कैंप हनुमान मंदिर गुजरात के अहमदाबाद नगर में शाहीबाग के सैन्य छावनी (कैंटोनमेंट) क्षेत्र में स्थित हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर है। भक्तों की मान्यता है कि यहाँ की हनुमान प्रतिमा स्वयंभू (स्वयं प्रकट) है। सेना के बीच स्थित होने के कारण सैनिकों और उनके परिवारों की इस मंदिर में विशेष आस्था है, और यह अहमदाबाद के सबसे लोकप्रिय हनुमान मंदिरों में गिना जाता है।
मंदिर का इतिहास
मंदिर की आयु को लेकर अलग-अलग अनुमान मिलते हैं – इसे लगभग दो से ढाई सदी पुराना बताया जाता है। परंपरा मंदिर को पंडित गजानन प्रसाद से जोड़ती है, जो हनुमान जी के अनन्य भक्त थे; कुछ विवरणों के अनुसार वे यहाँ सेवा-पूजा करते थे। आगे चलकर मंदिर का प्रबंध श्री हनुमानजी मंदिर कैंप ट्रस्ट को सौंपा गया, जो आज भी इसका संचालन करता है।
छावनी और मंदिर
मंदिर की भूमि सेना के क्षेत्र में है। 2021 में ट्रस्टियों ने सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण मंदिर को साबरमती रिवरफ्रंट पर ले जाने का प्रस्ताव रखा था, पर पुजारियों और भक्तों के विरोध के बाद यह मामला गुजरात उच्च न्यायालय तक पहुँचा। बाद की समाचार रिपोर्टों के अनुसार मंदिर अपने मूल स्थान पर छावनी में ही बना हुआ है।
दर्शन और उत्सव
- मंगलवार और शनिवार: सबसे अधिक भीड़; मंदिर देर रात तक खुला रहता है।
- हनुमान जयंती: विशेष श्रृंगार और पूजा; मंदिर के उत्सवों में हनुमान यात्रा भी प्रमुख है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह से रात तक; सामान्य दिनों में लगभग रात 9:00 बजे तक
- मंगलवार और शनिवार: लगभग रात 11:00 बजे तक
मंदिर सेना के छावनी क्षेत्र में है, इसलिए सुरक्षा नियमों का पालन करें।
मुख्य आकर्षण
- स्वयंभू हनुमान प्रतिमा – भक्तों की मान्यता है कि प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई।
- सैन्य छावनी का शांत परिसर – सैनिकों की विशेष आस्था का केंद्र।
- मंगलवार-शनिवार की आरती और भक्तों की भीड़।
- पास में शाहीबाग और सरदार वल्लभभाई पटेल स्मारक।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: मंदिर शाहीबाग के छावनी (कैंटोनमेंट) क्षेत्र में है; शहर से ऑटो, टैक्सी और AMTS बसें।
- रेल मार्ग: अहमदाबाद जंक्शन (कालूपुर) लगभग 6 किमी।
- हवाई मार्ग: सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अहमदाबाद (लगभग 7 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इसे कैंप हनुमान मंदिर क्यों कहते हैं?
कैंप हनुमान मंदिर कितना पुराना है?
मंदिर का संचालन कौन करता है?
कैंप हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए सबसे अच्छा दिन कौन सा है?
क्या मंदिर को कहीं और ले जाने की बात हुई थी?
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