मंगलचंडी मंदिर पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान ज़िले में अजय नदी के तट पर बसे गाँव कोग्राम में स्थित शक्तिपीठ है, जिसे प्राचीन उजानी माना जाता है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार उजानी में सती की दायीं कलाई गिरी थी। यहाँ की शक्ति मंगल चंडिका और भैरव कपिलांबर हैं। माँ मंगलचंडी बंगाल की सबसे लोकप्रिय लोक-देवियों में हैं, जिनकी पूजा घर-घर में होती है।
माँ मंगलचंडी
“मंगलचंडी” का अर्थ है – मंगल (कल्याण) करने वाली चंडी। बंगाल में महिलाएँ परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की रक्षा और सौभाग्य के लिए मंगलवार को मंगलचंडी व्रत रखती हैं। मध्यकालीन बंगाली साहित्य के चंडीमंगल काव्यों में – जिनमें कवि मुकुंदराम चक्रवर्ती का काव्य प्रसिद्ध है – माँ चंडी की महिमा और उनके भक्तों की कथाएँ गाई गई हैं। इन कथाओं में उजानी नगर का भी उल्लेख आता है।
मंदिर और परिवेश
मंदिर अजय नदी के किनारे शांत ग्रामीण परिवेश में है। गर्भगृह में माँ मंगल चंडिका की पूजा होती है, और पास में भैरव कपिलांबर का शिव मंदिर है। मंगलवार और विशेष तिथियों पर आसपास के गाँवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नदी के तट से सूर्यास्त का दृश्य मनमोहक होता है।
प्रमुख उत्सव
- मंगलवार की पूजा: हर मंगलवार विशेष पूजा और मंगलचंडी व्रत।
- दुर्गा पूजा और काली पूजा पर विशेष आराधना।
- नवरात्रि में शक्तिपीठ की पूजा और हवन।
यात्रा सुझाव
कोग्राम पहुँचने के लिए हावड़ा–बोलपुर रेल लाइन के गुसकरा स्टेशन पर उतरकर बस या टैक्सी ली जा सकती है। बर्धमान के अन्य दो शक्तिपीठ – बहुला (केतुग्राम) और युगाद्या (क्षीरग्राम) – भी पास में हैं। बोलपुर होकर बीरभूम के शक्तिपीठों की यात्रा भी साथ जोड़ी जा सकती है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 8:00 बजे तक
मंगलवार को विशेष पूजा और अधिक भीड़ रहती है।
मुख्य आकर्षण
- माँ मंगल चंडिका का मंदिर।
- कपिलांबर भैरव का शिव मंदिर।
- अजय नदी का तट।
- शांत ग्रामीण परिवेश।
- पास के शक्तिपीठ – बहुला और युगाद्या।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: गुसकरा रेलवे स्टेशन – हावड़ा–बोलपुर लाइन पर; वहाँ से बस या टैक्सी द्वारा कोग्राम।
- सड़क मार्ग: गुसकरा से लगभग 15 किमी, बर्धमान से लगभग 45 किमी; कोलकाता से लगभग 160 किमी।
- हवाई मार्ग: काज़ी नज़रुल इस्लाम हवाई अड्डा, दुर्गापुर (लगभग 70 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उजानी शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
उजानी शक्तिपीठ कहाँ है?
मंगलचंडी की पूजा कब होती है?
गुसकरा से कोग्राम कितनी दूर है?
चंडीमंगल काव्य का मंगलचंडी से क्या संबंध है?
मंगलचंडी शक्तिपीठ (उजानी), कोग्राम पूर्व बर्धमान इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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कोलकाता, पश्चिम बंगाल कालीघाट काली मंदिर, कोलकाता माँ काली (कालिका); भैरव – नकुलेश्वर
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल बक्रेश्वर (वक्रेश्वर) शक्तिपीठ, बीरभूम पश्चिम बंगाल माँ महिषमर्दिनी; भैरव – वक्रनाथ (बक्रेश्वर शिव)
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल कंकालीतला शक्तिपीठ, बोलपुर बीरभूम माँ कंकाली (देवगर्भा); भैरव – रुरु
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पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल बर्गभीमा मंदिर (विभाष शक्तिपीठ), तमलुक माँ बर्गभीमा (कपालिनी / भीमरूपा); भैरव – सर्वानंद
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मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल किरीटेश्वरी शक्तिपीठ, मुर्शिदाबाद माँ किरीटेश्वरी (विमला); भैरव – संवर्त
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बीरभूम, पश्चिम बंगाल नलातेश्वरी शक्तिपीठ, नलहाटी बीरभूम माँ नलातेश्वरी (कालिका); भैरव – योगेश