मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, श्रीरंगम

Sri Ranganathaswamy Temple, Srirangam

तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु भगवान श्री रंगनाथ (शेषशायी विष्णु), देवी रंगनायकी निःशुल्क प्रवेश

श्री रंगनाथस्वामी मंदिर तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली (त्रिची) नगर के पास, कावेरी और कोल्लिडम नदियों के बीच बने द्वीप श्रीरंगम पर स्थित भगवान विष्णु का विश्वप्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ भगवान श्री रंगनाथ आदिशेष पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। श्री वैष्णव परंपरा में श्रीरंगम को 108 दिव्य देशमों में प्रथम और “भूलोक वैकुंठ” (पृथ्वी पर वैकुंठ) माना जाता है। भक्त इसे प्रेम से केवल “कोयिल” – यानी “मंदिर” – कहते हैं।

विभीषण और रंगनाथ की कथा

कथा के अनुसार यह विग्रह (रंगविमान सहित) पहले ब्रह्मा जी के पास था, फिर सूर्यवंशी राजाओं के पास अयोध्या आया। राज्याभिषेक के बाद श्रीराम ने इसे अपने भक्त विभीषण को उपहार में दिया। लंका ले जाते समय विभीषण ने विश्राम के लिए विग्रह को कावेरी के तट पर रखा, और वह वहीं स्थिर हो गया। विभीषण की भक्ति देखकर भगवान ने वचन दिया कि वे दक्षिण दिशा – लंका की ओर – मुख करके शयन करेंगे। इसीलिए श्री रंगनाथ का मुख दक्षिण की ओर है।

सात प्राकार और विशाल परिसर

मंदिर लगभग 156 एकड़ में फैला है और इसे विश्व के सबसे बड़े सक्रिय हिंदू मंदिरों में गिना जाता है। गर्भगृह के चारों ओर सात प्राकार (परकोटे) हैं, जिन्हें सात लोकों का प्रतीक माना जाता है; बाहरी प्राकारों के भीतर पूरा नगर बसा है। परिसर में 21 गोपुरम हैं, जिनमें दक्षिणी राजगोपुरम लगभग 236 फ़ीट (73 मीटर) ऊँचा है – इसे 1987 में पूरा किया गया। हज़ार स्तंभ मंडप, शेषराय मंडप के घोड़ों वाले नक्काशीदार स्तंभ और स्वर्ण जड़ा प्रणवाकार विमान दर्शनीय हैं।

रामानुजाचार्य और श्री वैष्णव परंपरा

11वीं-12वीं शताब्दी के महान आचार्य रामानुजाचार्य ने अपने जीवन का बड़ा भाग श्रीरंगम में बिताया और यहीं मंदिर की पूजा-व्यवस्था को व्यवस्थित किया। मंदिर परिसर में उनकी सन्निधि है, जहाँ उनका पावन विग्रह (तिरुमेनि) सुरक्षित माना जाता है। बारह आलवार संतों में से ग्यारह ने श्रीरंगम की स्तुति में पाशुरम गाए हैं – किसी भी दिव्य देशम के लिए सबसे अधिक।

प्रमुख उत्सव

  • वैकुंठ एकादशी (मार्गशीर्ष): 21 दिनों का उत्सव – पगल पत्तु और रा पत्तु; एकादशी पर परमपद वासल (स्वर्ग द्वार) खुलता है।
  • पंगुनी उत्तिरम – रंगनाथ और रंगनायकी का दिव्य विवाह उत्सव।
  • चित्रै रथोत्सव और ब्रह्मोत्सवम – वर्ष में कई बार।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और 3:00 से रात 9:00 बजे तक (बीच में पूजा के समय थोड़ी देर बंद)
  • विश्वरूप दर्शन: सुबह जल्दी

पारंपरिक वस्त्र पहनना उचित है। गर्भगृह में फ़ोटोग्राफ़ी वर्जित है।

मुख्य आकर्षण

  • भगवान रंगनाथ – आदिशेष पर शयन मुद्रा में।
  • राजगोपुरम – लगभग 236 फ़ीट (73 मीटर) ऊँचा।
  • सात प्राकार और हज़ार स्तंभ मंडप।
  • रामानुजाचार्य सन्निधि।
  • रंगनायकी थायार सन्निधि और गरुड़ मंडप।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: श्रीरंगम स्टेशन (लगभग 1 किमी) या तिरुचिरापल्ली जंक्शन (लगभग 9 किमी)।
  • सड़क मार्ग: तिरुचिरापल्ली शहर से बस और ऑटो; चेन्नई से लगभग 320 किमी।
  • हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 15 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्रीरंगम को 108 दिव्य देशमों में प्रथम क्यों माना जाता है?
श्रीरंगम को 'भूलोक वैकुंठ' कहा जाता है और आलवार संतों ने सबसे अधिक पाशुरम (भजन) इसी मंदिर की स्तुति में गाए हैं। इसलिए श्री वैष्णव परंपरा में इसे दिव्य देशमों में प्रथम और सबसे प्रमुख माना जाता है।
श्रीरंगम मंदिर कितना बड़ा है?
श्रीरंगम मंदिर लगभग 156 एकड़ में फैला है, जिसमें सात प्राकार (परकोटे) और 21 गोपुरम हैं। इसे विश्व के सबसे बड़े सक्रिय हिंदू मंदिरों में गिना जाता है।
श्रीरंगम में रंगनाथ की प्रतिमा कैसे आई?
कथा के अनुसार श्रीराम ने रंगनाथ का विग्रह विभीषण को दिया था। लंका ले जाते समय विभीषण ने उसे कावेरी के तट पर रखा, और विग्रह वहीं स्थिर हो गया। इसलिए भगवान रंगनाथ का मुख दक्षिण (लंका) की ओर है।
श्रीरंगम में वैकुंठ एकादशी कैसे मनाई जाती है?
मार्गशीर्ष मास में 21 दिनों का उत्सव होता है – 10 दिन पगल पत्तु और 10 दिन रा पत्तु। वैकुंठ एकादशी के दिन 'परमपद वासल' (स्वर्ग द्वार) खोला जाता है, जिससे लाखों भक्त गुजरते हैं।
त्रिची से श्रीरंगम मंदिर कितनी दूर है?
तिरुचिरापल्ली जंक्शन से श्रीरंगम मंदिर लगभग 9 किमी दूर है। बस, ऑटो या टैक्सी से 20-30 मिनट लगते हैं।

श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, श्रीरंगम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook