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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

भ्रामरी देवी मंदिर (त्रिस्रोता शक्तिपीठ), जलपाईगुड़ी

Bhramari Devi Temple (Trisrota Shaktipeeth), Jalpaiguri

जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल माँ भ्रामरी; भैरव – अंबर निःशुल्क प्रवेश

भ्रामरी देवी मंदिर उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी ज़िले में तीस्ता नदी के क्षेत्र में स्थित त्रिस्रोता शक्तिपीठ माना जाता है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ सती का बायाँ पैर गिरा था। यहाँ की शक्ति भ्रामरी और भैरव अंबर हैं। “त्रिस्रोता” का अर्थ है तीन धाराओं वाली – इसे तीस्ता नदी का प्राचीन नाम माना जाता है, और उसी के नाम से इस पीठ का नाम पड़ा। मंदिर का स्थान बोदा / सालबाड़ी क्षेत्र में बताया जाता है।

भ्रामरी देवी की कथा

देवी भागवत पुराण और दुर्गा सप्तशती के उत्तर भाग में देवी के भ्रामरी रूप का वर्णन है। कथा के अनुसार अरुण नाम के असुर को वरदान था कि कोई दो या चार पैरों वाला प्राणी उसे नहीं मार सकेगा। तब देवी ने असंख्य भ्रमरों (भौंरों) का रूप धारण किया – भौंरों के छह पैर होते हैं – और उस असुर का अंत किया। इसी से देवी भ्रामरी कहलाईं। भक्त मानते हैं कि माँ भ्रामरी संकटों के झुंड को भी उसी तरह नष्ट कर देती हैं।

उत्तर बंगाल का शक्ति स्थल

पश्चिम बंगाल के अधिकतर शक्तिपीठ दक्षिणी ज़िलों में हैं, जबकि भ्रामरी देवी उत्तर बंगाल का प्रमुख शक्तिपीठ है। हिमालय की तलहटी, तीस्ता नदी और डुआर्स के हरे-भरे जंगलों के बीच बसा यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से भी बहुत सुंदर है। जलपाईगुड़ी ज़िले में ही प्राचीन जल्पेश्वर शिव मंदिर भी है, जिसके नाम से ज़िले का नाम जोड़ा जाता है।

प्रमुख उत्सव

  • दुर्गा पूजा और नवरात्रि में विशेष आराधना।
  • काली पूजा (कार्तिक अमावस्या) पर रात भर पूजा।
  • मंगलवार और शनिवार को स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़।

यात्रा सुझाव

मंदिर तक पहुँचने के लिए सिलीगुड़ी या जलपाईगुड़ी को आधार बनाना सुविधाजनक है। स्थानीय लोगों से मंदिर का सही रास्ता पूछ लेना अच्छा रहता है, क्योंकि यह ग्रामीण क्षेत्र में है। मानसून (जून–सितंबर) में तीस्ता क्षेत्र में भारी वर्षा होती है, इसलिए अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए बेहतर है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 8:00 बजे तक

समय स्थानीय रूप से बदल सकता है; नवरात्रि में पूजा देर तक चलती है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ भ्रामरी का मंदिर।
  • अंबर भैरव का शिव मंदिर।
  • तीस्ता नदी – जिसके नाम से पीठ त्रिस्रोता कहलाता है।
  • जल्पेश्वर शिव मंदिर, मयनागुड़ी (जलपाईगुड़ी ज़िला)।
  • गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान और डुआर्स क्षेत्र।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: जलपाईगुड़ी या न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) जंक्शन – देश के बड़े शहरों से ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: जलपाईगुड़ी नगर से बस या टैक्सी; सिलीगुड़ी से लगभग 45 किमी।
  • हवाई मार्ग: बागडोगरा हवाई अड्डा, सिलीगुड़ी (लगभग 60 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

त्रिस्रोता शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार त्रिस्रोता पीठ में सती का बायाँ पैर गिरा था। यहाँ की शक्ति भ्रामरी और भैरव अंबर हैं।
त्रिस्रोता शक्तिपीठ कहाँ है?
त्रिस्रोता शक्तिपीठ उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी ज़िले में तीस्ता नदी के क्षेत्र में माना जाता है। 'त्रिस्रोता' (तीन धाराओं वाली) तीस्ता नदी का ही प्राचीन नाम माना जाता है।
देवी का नाम भ्रामरी क्यों पड़ा?
देवी भागवत और दुर्गा सप्तशती से जुड़ी कथा के अनुसार देवी ने भ्रमरों (भौंरों) का रूप धारण करके अरुण नाम के असुर का वध किया था, इसलिए वे भ्रामरी कहलाईं।
सिलीगुड़ी से भ्रामरी देवी मंदिर कैसे पहुँचें?
सिलीगुड़ी से जलपाईगुड़ी होकर बस या टैक्सी द्वारा मंदिर पहुँचा जा सकता है। सड़क से लगभग 1-1.5 घंटे लगते हैं।
भ्रामरी देवी मंदिर के पास क्या देखें?
जलपाईगुड़ी ज़िले में जल्पेश्वर शिव मंदिर, गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान और डुआर्स के चाय बागान प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।

भ्रामरी देवी मंदिर (त्रिस्रोता शक्तिपीठ), जलपाईगुड़ी इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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