पुरुहूतिका देवी मंदिर आंध्र प्रदेश के काकीनाडा ज़िले के प्राचीन नगर पीठापुरम में, श्री कुक्कुटेश्वर स्वामी मंदिर परिसर के भीतर स्थित है। आदि शंकराचार्य से जुड़े अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र में “पीठिकायां पुरुहूतिका” कहा गया है – इस क्रम में यह अष्टादश महाशक्तिपीठों में दसवाँ पीठ है। पीठापुरम का उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है, और यह नगर गयासुर की कथा से जुड़ा पाद गया क्षेत्र भी है, इसलिए यहाँ शक्ति, शिव और पितृ-तीर्थ तीनों की परंपरा एक साथ मिलती है।
शक्तिपीठ की कथा
दक्ष यज्ञ में सती के देह-त्याग के बाद जब शिव उनका शरीर लेकर विचरण करने लगे, तब विष्णु के सुदर्शन चक्र से सती के अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे और वहाँ शक्तिपीठ बने। पीठापुरम में कौन सा अंग गिरा, इस पर स्रोत एकमत नहीं हैं – अधिकतर स्थानीय परंपराएँ सती का पीठ भाग गिरने की बात कहती हैं और नगर का नाम भी इसी से जोड़ती हैं, जबकि कुछ स्रोत बायाँ हाथ बताते हैं। यहाँ देवी पुरुहूतिका नाम से पूजी जाती हैं।
पाद गया क्षेत्र
कथा के अनुसार गयासुर का विशाल शरीर तीन स्थानों तक फैला था – सिर बिहार के गया में, नाभि ओडिशा के जाजपुर (नाभि गया) में और चरण पीठापुरम में। इसी कारण पीठापुरम पाद गया कहलाता है। मंदिर के पास के पाद गया सरोवर में श्रद्धालु स्नान करते हैं और पितरों के लिए पिंडदान व तर्पण करते हैं।
कुक्कुटेश्वर स्वामी मंदिर
परिसर के मुख्य देवता श्री कुक्कुटेश्वर स्वामी हैं – कुक्कुट (मुर्गे) रूप से जुड़े शिव, जिनका स्वयंभू स्फटिक लिंग माना जाता है। उनके साथ राजराजेश्वरी देवी विराजती हैं, और परिसर का एक शिला से बना नंदी प्रसिद्ध है। माँ पुरुहूतिका का मंदिर इसी परिसर में है, इसलिए भक्त शिव और शक्ति दोनों के दर्शन एक साथ करते हैं। पीठापुरम को दत्त परंपरा के संत श्रीपाद श्रीवल्लभ की जन्मभूमि भी माना जाता है।
प्रमुख उत्सव
- शरद नवरात्रि: माँ पुरुहूतिका के विशेष अलंकार और पूजा।
- महाशिवरात्रि और कार्तिक मास में कुक्कुटेश्वर स्वामी के दर्शन के लिए भीड़।
- माघ बहुल एकादशी पर कुक्कुटेश्वर स्वामी का वार्षिक उत्सव।
- दत्त जयंती पर पीठापुरम में दत्त भक्तों का आगमन।
यात्रा क्रम
पीठापुरम काकीनाडा से लगभग 16 किमी दूर है। आंध्र प्रदेश के अन्य अष्टादश पीठों – श्रीशैलम की भ्रमरांबिका और द्राक्षारामम की माणिक्यांबा – के साथ यात्री प्रायः पीठापुरम की यात्रा जोड़ते हैं; द्राक्षारामम यहाँ से अपेक्षाकृत पास है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सामान्यतः सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 और शाम लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक
नवरात्रि, महाशिवरात्रि और कार्तिक मास में समय बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- माँ पुरुहूतिका देवी – अष्टादश महाशक्तिपीठों में से एक, कुक्कुटेश्वर मंदिर परिसर में।
- श्री कुक्कुटेश्वर स्वामी – स्वयंभू स्फटिक लिंग के रूप में शिव।
- एक शिला का नंदी – परिसर की प्रसिद्ध प्रतिमा।
- पाद गया सरोवर – स्नान और पितृ कर्म का स्थान।
- श्रीपाद श्रीवल्लभ (दत्त परंपरा) से जुड़ा पीठापुरम नगर।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: पीठापुरम रेलवे स्टेशन – विशाखापत्तनम-विजयवाड़ा मार्ग पर; सामलकोट जंक्शन भी पास है।
- सड़क मार्ग: काकीनाडा से लगभग 16 किमी, राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी) से लगभग 65 किमी।
- हवाई मार्ग: राजमुंदरी हवाई अड्डा सबसे निकट है; विशाखापत्तनम हवाई अड्डा लगभग 140 किमी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पुरुहूतिका देवी किस शक्तिपीठ समूह में आती हैं?
पीठापुरम में सती का कौन सा अंग गिरा था?
पीठापुरम को पाद गया क्यों कहते हैं?
पुरुहूतिका देवी का मंदिर कहाँ स्थित है?
पीठापुरम के प्रमुख उत्सव कौन से हैं?
पुरुहूतिका देवी मंदिर, पीठापुरम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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Kakinada, आंध्र प्रदेश श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी मंदिर, तोलि तिरुपति (चदलाड) श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी (भगवान वेंकटेश्वर का स्वरूप), श्रीदेवी और भूदेवी सहित
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