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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री पार्थसारथी मंदिर, तिरुवल्लिकेणी (ट्रिप्लिकेन) चेन्नई

Sri Parthasarathy Temple, Thiruvallikeni (Triplicane) Chennai

चेन्नई, तमिलनाडु भगवान श्री पार्थसारथी (वेंकटकृष्णन), देवी वेदवल्ली थायार निःशुल्क प्रवेश

श्री पार्थसारथी मंदिर तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के पुराने मोहल्ले तिरुवल्लिकेणी (अंग्रेज़ी में ट्रिप्लिकेन) में स्थित भगवान श्रीकृष्ण का प्राचीन मंदिर है। यहाँ भगवान महाभारत युद्ध में अर्जुन (पार्थ) के सारथी रूप में पूजे जाते हैं। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है, जिसकी स्तुति आलवार संतों पेयाऴ्वार, तिरुमऴिसै आऴ्वार और तिरुमंगै आऴ्वार ने की है। मंदिर का मूल 8वीं शताब्दी के पल्लव काल से जुड़ा है, जिससे यह चेन्नई के सबसे पुराने मंदिरों में गिना जाता है।

मूँछों वाले सारथी कृष्ण

गर्भगृह में भगवान वेंकटकृष्णन की लगभग नौ फ़ीट ऊँची खड़ी प्रतिमा है, जिनके हाथ में चक्र नहीं, केवल शंख है – क्योंकि महाभारत में कृष्ण ने शस्त्र न उठाने का वचन दिया था। भगवान को योद्धा की तरह मूँछों के साथ दिखाया गया है, जो विष्णु प्रतिमाओं में बहुत दुर्लभ है। उत्सव प्रतिमा के मुख पर बाणों के निशान हैं – मान्यता है कि ये भीष्म पितामह के बाणों से लगे घाव हैं, जो भगवान ने अपने भक्त अर्जुन की रक्षा में सहे।

कृष्ण का पूरा परिवार

इस मंदिर की एक बड़ी विशेषता यह है कि गर्भगृह में भगवान अपने परिवार के साथ हैं – पत्नी रुक्मिणी, भाई बलराम, मित्र सात्यकि, पुत्र प्रद्युम्न और पौत्र अनिरुद्ध। परिसर में विष्णु के अन्य रूपों की भी अलग सन्निधियाँ हैं – योग नरसिंह, श्रीराम, रंगनाथ और वराह। इसलिए यहाँ एक ही परिसर में विष्णु के कई अवतारों के दर्शन होते हैं। देवी लक्ष्मी यहाँ वेदवल्ली थायार के नाम से पूजी जाती हैं।

तिरुवल्लिकेणी नाम

“तिरुवल्लिकेणी” का अर्थ है – पवित्र कुमुदिनी (लिली) का सरोवर। मंदिर के सामने का सरोवर कैरवणी पुष्करिणी कहलाता है, जिसमें कभी कुमुदिनी के फूल खिलते थे। अंग्रेज़ों के समय यही नाम “ट्रिप्लिकेन” बन गया। मंदिर के आसपास का मोहल्ला आज भी पारंपरिक अग्रहारम (ब्राह्मण बस्ती) जैसा दिखता है, और महाकवि सुब्रमण्य भारती का घर भी इसी क्षेत्र में है।

प्रमुख उत्सव

  • वैकुंठ एकादशी: सबसे बड़ा उत्सव – स्वर्ग द्वार दर्शन के लिए रात से ही कतारें लगती हैं।
  • चित्रै ब्रह्मोत्सवम (अप्रैल-मई) और तेप्पोत्सवम (सरोवर में नौका उत्सव)।
  • कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष पूजा।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 9:00 बजे तक

वैकुंठ एकादशी और उत्सवों के दिनों में समय बदल जाता है।

मुख्य आकर्षण

  • भगवान पार्थसारथी – मूँछों वाले सारथी कृष्ण, हाथ में शंख।
  • गर्भगृह में रुक्मिणी, बलराम, सात्यकि, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध।
  • योग नरसिंह, राम, रंगनाथ और वराह की सन्निधियाँ।
  • कैरवणी पुष्करिणी – मंदिर सरोवर।
  • मरीना बीच – लगभग 1 किमी।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: चेन्नई सेंट्रल (लगभग 5 किमी); MRTS तिरुवल्लिकेणी स्टेशन पास में।
  • सड़क मार्ग: चेन्नई शहर के बीच ट्रिप्लिकेन क्षेत्र में; बस, ऑटो और टैक्सी।
  • हवाई मार्ग: चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 18 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पार्थसारथी नाम का क्या अर्थ है?
पार्थसारथी का अर्थ है 'पार्थ (अर्जुन) के सारथी'। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण महाभारत युद्ध में अर्जुन के सारथी रूप में पूजे जाते हैं।
पार्थसारथी भगवान के चेहरे पर निशान क्यों हैं?
मान्यता है कि महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह के बाणों से भगवान के मुख पर घाव हुए थे। इसलिए उत्सव प्रतिमा के मुख पर बाणों के निशान दिखाए जाते हैं।
पार्थसारथी मंदिर में भगवान की मूँछें क्यों हैं?
यहाँ भगवान युद्धभूमि के सारथी रूप में हैं, इसलिए उन्हें योद्धा की तरह मूँछों के साथ दिखाया गया है। यह विष्णु प्रतिमाओं में बहुत दुर्लभ है।
तिरुवल्लिकेणी नाम का क्या अर्थ है?
तिरुवल्लिकेणी का अर्थ है 'पवित्र कुमुदिनी (लिली) का सरोवर'। मंदिर के सरोवर में कभी कुमुदिनी के फूल खिलते थे, और अंग्रेज़ी में यही नाम ट्रिप्लिकेन बन गया।
पार्थसारथी मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव कौन सा है?
वैकुंठ एकादशी सबसे बड़ा उत्सव है, जब स्वर्ग द्वार खुलता है और लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं। चित्रै ब्रह्मोत्सवम भी प्रसिद्ध है।

श्री पार्थसारथी मंदिर, तिरुवल्लिकेणी (ट्रिप्लिकेन) चेन्नई इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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