मैं आया हूँ शरण तेरी, मुझे अब तुम संभालोगे ।
न दुनिया जीने देती ही , मुझे अब तुम संभालोगे ॥

न शक्ति है मेरे तन में , न भक्ति है मेरे मन में ।
ओ बाबा भक्ति की ज्योति, बताओ कब जगाओगे ॥
मैं आया हूँ शरण तेरी…

मेरे न भाई बंधू हैं, न मेरा कोई हितकारी ।
प्रभु तर दास जायेगा, गले से जब लगाओगे ॥
मैं आया हूँ शरण तेरी…

तू मेरा है – हूँ मैं तेरा, मुझे अपना बना लो तूम ।
जपे तेरा नाम ये ‘गौरी’, प्रभु तुम कब बुलाओगे ॥
मैं आया हूँ शरण तेरी…

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