मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

नवलखा मंदिर, घुमली

Navlakha Temple, Ghumli

द्वारका, गुजरात सूर्य देव (मंदिर अब खंडहर अवस्था में) निःशुल्क प्रवेश

नवलखा मंदिर गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में बरडा पहाड़ियों की तलहटी पर बसे प्राचीन नगर घुमली में स्थित सूर्य देव का मंदिर है, जो आज खंडहर अवस्था में है। इसे जेठवा शासकों ने बनवाया था और यह गुजरात का सबसे पुराना सूर्य मंदिर माना जाता है। मारु-गुर्जर (सोलंकी) शैली के इस मंदिर की जगती गुजरात के सभी मंदिरों में सबसे बड़ी है। सक्रिय पूजा भले न होती हो, पर इतिहास और शिल्प में रुचि रखने वाले यात्रियों के लिए यह सौराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण धरोहर स्थलों में से है।

घुमली और जेठवा राजवंश

घुमली 8वीं से 10वीं शताब्दी के मध्य तक पश्चिमी सौराष्ट्र पर राज करने वाले सैंधव राजवंश की राजधानी रहा। बाद में जेठवा राजवंश ने इसे अपनी राजधानी बनाया – 1220 में राणा शियाजी के समय से 1313 तक, जब पराजय के बाद जेठवा शासक राणपुर चले गए। नवलखा मंदिर इसी जेठवा काल की देन है। इसकी तिथि को लेकर स्रोतों में मतभेद है – कुछ इसे 11वीं और कुछ 12वीं शताब्दी का बताते हैं।

मंदिर का स्थापत्य

मंदिर पूर्वमुखी है, जो सूर्य मंदिरों की परंपरा के अनुरूप है। इसकी जगती (आधार चबूतरा) लगभग 45.72 × 30.48 मीटर की है। मंदिर में गर्भगृह, उसके चारों ओर ढका हुआ (सांधार) प्रदक्षिणा पथ और अष्टकोणीय स्तंभों वाला मंडप है। प्रवेश पर कभी एक कीर्ति तोरण था, जो अब नष्ट हो चुका है। मान्यता है कि इसके निर्माण पर नौ लाख की लागत आई थी, इसी से इसका नाम नवलखा पड़ा। मंदिर के बाहर गणेश जी का एक छोटा मंदिर गणेश देरा भी है।

वर्तमान स्थिति

मंदिर लंबे समय से खंडहर अवस्था में है; 1876 के पुराने चित्रों में भी यह टूटा हुआ दिखता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 2011 में इसके पुनर्वास का काम शुरू किया, और गुजरात सरकार के साथ घुमली के ऐतिहासिक स्थलों को सँवारने की परियोजना चल रही है। भ्रमण के समय स्मारक को नुकसान न पहुँचाएँ।

आसपास के दर्शन

  • विकिया वाव: जेठवा शासक विकियाजी की बनवाई विशाल बावड़ी, जिसे गुजरात की सबसे पुरानी और बड़ी बावड़ियों में गिना जाता है।
  • आशापुरा माता मंदिर: बीच की पहाड़ी पर, 1313 की विजय के बाद जाडेजा बामणियाजी द्वारा बनवाया गया।
  • घुमली गणेश, विंध्यवासिनी और सोनकंसारी मंदिर तथा पास का किलेश्वर महादेव।

दर्शन का समय

  • भ्रमण: दिन के उजाले में (लगभग सूर्योदय से सूर्यास्त तक)

यह सक्रिय पूजा वाला मंदिर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर स्थल है।

मुख्य आकर्षण

  • नवलखा मंदिर के खंडहर – गुजरात का सबसे पुराना माना जाने वाला सूर्य मंदिर।
  • विशाल जगती – लगभग 45.72 × 30.48 मीटर, गुजरात के किसी भी मंदिर से बड़ी।
  • नक्काशीदार मंडप और गर्भगृह – मारु-गुर्जर शैली का शिल्प।
  • गणेश देरा – मंदिर के बाहर गणेश जी का छोटा मंदिर।
  • विकिया वाव, आशापुरा माता मंदिर और बरडा पहाड़ियाँ।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: पोरबंदर से लगभग 42 किमी, जामखंभालिया से लगभग 45 किमी; निजी वाहन या टैक्सी सबसे सुविधाजनक।
  • रेल मार्ग: पोरबंदर रेलवे स्टेशन।
  • हवाई मार्ग: पोरबंदर हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नवलखा मंदिर किस देवता का है?
घुमली का नवलखा मंदिर सूर्य देव को समर्पित है और इसे गुजरात का सबसे पुराना सूर्य मंदिर माना जाता है। आज यह खंडहर अवस्था में एक ऐतिहासिक धरोहर स्थल है।
नवलखा मंदिर किसने और कब बनवाया?
इसे जेठवा शासकों ने बनवाया था। इसकी तिथि को लेकर स्रोतों में मतभेद है – कुछ इसे 11वीं और कुछ 12वीं शताब्दी का बताते हैं।
मंदिर का नाम नवलखा क्यों पड़ा?
प्रचलित मान्यता के अनुसार इस मंदिर के निर्माण पर नौ लाख (नवलख) की लागत आई थी, इसी से इसका नाम नवलखा पड़ा।
नवलखा मंदिर की क्या विशेषता है?
इसकी जगती (आधार चबूतरा) लगभग 45.72 × 30.48 मीटर की है, जो गुजरात के किसी भी मंदिर से बड़ी मानी जाती है। मंदिर पूर्वमुखी है और इसमें गर्भगृह, सांधार प्रदक्षिणा पथ तथा अष्टकोणीय स्तंभों वाला मंडप है।
घुमली के पास और क्या देखें?
घुमली में विकिया वाव (प्राचीन बावड़ी), पहाड़ी पर आशापुरा माता मंदिर, गणेश देरा और कई अन्य प्राचीन मंदिरों के अवशेष हैं। यह स्थल बरडा पहाड़ियों की तलहटी में है।

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook