अब या तनुहिं राखि कहा कीजै।
सुनि री सखी, स्यामसुंदर बिनु बांटि विषम विष पीजै॥
के गिरिए गिरि चढ़ि सुनि सजनी, सीस संकरहिं दीजै।
के दहिए दारुन दावानल जाई जमुन धंसि लीजै॥
दुसह बियोग अरी, माधव को तनु दिन-हीं-दिन छीजै।
सूर, स्याम अब कबधौं मिलिहैं, सोचि-सोचि जिय जीजै॥

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

गायत्री जयंती

सोमवार, 17 जून 2024

गायत्री जयंती
निर्जला एकादशी

मंगलवार, 18 जून 2024

निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ पूर्णिमा

शनिवार, 22 जून 2024

ज्येष्ठ पूर्णिमा
संत कबीर दास जयंती

शनिवार, 22 जून 2024

संत कबीर दास जयंती
संकष्टी चतुर्थी

मंगलवार, 25 जून 2024

संकष्टी चतुर्थी
योगिनी एकादशी

मंगलवार, 02 जुलाई 2024

योगिनी एकादशी

संग्रह