान शिव भैरव असितांग के रूप में पूजे जाते हैं। असितांग भैरव को अष्ट भैरवों में गिना जाता है। श्रद्धालु यहाँ भय और बाधाओं से मुक्ति की कामना लेकर आते हैं। नवरात्रि और काली पूजा के समय यहाँ विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा बताई जाती है।
सोन नदी और अमरकंटक
अमरकंटक को नर्मदा और सोन – दोनों नदियों का उद्गम क्षेत्र माना जाता है। सोन नदी का पारंपरिक उद्गम सोनमुड़ा नर्मदा कुंड से लगभग 1.5 किमी दूर है, जहाँ से नदी पहाड़ी से नीचे उतरती दिखती है। कालमाधव पीठ को इसी सोन नदी से जोड़ा जाता है, इसलिए यात्री प्रायः नर्मदा उद्गम, सोनमुड़ा, माई की बगिया और कपिलधारा के साथ इस पीठ के भी दर्शन करते हैं।
स्थान को लेकर मत
कालमाधव के सटीक स्थान को लेकर संशय है। अधिकतर सूचियाँ इसे अमरकंटक क्षेत्र में ही मानती हैं, पर कोई एक सर्वमान्य मंदिर तय नहीं है – कुछ स्रोत सोन नदी के तट की गुफा बताते हैं, तो कुछ इसे नर्मदा उद्गम परिसर के आसपास ही मानते हैं। कुछ ग्रंथों और लेखों में दाएँ और बाएँ नितंब के पीठों का क्रम भी उलटा मिलता है। इसलिए जाने से पहले स्थानीय पुजारियों से सही स्थान की जानकारी अवश्य लें।
यात्रा सुझाव
अमरकंटक में ठहरने के लिए धर्मशालाएँ और होटल मिल जाते हैं। पीठ वन और पहाड़ी क्षेत्र में माना जाता है, इसलिए दिन में ही जाएँ और आरामदायक जूते पहनें। अक्टूबर से मार्च तक का समय यात्रा के लिए अच्छा है; सर्दियों में यहाँ काफ़ी ठंड पड़ती है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सामान्यतः दिन के उजाले में, लगभग सुबह 6:00 से शाम 6:00 बजे तक
स्थान पर्वतीय और वनक्षेत्र में माना जाता है, इसलिए स्थानीय पुजारियों या जानकारों से रास्ता पूछकर दिन में ही जाएँ।
मुख्य आकर्षण
- माँ काली (कालमाधव) – सती के बाएँ नितंब की मान्यता वाला पीठ।
- सोनमुड़ा – सोन नदी का उद्गम, नर्मदा कुंड से लगभग 1.5 किमी।
- नर्मदा उद्गम मंदिर – शोणदेश शक्तिपीठ (दायाँ नितंब)।
- माई की बगिया और कपिलधारा जलप्रपात।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन, छत्तीसगढ़ (लगभग 40 किमी) या अनूपपुर जंक्शन (लगभग 70 किमी)।
- सड़क मार्ग: पेंड्रा रोड, अनूपपुर और बिलासपुर से अमरकंटक तक बस और टैक्सी; आगे स्थानीय वाहन या पैदल।
- हवाई मार्ग: बिलासा देवी केवट हवाई अड्डा, बिलासपुर (लगभग 120 किमी) या जबलपुर (लगभग 230 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कालमाधव शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
कालमाधव शक्तिपीठ कहाँ है?
कालमाधव और नर्मदा उद्गम (शोणदेश) शक्तिपीठ में क्या अंतर है?
अमरकंटक को दो शक्तिपीठों वाला क्षेत्र क्यों कहते हैं?
कालमाधव जाने का अच्छा समय कौन सा है?
कालमाधव शक्तिपीठ (माँ काली), अमरकंटक इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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उज्जैन, मध्य प्रदेश काल भैरव मंदिर, उज्जैन भगवान काल भैरव (शिव का उग्र स्वरूप)
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Chhatarpur, मध्य प्रदेश कंदारिया महादेव मंदिर, खजुराहो भगवान शिव (महादेव), शिवलिंग रूप में
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Murwara, मध्य प्रदेश कंकाली देवी मंदिर, तिगवाँ (कटनी) कंकाली देवी (चामुंडा); मंदिर मूलतः भगवान विष्णु (नरसिंह) को समर्पित माना जाता है
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अमरकंटक, मध्य प्रदेश नर्मदा उद्गम मंदिर (शोणदेश शक्तिपीठ), अमरकंटक माँ नर्मदा; भैरव – भद्रसेन
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Indore, मध्य प्रदेश खजराना गणेश मंदिर, इंदौर श्री गणेश (खजराना गणेश)
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उज्जैन, मध्य प्रदेश हरसिद्धि माता मंदिर, उज्जैन माँ हरसिद्धि (अन्नपूर्णा स्वरूप), महालक्ष्मी और महासरस्वती