कल्लऴगर मंदिर, जिसे अऴगर कोविल भी कहते हैं, तमिलनाडु के मदुरै नगर से लगभग 21 किमी दूर अऴगर पहाड़ियों (सोलैमलै) की तलहटी में स्थित भगवान विष्णु का प्राचीन मंदिर है। यहाँ भगवान सुंदरराज – “सुंदर राजा” – के रूप में पूजे जाते हैं, जिन्हें स्थानीय लोग प्रेम से कल्लऴगर कहते हैं। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है, जिसकी स्तुति आंडाल, पेरियाऴ्वार और नम्माऴ्वार सहित कई आलवार संतों ने की है। मदुरै की परंपरा में भगवान कल्लऴगर को देवी मीनाक्षी का भाई माना जाता है।
चित्रै उत्सव – वैगई में प्रवेश
मदुरै का प्रसिद्ध चित्रै उत्सव (अप्रैल-मई) शिव और विष्णु – दोनों परंपराओं को जोड़ता है। कथा के अनुसार कल्लऴगर अपनी बहन मीनाक्षी का सुंदरेश्वर (शिव) से विवाह कराने मदुरै जा रहे थे, पर पहुँचने से पहले ही विवाह संपन्न हो गया। रुष्ट होकर वे नगर में प्रवेश किए बिना वैगई नदी में उतरकर ही लौट गए। उत्सव में भगवान कल्लऴगर सोने के घोड़े पर सवार होकर अऴगर कोविल से मदुरै आते हैं और चित्रा पूर्णिमा के आसपास वैगई में प्रवेश करते हैं – इसे देखने लाखों श्रद्धालु नदी के किनारे जुटते हैं।
करुप्पसामी और 18 सीढ़ियाँ
मंदिर के एक प्रमुख द्वार पर पतिनेट्टाम पडि करुप्पसामी – 18 सीढ़ियों के रक्षक देवता – का स्थान है। दक्षिण तमिलनाडु के लोग करुप्पसामी को न्याय के देवता के रूप में पूजते हैं; विवाद सुलझाने और सच बोलने की शपथ भी कभी इन्हीं के सामने ली जाती थी। इस द्वार के पट सामान्यतः बंद रहते हैं और विशेष अवसर पर ही खोले जाते हैं। मंदिर किलेनुमा प्राचीर से घिरा है, जो पांड्य और नायक काल के स्थापत्य को दर्शाता है।
नूपुर गंगा और पऴमुदिर्चोलै
मंदिर के पीछे पहाड़ी पर लगभग 3 किमी ऊपर नूपुर गंगा नाम का पवित्र झरना है – मान्यता है कि यह भगवान के नूपुर (पायल) से निकला जल है, और भगवान का अभिषेक इसी जल से होता है। रास्ते में भगवान मुरुगन का पऴमुदिर्चोलै मंदिर है, जो मुरुगन के छह प्रमुख धामों (आरुपडै वीडु) में से एक है। पहाड़ी का रास्ता हरे-भरे जंगल से होकर जाता है, जहाँ बंदर बहुत होते हैं।
प्रमुख उत्सव
- चित्रै उत्सव (अप्रैल-मई): कल्लऴगर का वैगई नदी में प्रवेश – दक्षिण भारत के सबसे बड़े उत्सवों में से एक।
- आडि ब्रह्मोत्सवम (जुलाई-अगस्त) और रथोत्सव।
- वैकुंठ एकादशी पर स्वर्ग द्वार दर्शन।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:30 बजे तक
- शाम: लगभग 3:30 से रात 8:00 बजे तक
चित्रै उत्सव के समय भगवान मदुरै की यात्रा पर होते हैं, इसलिए समय बदल जाता है।
मुख्य आकर्षण
- भगवान सुंदरराज (कल्लऴगर) का गर्भगृह।
- पतिनेट्टाम पडि करुप्पसामी – 18 सीढ़ियों वाले रक्षक देवता।
- नूपुर गंगा – पहाड़ी पर पवित्र झरना।
- पऴमुदिर्चोलै – भगवान मुरुगन के छह धामों में से एक, पहाड़ी पर।
- अऴगर पहाड़ियों का हरा-भरा परिवेश।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: मदुरै जंक्शन (लगभग 21 किमी) – देश के बड़े शहरों से ट्रेनें।
- सड़क मार्ग: मदुरै से मेलूर रोड द्वारा लगभग 21 किमी; सरकारी बसें और टैक्सी।
- हवाई मार्ग: मदुरै हवाई अड्डा (लगभग 30 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कल्लऴगर कौन हैं?
चित्रै उत्सव में कल्लऴगर वैगई नदी में क्यों उतरते हैं?
अऴगर कोविल में करुप्पसामी कौन हैं?
मदुरै से अऴगर कोविल कितनी दूर है?
अऴगर कोविल के पास और क्या दर्शनीय है?
कल्लऴगर मंदिर (अऴगर कोविल), मदुरै इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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तिरुवन्नामलई, तमिलनाडु अरुणाचलेश्वर मंदिर, तिरुवन्नामलई भगवान शिव (अरुणाचलेश्वर / अण्णामलैयार) – अग्नि लिंगम; देवी उण्णामुलै अम्मन
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चिदंबरम, तमिलनाडु थिल्लई नटराज मंदिर, चिदंबरम भगवान शिव (नटराज) – आकाश लिंगम; देवी शिवकामसुंदरी
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कांचीपुरम, तमिलनाडु एकाम्बरेश्वर मंदिर, कांचीपुरम भगवान शिव (एकाम्बरेश्वर) – पृथ्वी लिंगम; देवी एलवार कुझाली
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तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु जंबुकेश्वर मंदिर, तिरुवनैकावल भगवान शिव (जंबुकेश्वर) – जल लिंगम; देवी अखिलांडेश्वरी
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कांचीपुरम, तमिलनाडु कामाक्षी अम्मन मंदिर, कांचीपुरम माँ कामाक्षी (देवी पार्वती / ललिता त्रिपुरसुंदरी)
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कन्याकुमारी, तमिलनाडु कन्याकुमारी भगवती अम्मन मंदिर, कन्याकुमारी तमिलनाडु देवी कन्याकुमारी (भगवती अम्मन); भैरव – निमिष