तर्ज़ :- सावन का महीना पवन करे सोर

शिव गौरां के मिलन का उत्सव,
मिलकर सब मना लो,
सावन के महीने में, भोले के दर्शन पा लो……

देवों के हैं देव ये तो, भोले हैं भंडारी,
गौरां जी के संग में, विराजें त्रिपुरारी,
शरण में आ के इनकी,
चरणों में ध्यान लगा लो,
सावन के महीने में…

भक्ति की ज्योती अपने मन में जलायो,
जय हो भोलेनाथ जय हो महादेव गायो,
होंगी मुरादें पूरी,
तुम हमसे ये लिखवा लो,
सावन के महीने में…..

भक्तों के मन में क्या है, सब जानते हैं,
बोले बिना ही प्रभू, पहचानते हैं,
डग मग नैया डोले (तो),
शम्भु को मीत बना लो,
सावन के महीने में….

बिना शिव की मर्जी के, फूल खिले ना,
इनके इशारे बिना, पत्ता भी हिले ना,
“सदावर्तीया” शिव शंकर को,
मन में तुम बसा लो,
सावन के महीने में…..

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