फुल्लरा देवी मंदिर पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में लाभपुर कस्बे के पास स्थित अट्टहास शक्तिपीठ है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ सती के होंठ गिरे थे। यहाँ की शक्ति फुल्लरा और भैरव विश्वेश हैं। “अट्टहास” का अर्थ है ज़ोर की हँसी – होंठों से जुड़ा होने के कारण इस पीठ का यह नाम माना जाता है। बीरभूम ज़िले के पाँच शक्तिपीठों में यह एक प्रमुख स्थान है।
देवी का स्वरूप
मंदिर में माँ फुल्लरा की मानवाकार प्रतिमा नहीं है। गर्भगृह में होंठ के आकार की एक बड़ी शिला की पूजा होती है, जिसे सिंदूर, लाल वस्त्र और फूलों से सजाया जाता है। भक्त इसी शिला को देवी का साक्षात स्वरूप मानते हैं। मंदिर के पास भैरव विश्वेश का शिव मंदिर है, और शक्तिपीठ की परंपरा के अनुसार देवी के दर्शन के साथ भैरव के दर्शन भी किए जाते हैं।
देवीदह सरोवर
मंदिर के पास एक पवित्र तालाब है, जिसे देवीदह कहा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार श्रीराम ने रावण से युद्ध से पहले देवी दुर्गा की जो पूजा (अकाल बोधन) की थी, उसके लिए हनुमान जी इसी सरोवर से 108 नीलकमल लाए थे। श्रद्धालु सरोवर के जल को पवित्र मानते हैं। मंदिर का परिवेश ग्रामीण और शांत है, पुराने वृक्षों से घिरा हुआ, जहाँ साधक ध्यान और पूजा के लिए आते हैं।
प्रमुख उत्सव
- माघी पूर्णिमा मेला: फुल्लरा का सबसे बड़ा मेला, जिसमें आसपास के ज़िलों से श्रद्धालु आते हैं।
- काली पूजा और दुर्गा पूजा पर विशेष आराधना।
- नवरात्रि और अमावस्या की रातों में विशेष पूजा।
बीरभूम शक्तिपीठ यात्रा
बीरभूम में अट्टहास (लाभपुर), नंदीपुर (सैंथिया), कंकालीतला (बोलपुर), बक्रेश्वर और नलहाटी – ये पाँच शक्तिपीठ माने जाते हैं, और प्रसिद्ध तारापीठ भी इसी ज़िले में है। लाभपुर से सैंथिया का नंदिकेश्वरी मंदिर लगभग 30 किमी है, इसलिए दोनों के दर्शन एक ही दिन में किए जा सकते हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 8:00 बजे तक
समय स्थानीय रूप से बदल सकता है; मेले और अमावस्या पर पूजा देर तक चलती है।
मुख्य आकर्षण
- माँ फुल्लरा – होंठ के आकार की बड़ी शिला के रूप में पूजित।
- देवीदह सरोवर – मंदिर के पास पवित्र तालाब।
- विश्वेश भैरव का शिव मंदिर।
- शांत ग्रामीण परिवेश और पुराने वृक्ष।
- बीरभूम के अन्य शक्तिपीठ – नंदीपुर, कंकालीतला, बक्रेश्वर, नलहाटी।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: लाभपुर रेलवे स्टेशन (लगभग 2 किमी) – अहमदपुर–कटवा रेल लाइन पर; अहमदपुर जंक्शन से जुड़ा।
- सड़क मार्ग: बोलपुर से लगभग 30 किमी, सिउड़ी से लगभग 40 किमी; बस और टोटो उपलब्ध।
- हवाई मार्ग: काज़ी नज़रुल इस्लाम हवाई अड्डा, दुर्गापुर (लगभग 80 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अट्टहास शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
अट्टहास शक्तिपीठ कहाँ है?
फुल्लरा मंदिर में देवी का स्वरूप कैसा है?
बोलपुर से फुल्लरा मंदिर कितनी दूर है?
फुल्लरा मंदिर में मेला कब लगता है?
फुल्लरा देवी मंदिर (अट्टहास शक्तिपीठ), लाभपुर बीरभूम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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कोलकाता, पश्चिम बंगाल कालीघाट काली मंदिर, कोलकाता माँ काली (कालिका); भैरव – नकुलेश्वर
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल बक्रेश्वर (वक्रेश्वर) शक्तिपीठ, बीरभूम पश्चिम बंगाल माँ महिषमर्दिनी; भैरव – वक्रनाथ (बक्रेश्वर शिव)
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल कंकालीतला शक्तिपीठ, बोलपुर बीरभूम माँ कंकाली (देवगर्भा); भैरव – रुरु
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पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल बर्गभीमा मंदिर (विभाष शक्तिपीठ), तमलुक माँ बर्गभीमा (कपालिनी / भीमरूपा); भैरव – सर्वानंद
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मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल किरीटेश्वरी शक्तिपीठ, मुर्शिदाबाद माँ किरीटेश्वरी (विमला); भैरव – संवर्त
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल नलातेश्वरी शक्तिपीठ, नलहाटी बीरभूम माँ नलातेश्वरी (कालिका); भैरव – योगेश