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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

जगन्नाथ मंदिर (जमालपुर), अहमदाबाद

Jagannath Temple, Ahmedabad

Ahmedabad, गुजरात भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा (साथ में हनुमान जी) निःशुल्क प्रवेश

जगन्नाथ मंदिर गुजरात के अहमदाबाद नगर के पुराने हिस्से जमालपुर में स्थित भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा का प्राचीन मंदिर है। परंपरा के अनुसार मंदिर लगभग 450 वर्ष पुराना है। यह मंदिर हर वर्ष आषाढ़ी बीज पर निकलने वाली रथयात्रा के लिए प्रसिद्ध है, जिसे पुरी के बाद देश की सबसे बड़ी रथयात्राओं में गिना जाता है और जिसे गुजरात का लोकोत्सव कहा जाता है।

मंदिर की स्थापना की कथा

मंदिर ट्रस्ट के इतिहास के अनुसार जहाँ आज मंदिर परिसर है, वहाँ कभी साबरमती के किनारे घना वन था। एक घुमक्कड़ साधु हनुमानदासजी यहाँ ठहरे और उन्होंने हनुमान जी (मारुति) की प्रतिमा स्थापित की, जिसकी पूजा आज भी होती है। उनके उत्तराधिकारी सारंगदासजी भगवान जगन्नाथ के भक्त थे। पुरी यात्रा के समय उन्हें स्वप्न में आदेश मिला कि वे अहमदाबाद लौटकर जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के विग्रह स्थापित करें। इसके बाद यह हनुमान मंदिर श्री जगन्नाथजी मंदिर बन गया।

महंत परंपरा और सेवा

सारंगदासजी के बाद बालमुकुंददासजी और फिर नरसिंहदासजी महंत बने। नरसिंहदासजी ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और सदाव्रत शुरू किया, जिसमें बिना भेदभाव के भोजन दिया जाता है। मंदिर की गौशाला भी इसकी सेवा परंपरा का अंग है। उनके बाद सेवादासजी और रामहर्षदासजी महंत रहे। आज मंदिर का संचालन श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट करता है।

आषाढ़ी बीज की रथयात्रा

  • आरंभ: महंत नरसिंहदासजी ने 1878 में रथयात्रा की परंपरा शुरू की।
  • तिथि: हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया, पुरी की रथयात्रा के दिन।
  • पहिंद विधि: यात्रा से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रथ के मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करते हैं।
  • हाथी: परंपरा के अनुसार हाथी सबसे पहले भगवान के दर्शन करते हैं और जुलूस की अगुवाई करते हैं।
  • मार्ग: लगभग 14 किमी; सरसपुर में पड़ाव, जहाँ स्थानीय लोग भक्तों को महाभोज कराते हैं।

आसपास के दर्शन

मंदिर पुराने अहमदाबाद में है, जहाँ से कालूपुर स्वामिनारायण मंदिर, भद्रकाली मंदिर (भद्र किला) और साबरमती रिवरफ्रंट पास हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 4:30 से दोपहर 1:00 बजे तक
  • दोपहर बाद: लगभग 3:00 से रात 9:00 बजे तक

रथयात्रा और उससे पहले के दिनों में समय बदलता है।

मुख्य आकर्षण

  • जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के विग्रह।
  • हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा – हनुमानदासजी द्वारा स्थापित मानी जाती है।
  • आषाढ़ी बीज की रथयात्रा – पुरी के बाद देश की सबसे बड़ी रथयात्राओं में।
  • गौशाला और सदाव्रत – मंदिर की सेवा परंपरा।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: मंदिर पुराने अहमदाबाद के जमालपुर क्षेत्र में है; ऑटो, टैक्सी और AMTS/BRTS बसें आसानी से मिलती हैं।
  • रेल मार्ग: अहमदाबाद जंक्शन (कालूपुर) लगभग 3 किमी।
  • हवाई मार्ग: सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 12 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अहमदाबाद की रथयात्रा कब निकलती है?
रथयात्रा हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (आषाढ़ी बीज) को निकलती है, उसी दिन जब पुरी में रथयात्रा होती है।
अहमदाबाद में रथयात्रा कब से निकल रही है?
मंदिर के महंत नरसिंहदासजी ने 1878 में रथयात्रा की परंपरा शुरू की। तब से यह हर वर्ष निकलती है।
पहिंद विधि क्या है?
रथयात्रा शुरू होने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रथ के मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करते हैं। इसे पहिंद विधि कहते हैं।
जगन्नाथ मंदिर अहमदाबाद की स्थापना किसने की?
मंदिर की परंपरा के अनुसार साधु हनुमानदासजी ने यहाँ हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की। उनके उत्तराधिकारी सारंगदासजी को पुरी यात्रा के समय स्वप्न में आदेश मिला, जिसके बाद उन्होंने जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के विग्रह स्थापित किए।
रथयात्रा का मार्ग कितना लंबा है?
रथयात्रा लगभग 14 किमी लंबे मार्ग से पुराने शहर से होकर निकलती है और सरसपुर में रुकती है, जहाँ स्थानीय लोग भक्तों के लिए भोजन (महाभोज) की व्यवस्था करते हैं।

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