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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

रत्नावली शक्तिपीठ, खानाकुल हुगली

Ratnavali Shaktipeeth, Khanakul Hooghly

हुगली, पश्चिम बंगाल माँ कुमारी (रत्नावली); भैरव – शिव निःशुल्क प्रवेश

रत्नावली शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले में खानाकुल क्षेत्र में रत्नाकर नदी के तट पर स्थित माना जाता है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ सती का दायाँ कंधा गिरा था। यहाँ की शक्ति कुमारी और भैरव शिव हैं। “रत्नावली” का अर्थ है रत्नों की माला – स्थानीय परंपरा इस नाम को पास बहने वाली रत्नाकर नदी से भी जोड़ती है।

कुमारी रूप में देवी

यहाँ देवी की आराधना कुमारी रूप में होती है। शाक्त परंपरा में कुमारी को आदिशक्ति का सबसे पवित्र और निर्मल रूप माना जाता है – नवरात्रि में होने वाला कुमारी पूजन इसी भाव से जुड़ा है। बंगाल में दुर्गा पूजा की अष्टमी पर कुमारी पूजा की प्रसिद्ध परंपरा है, और रत्नावली पीठ में भी इस अवसर पर विशेष पूजा होती है। मंदिर के पास भैरव शिव का मंदिर है।

खानाकुल क्षेत्र

खानाकुल हुगली ज़िले के आरामबाग उपखंड का नदियों से घिरा ग्रामीण क्षेत्र है। इसी क्षेत्र का राधानगर गाँव महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय का जन्मस्थान है। हुगली ज़िले में ही प्रसिद्ध तारकेश्वर शिव मंदिर भी है, जहाँ श्रावण में लाखों काँवड़िये जल चढ़ाते हैं – रत्नावली की यात्रा को इसके साथ जोड़ा जा सकता है।

प्रमुख उत्सव

  • दुर्गा पूजा – अष्टमी पर कुमारी पूजा।
  • काली पूजा (कार्तिक अमावस्या) पर रात भर पूजा।
  • नवरात्रि में शक्तिपीठ की विशेष आराधना।

यात्रा सुझाव

खानाकुल के लिए आरामबाग सबसे पास का बड़ा नगर है, जहाँ ठहरने की सुविधा मिल जाती है। मानसून में इस क्षेत्र की नदियों में बाढ़ आ जाती है, इसलिए अक्टूबर से मार्च के बीच यात्रा करना बेहतर है। गाँव के रास्ते के लिए स्थानीय लोगों से जानकारी लेना अच्छा रहता है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 8:00 बजे तक

गाँव का मंदिर होने के कारण समय स्थानीय रूप से बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ कुमारी (रत्नावली) का मंदिर।
  • शिव भैरव का मंदिर।
  • रत्नाकर नदी का तट।
  • राधानगर – राजा राममोहन राय का जन्मस्थान (खानाकुल क्षेत्र)।
  • तारकेश्वर मंदिर, हुगली।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: आरामबाग या तारकेश्वर रेलवे स्टेशन – हावड़ा से ट्रेनें; वहाँ से बस या टैक्सी।
  • सड़क मार्ग: आरामबाग से लगभग 20 किमी; कोलकाता से लगभग 100 किमी।
  • हवाई मार्ग: कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 110 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रत्नावली शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार रत्नावली पीठ में सती का दायाँ कंधा गिरा था। यहाँ की शक्ति कुमारी और भैरव शिव हैं।
रत्नावली शक्तिपीठ कहाँ है?
रत्नावली शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले में खानाकुल क्षेत्र में रत्नाकर नदी के तट पर माना जाता है।
रत्नावली नाम का क्या अर्थ है?
रत्नावली का अर्थ है रत्नों की माला। स्थानीय परंपरा इस नाम को पास बहने वाली रत्नाकर नदी से भी जोड़ती है।
कोलकाता से खानाकुल कैसे पहुँचें?
हावड़ा से आरामबाग या तारकेश्वर तक ट्रेन लेकर वहाँ से बस या टैक्सी द्वारा खानाकुल पहुँचा जा सकता है। सड़क से दूरी लगभग 100 किमी है।
खानाकुल और किस बात के लिए प्रसिद्ध है?
खानाकुल क्षेत्र का राधानगर गाँव समाज सुधारक राजा राममोहन राय का जन्मस्थान है।

रत्नावली शक्तिपीठ, खानाकुल हुगली इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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