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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

नंदिकेश्वरी शक्तिपीठ (नंदीपुर), सैंथिया बीरभूम

Nandikeshwari Shaktipeeth (Nandipur), Sainthia Birbhum

बीरभूम, पश्चिम बंगाल माँ नंदिकेश्वरी (नंदिनी); भैरव – नंदिकेश्वर निःशुल्क प्रवेश

नंदिकेश्वरी मंदिर पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में सैंथिया नगर में स्थित नंदीपुर शक्तिपीठ है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार नंदीपुर में सती का कंठहार (गले का हार) गिरा था। यहाँ की शक्ति नंदिनी और भैरव नंदिकेश्वर हैं। मंदिर सैंथिया रेलवे स्टेशन के बहुत पास है, इसलिए यह बीरभूम के सबसे आसानी से पहुँचने वाले शक्तिपीठों में से एक है।

वट वृक्ष के नीचे देवी

मंदिर एक विशाल प्राचीन वट (बरगद) वृक्ष के नीचे बना है, जिसकी जटाएँ पूरे परिसर पर छाया करती हैं। गर्भगृह में देवी की मानवाकार प्रतिमा के स्थान पर सिंदूर से रंगी एक पवित्र शिला की पूजा होती है। भक्त वृक्ष की शाखाओं पर मन्नत के धागे बाँधते हैं और मनोकामना पूरी होने पर उन्हें खोलने आते हैं। परिसर में भैरव नंदिकेश्वर का शिव मंदिर और अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी हैं।

नंदीपुर नाम

प्राचीन ग्रंथों में वर्णित नंदीपुर को आज का सैंथिया माना जाता है। शक्ति के नाम “नंदिनी” और भैरव “नंदिकेश्वर” से ही देवी को नंदिकेश्वरी कहा जाता है। नगर के बीच होने के कारण यहाँ रोज़ स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, और ट्रेन से गुज़रने वाले बहुत से यात्री भी रुककर दर्शन करते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • काली पूजा (कार्तिक अमावस्या): रात भर पूजा, सबसे बड़ा उत्सव।
  • दुर्गा पूजा और नवरात्रि में विशेष आराधना।
  • हर अमावस्या और मंगलवार-शनिवार को अधिक भीड़।

आसपास के दर्शन

सैंथिया से तारापीठ लगभग 40 किमी और लाभपुर का फुल्लरा (अट्टहास) शक्तिपीठ लगभग 30 किमी दूर है। सिउड़ी होकर बक्रेश्वर और बोलपुर होकर कंकालीतला भी पहुँचा जा सकता है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 8:30 बजे तक

काली पूजा और अमावस्या पर मंदिर देर रात तक खुला रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ नंदिकेश्वरी – सिंदूर से रंगी पवित्र शिला।
  • विशाल वट वृक्ष – मंदिर के ऊपर छाया देता प्राचीन पेड़।
  • नंदिकेश्वर भैरव का शिव मंदिर।
  • मयूराक्षी नदी – सैंथिया के पास।
  • तारापीठ (लगभग 40 किमी) और फुल्लरा (लगभग 30 किमी)।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: सैंथिया जंक्शन (लगभग 500 मीटर) – हावड़ा और सियालदह से कई ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: सिउड़ी से लगभग 20 किमी, बोलपुर से लगभग 35 किमी।
  • हवाई मार्ग: काज़ी नज़रुल इस्लाम हवाई अड्डा, दुर्गापुर (लगभग 100 किमी) या कोलकाता (लगभग 200 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नंदीपुर शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार नंदीपुर में सती का कंठहार (गले का हार) गिरा था। यहाँ की शक्ति नंदिनी और भैरव नंदिकेश्वर हैं।
नंदिकेश्वरी मंदिर कहाँ है?
नंदिकेश्वरी मंदिर पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में सैंथिया नगर में, रेलवे स्टेशन के बहुत पास स्थित है। प्राचीन ग्रंथों का नंदीपुर यही स्थान माना जाता है।
सैंथिया स्टेशन से नंदिकेश्वरी मंदिर कितनी दूर है?
सैंथिया जंक्शन से नंदिकेश्वरी मंदिर लगभग 500 मीटर दूर है, पैदल 5-10 मिनट में पहुँचा जा सकता है।
नंदिकेश्वरी मंदिर में देवी का स्वरूप क्या है?
यहाँ सिंदूर से रंगी एक पवित्र शिला की देवी रूप में पूजा होती है, जो एक विशाल वट वृक्ष के नीचे स्थित है।
नंदिकेश्वरी मंदिर का प्रमुख उत्सव कौन सा है?
काली पूजा (कार्तिक अमावस्या) सबसे बड़ा उत्सव है। दुर्गा पूजा और नवरात्रि में भी विशेष पूजा और भीड़ रहती है।

नंदिकेश्वरी शक्तिपीठ (नंदीपुर), सैंथिया बीरभूम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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