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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

कष्टभंजन हनुमान मंदिर, सालंगपुर

Shree Kashtabhanjan Dev Hanumanji Temple, Salangpur

Botad, गुजरात श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी निःशुल्क प्रवेश

श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी मंदिर गुजरात के बोटाद जिले के सालंगपुर (सारंगपुर) गाँव में स्थित हनुमानजी का अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर है। यह स्वामिनारायण संप्रदाय की वडताल गादी के अंतर्गत आता है। ‘कष्टभंजन’ का अर्थ है कष्टों को नष्ट करने वाले – मान्यता है कि यहाँ दर्शन से भक्तों के दुख, भय और बाधाएँ दूर होती हैं। शनिवार और हनुमान जयंती पर गुजरात भर से लाखों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं।

मूर्ति की प्रतिष्ठा की कथा

हनुमानजी की यह मूर्ति भगवान स्वामिनारायण के प्रमुख संत सद्गुरु गोपालानंद स्वामी ने विक्रम संवत 1905 की आश्विन वद पंचमी (लगभग 1848–49 ई.) को प्रतिष्ठित की थी। संप्रदाय की परंपरा के अनुसार प्रतिष्ठा के समय स्वामी जी ने अपनी छड़ी से मूर्ति को स्पर्श किया तो मूर्ति में चेतना आ गई और वह हिलने लगी। इसी कथा से यहाँ संकट निवारण की परंपरा जुड़ी है।

मंदिर और विग्रह

गर्भगृह में घनी मूँछों वाले बलशाली हनुमानजी खड़े हैं, जिनके चरणों के नीचे स्त्री रूप में शनिदेव दबे हुए हैं। चारों ओर नक्काशीदार पत्तियों के बीच वानर सेवक दिखाए गए हैं। इसी स्वरूप के कारण भक्त शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए यहाँ विशेष रूप से आते हैं। मुख्य मंदिर के पास एक अलग मंदिर में भगवान स्वामिनारायण विराजते हैं, जहाँ उनके जीवन से जुड़ी प्रसादी वस्तुएँ रखी हैं। सन 1899 से शास्त्रीजी महाराज ने कुछ समय मंदिर की व्यवस्था सँभाली और उसका जीर्णोद्धार कराया; बाद में वडताल गादी ने परिसर का विस्तार किया।

किंग ऑफ सालंगपुर

मंदिर परिसर में हनुमानजी की 54 फीट ऊँची धातु की प्रतिमा है, जिसे ‘किंग ऑफ सालंगपुर’ कहा जाता है। इसका अनावरण 6 अप्रैल 2023 को हनुमान जयंती के दिन हुआ था और यह लगभग 7 किमी दूर से दिखाई देती है।

शनिवार और उत्सव

  • शनिवार: विशेष पूजा; मानसिक कष्ट या बाधाओं से पीड़ित लोग पूजा के बाद मंदिर की परिक्रमा कर बार-बार दर्शन करते हैं।
  • हनुमान जयंती: सबसे बड़ा उत्सव, विशेष श्रृंगार और भारी भीड़।

इसी गाँव में BAPS स्वामिनारायण मंदिर, सारंगपुर भी है, और पास ही गढ़डा का स्वामिनारायण मंदिर – यात्री प्रायः तीनों के दर्शन एक साथ करते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:30 से रात लगभग 9:00 बजे तक
  • आरती: प्रातः मंगला आरती और संध्या आरती

शनिवार, मंगलवार और हनुमान जयंती पर विशेष भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • कष्टभंजन देव – मूँछों वाले बलशाली हनुमानजी, स्त्री रूप में शनिदेव को चरणों के नीचे दबाए हुए।
  • किंग ऑफ सालंगपुर – 2023 में अनावरित 54 फीट ऊँची धातु की हनुमान प्रतिमा।
  • स्वामिनारायण मंदिर – मुख्य मंदिर के पास, भगवान स्वामिनारायण की प्रसादी वस्तुओं सहित।
  • BAPS स्वामिनारायण मंदिर, सारंगपुर – इसी गाँव में।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: बोटाद से लगभग 12–15 किमी, अहमदाबाद से लगभग 150–160 किमी, भावनगर से लगभग 80 किमी; अहमदाबाद, राजकोट, भावनगर से बसें।
  • रेल मार्ग: बोटाद जंक्शन (लगभग 13 किमी)।
  • हवाई मार्ग: अहमदाबाद या भावनगर हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सालंगपुर हनुमानजी की मूर्ति किसने स्थापित की?
कष्टभंजन देव की मूर्ति भगवान स्वामिनारायण के प्रमुख संत सद्गुरु गोपालानंद स्वामी ने विक्रम संवत 1905 (आश्विन वद 5) में प्रतिष्ठित की थी।
सालंगपुर हनुमानजी के चरणों में कौन है?
मूर्ति में हनुमानजी स्त्री रूप में शनिदेव को अपने चरणों के नीचे दबाए खड़े हैं। इसी कारण भक्त शनि पीड़ा और संकटों से मुक्ति के लिए यहाँ दर्शन करते हैं।
कष्टभंजन नाम का अर्थ क्या है?
कष्टभंजन का अर्थ है 'कष्टों को नष्ट करने वाले'। मान्यता है कि यहाँ दर्शन से भक्तों के दुख और बाधाएँ दूर होती हैं।
सालंगपुर में 54 फीट की हनुमान प्रतिमा कब बनी?
मंदिर परिसर में 54 फीट ऊँची धातु की हनुमान प्रतिमा, जिसे 'किंग ऑफ सालंगपुर' कहा जाता है, 6 अप्रैल 2023 (हनुमान जयंती) को अनावरित की गई। यह कई किलोमीटर दूर से दिखाई देती है।
सालंगपुर मंदिर में शनिवार का क्या महत्व है?
शनिवार को यहाँ विशेष पूजा होती है और मानसिक कष्ट या बाधाओं से पीड़ित लोग दर्शन और परिक्रमा के लिए आते हैं। इस दिन मंदिर में सबसे अधिक भीड़ रहती है।

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