श्री रंगनाथस्वामी मंदिर तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली (त्रिची) नगर के पास, कावेरी और कोल्लिडम नदियों के बीच बने द्वीप श्रीरंगम पर स्थित भगवान विष्णु का विश्वप्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ भगवान श्री रंगनाथ आदिशेष पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। श्री वैष्णव परंपरा में श्रीरंगम को 108 दिव्य देशमों में प्रथम और “भूलोक वैकुंठ” (पृथ्वी पर वैकुंठ) माना जाता है। भक्त इसे प्रेम से केवल “कोयिल” – यानी “मंदिर” – कहते हैं।
विभीषण और रंगनाथ की कथा
कथा के अनुसार यह विग्रह (रंगविमान सहित) पहले ब्रह्मा जी के पास था, फिर सूर्यवंशी राजाओं के पास अयोध्या आया। राज्याभिषेक के बाद श्रीराम ने इसे अपने भक्त विभीषण को उपहार में दिया। लंका ले जाते समय विभीषण ने विश्राम के लिए विग्रह को कावेरी के तट पर रखा, और वह वहीं स्थिर हो गया। विभीषण की भक्ति देखकर भगवान ने वचन दिया कि वे दक्षिण दिशा – लंका की ओर – मुख करके शयन करेंगे। इसीलिए श्री रंगनाथ का मुख दक्षिण की ओर है।
सात प्राकार और विशाल परिसर
मंदिर लगभग 156 एकड़ में फैला है और इसे विश्व के सबसे बड़े सक्रिय हिंदू मंदिरों में गिना जाता है। गर्भगृह के चारों ओर सात प्राकार (परकोटे) हैं, जिन्हें सात लोकों का प्रतीक माना जाता है; बाहरी प्राकारों के भीतर पूरा नगर बसा है। परिसर में 21 गोपुरम हैं, जिनमें दक्षिणी राजगोपुरम लगभग 236 फ़ीट (73 मीटर) ऊँचा है – इसे 1987 में पूरा किया गया। हज़ार स्तंभ मंडप, शेषराय मंडप के घोड़ों वाले नक्काशीदार स्तंभ और स्वर्ण जड़ा प्रणवाकार विमान दर्शनीय हैं।
रामानुजाचार्य और श्री वैष्णव परंपरा
11वीं-12वीं शताब्दी के महान आचार्य रामानुजाचार्य ने अपने जीवन का बड़ा भाग श्रीरंगम में बिताया और यहीं मंदिर की पूजा-व्यवस्था को व्यवस्थित किया। मंदिर परिसर में उनकी सन्निधि है, जहाँ उनका पावन विग्रह (तिरुमेनि) सुरक्षित माना जाता है। बारह आलवार संतों में से ग्यारह ने श्रीरंगम की स्तुति में पाशुरम गाए हैं – किसी भी दिव्य देशम के लिए सबसे अधिक।
प्रमुख उत्सव
- वैकुंठ एकादशी (मार्गशीर्ष): 21 दिनों का उत्सव – पगल पत्तु और रा पत्तु; एकादशी पर परमपद वासल (स्वर्ग द्वार) खुलता है।
- पंगुनी उत्तिरम – रंगनाथ और रंगनायकी का दिव्य विवाह उत्सव।
- चित्रै रथोत्सव और ब्रह्मोत्सवम – वर्ष में कई बार।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और 3:00 से रात 9:00 बजे तक (बीच में पूजा के समय थोड़ी देर बंद)
- विश्वरूप दर्शन: सुबह जल्दी
पारंपरिक वस्त्र पहनना उचित है। गर्भगृह में फ़ोटोग्राफ़ी वर्जित है।
मुख्य आकर्षण
- भगवान रंगनाथ – आदिशेष पर शयन मुद्रा में।
- राजगोपुरम – लगभग 236 फ़ीट (73 मीटर) ऊँचा।
- सात प्राकार और हज़ार स्तंभ मंडप।
- रामानुजाचार्य सन्निधि।
- रंगनायकी थायार सन्निधि और गरुड़ मंडप।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: श्रीरंगम स्टेशन (लगभग 1 किमी) या तिरुचिरापल्ली जंक्शन (लगभग 9 किमी)।
- सड़क मार्ग: तिरुचिरापल्ली शहर से बस और ऑटो; चेन्नई से लगभग 320 किमी।
- हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 15 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
श्रीरंगम को 108 दिव्य देशमों में प्रथम क्यों माना जाता है?
श्रीरंगम मंदिर कितना बड़ा है?
श्रीरंगम में रंगनाथ की प्रतिमा कैसे आई?
श्रीरंगम में वैकुंठ एकादशी कैसे मनाई जाती है?
त्रिची से श्रीरंगम मंदिर कितनी दूर है?
श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, श्रीरंगम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
तिरुवन्नामलई, तमिलनाडु अरुणाचलेश्वर मंदिर, तिरुवन्नामलई भगवान शिव (अरुणाचलेश्वर / अण्णामलैयार) – अग्नि लिंगम; देवी उण्णामुलै अम्मन
-
चिदंबरम, तमिलनाडु थिल्लई नटराज मंदिर, चिदंबरम भगवान शिव (नटराज) – आकाश लिंगम; देवी शिवकामसुंदरी
-
कांचीपुरम, तमिलनाडु एकाम्बरेश्वर मंदिर, कांचीपुरम भगवान शिव (एकाम्बरेश्वर) – पृथ्वी लिंगम; देवी एलवार कुझाली
-
तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु जंबुकेश्वर मंदिर, तिरुवनैकावल भगवान शिव (जंबुकेश्वर) – जल लिंगम; देवी अखिलांडेश्वरी
-
कांचीपुरम, तमिलनाडु कामाक्षी अम्मन मंदिर, कांचीपुरम माँ कामाक्षी (देवी पार्वती / ललिता त्रिपुरसुंदरी)
-
कन्याकुमारी, तमिलनाडु कन्याकुमारी भगवती अम्मन मंदिर, कन्याकुमारी तमिलनाडु देवी कन्याकुमारी (भगवती अम्मन); भैरव – निमिष