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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

लखेश्वर शिव मंदिर, केरा (कच्छ)

Shiva Temple (Lakheshwar), Kera

Kutch, गुजरात भगवान शिव (लखेश्वर महादेव) निःशुल्क प्रवेश

केरा का शिव मंदिर, जिसे केराकोट का लखेश्वर मंदिर भी कहा जाता है, गुजरात के कच्छ जिले में भुज से लगभग 22 किमी दक्षिण में केरा गाँव में स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। इसे लगभग 10वीं शताब्दी के उत्तरार्ध का माना जाता है (कुछ स्रोत 9वीं से 11वीं शताब्दी बताते हैं) और यह चौलुक्य (सोलंकी) काल में बना माना जाता है। भूकंपों से खंडित होने के बाद भी इसका शिखर और गर्भगृह कच्छ की प्राचीन मंदिर कला का दुर्लभ उदाहरण हैं।

लाखा फुलाणी और कपिलकोट

परंपरा इस मंदिर का श्रेय कच्छ के लोकनायक रा लाखा फुलाणी को देती है, जिनकी राजधानी पास का कपिलकोट मानी जाती है – केरा का पुराना नाम भी यही बताया जाता है और आज वहाँ एक पुराने किले के खंडहर हैं। लाखा फुलाणी का काल विवादित है: परंपरा उन्हें लगभग 9वीं शताब्दी का मानती है, जबकि कुछ ऐतिहासिक अभिलेख उन्हें 13वीं-14वीं शताब्दी में रखते हैं।

मंदिर की स्थापत्य कला

मंदिर का वर्गाकार गर्भगृह छोटा है और उसके चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है, जिसमें पत्थर की दो जालीदार खिड़कियों से प्रकाश आता है। मूल मंडप में से अब केवल उत्तरी दीवार बची है। शिखर के हर मुख पर चैत्य-गवाक्ष शैली की त्रिकोणीय आकृतियाँ हैं, जिनके बीच मानव मूर्तियाँ उकेरी गई हैं। परिसर में यक्ष मूर्तियाँ भी देखी जा सकती हैं।

भूकंप और वर्तमान स्थिति

1819 के कच्छ भूकंप में मंदिर का अधिकांश भाग गिर गया; केवल मुख्य शिखर और गर्भगृह ठीक अवस्था में बचे। 2001 के भुज भूकंप में भी इसे कुछ क्षति पहुँची। आज भी शिखर, गर्भगृह और मूर्तियाँ अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में हैं। यहाँ प्रतिवर्ष एक मेला भी लगता है, जिसमें आसपास के श्रद्धालु आते हैं।

यात्रा क्रम

भुज से सड़क मार्ग द्वारा केरा पहुँचकर मंदिर और कपिलकोट के खंडहर एक साथ देखे जा सकते हैं। भुज में नया स्वामिनारायण मंदिर, आयना महल और हमीरसर झील के दर्शन के साथ यह आधे दिन की यात्रा बन सकती है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: दिन के उजाले में (सुबह से सूर्यास्त तक)

यह एक खंडित प्राचीन मंदिर है; निश्चित पूजा-समय प्रकाशित नहीं मिलते।

मुख्य आकर्षण

  • मुख्य शिखर – हर दिशा में चैत्य-गवाक्ष जैसी आकृतियाँ और उनके बीच मानव मूर्तियाँ।
  • गर्भगृह और प्रदक्षिणा पथ – पत्थर की जालीदार खिड़कियों से प्रकाश।
  • यक्ष मूर्तियाँ परिसर में।
  • पास में कपिलकोट के खंडहर, जिन्हें लाखा फुलाणी की राजधानी माना जाता है।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: भुज से लगभग 22 किमी दक्षिण में केरा गाँव; टैक्सी या निजी वाहन सुविधाजनक।
  • रेल मार्ग: भुज रेलवे स्टेशन।
  • हवाई मार्ग: भुज हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

केरा का शिव मंदिर कितना पुराना है?
इतिहासकार इसे लगभग 10वीं शताब्दी के उत्तरार्ध का मानते हैं; कुछ स्रोत 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच का समय बताते हैं। यह चौलुक्य (सोलंकी) काल में बना माना जाता है।
केरा शिव मंदिर किसने बनवाया?
परंपरा इस मंदिर को कच्छ के लोकनायक रा लाखा फुलाणी से जोड़ती है, जिनकी राजधानी पास का कपिलकोट मानी जाती है। लाखा फुलाणी का काल विवादित है, इसलिए यह श्रेय परंपरा पर आधारित है।
केरा मंदिर खंडित क्यों है?
1819 के कच्छ भूकंप में मंदिर का बड़ा भाग गिर गया, केवल मुख्य शिखर और गर्भगृह ठीक अवस्था में बचे। 2001 के भूकंप में भी इसे कुछ क्षति पहुँची।
केरा शिव मंदिर को और किस नाम से जाना जाता है?
इसे केराकोट का लखेश्वर मंदिर या लखेश्वर महादेव मंदिर भी कहा जाता है।
केरा शिव मंदिर भुज से कितनी दूर है?
केरा गाँव भुज से लगभग 22 किमी दक्षिण में है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

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