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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री स्वामिनारायण मंदिर (कालूपुर), अहमदाबाद

Shree Swaminarayan Mandir, Kalupur, Ahmedabad

Ahmedabad, गुजरात श्री नरनारायण देव, राधाकृष्ण (साथ में धर्मदेव, भक्तिमाता और हरिकृष्ण) निःशुल्क प्रवेश

श्री स्वामिनारायण मंदिर, कालूपुर गुजरात के अहमदाबाद नगर के पुराने हिस्से में स्थित स्वामिनारायण संप्रदाय का पहला मंदिर है। इसे संप्रदाय के प्रवर्तक भगवान स्वामिनारायण के आदेश पर बनवाया गया। यह नरनारायण देव गादी का मुख्यालय है – स्वामिनारायण की इच्छा के अनुसार संप्रदाय का प्रशासन इसी गादी और वडताल की लक्ष्मीनारायण देव गादी में बँटा है। रंगीन लकड़ी की बारीक नक्काशी के कारण यह मंदिर अहमदाबाद की धरोहरों में गिना जाता है।

मंदिर का इतिहास

स्वामिनारायण परंपरा के ग्रंथ श्री हरि चरित्रामृत सागर के अनुसार अहमदाबाद के एक ब्रिटिश अधिकारी ने 1819 में कालूपुर में मंदिर के लिए भूमि देने का वचन दिया। अहमदाबाद के पहले ब्रिटिश कलेक्टर जॉन एंड्रयू डनलप ने इस भूमि अनुदान की स्वीकृति दिलाने में सहायता की। स्वामिनारायण ने अपने शिष्य आनंदानंद स्वामी को निर्माण का दायित्व सौंपा। विक्रम संवत 1876 (1819 ई.) में काम शुरू हुआ और 24 फ़रवरी 1822 को लगभग 50,000 लोगों की उपस्थिति में मंदिर की प्रतिष्ठा हुई।

मंदिर और विग्रह

मुख्य नरनारायण मंदिर में बर्मा टीक की बारीक नक्काशी है। मध्य में नरनारायण देव, दाहिनी ओर राधाकृष्ण और बाईं ओर धर्मदेव, भक्तिमाता और हरिकृष्ण विराजते हैं। प्रतिमाएँ डूंगरपुर में बनी थीं। मुख्य देवों के वस्त्र दिन में सात बार बदले जाते हैं। उत्तरी प्रवेशद्वार में स्थानीय, मुगल और ब्रिटिश शैलियों का मेल दिखता है।

परिसर के भवन

  • अक्षर भवन: बाल घनश्याम महाराज की श्वेत संगमरमर की प्रतिमा और स्वामिनारायण की निजी वस्तुएँ।
  • रंग महोल: जहाँ स्वामिनारायण अपनी यात्राओं में ठहरते थे; यहाँ उनकी आदमकद लकड़ी की प्रतिमा है।
  • उत्तर हवेली: 1871 में आचार्य केशवप्रसाद महाराज द्वारा निर्मित; कुछ स्तंभों पर 1857 के संग्राम, रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के दृश्य।
  • पूर्व हवेली: संस्कृत व संगीत विद्यालय; पीछे वह कुआँ जहाँ स्वामिनारायण स्नान करते थे।

उत्सव और धरोहर

जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली और दीपावली यहाँ के प्रमुख उत्सव हैं। अहमदाबाद नगर निगम की हेरिटेज वॉक इसी मंदिर से शुरू होकर पुराने शहर के 18 स्थलों से गुज़रती हुई जामा मस्जिद पर समाप्त होती है। पास में जगन्नाथ मंदिर (जमालपुर) और भद्रकाली मंदिर के दर्शन भी किए जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • मंगला आरती: लगभग सुबह 5:30 बजे
  • दर्शन: लगभग सुबह 5:30 से दोपहर 12:00 और शाम 4:00 से रात 8:30 बजे तक
  • संध्या आरती: सूर्यास्त के आसपास

देवों के वस्त्र दिन में कई बार बदले जाते हैं; उत्सवों पर समय बदलता है।

मुख्य आकर्षण

  • नरनारायण देव और दाहिनी ओर राधाकृष्ण के विग्रह।
  • बर्मा टीक की रंगीन नक्काशी – स्तंभों, छतों और मेहराबों पर।
  • अक्षर भवन – बाल घनश्याम महाराज की प्रतिमा और स्वामिनारायण की प्रसादी वस्तुएँ।
  • रंग महोल – जहाँ स्वामिनारायण ठहरते थे।
  • उत्तर हवेली – 1857 के संग्राम के दृश्यों वाले नक्काशीदार स्तंभ।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: अहमदाबाद जंक्शन (कालूपुर) लगभग 1 किमी – सबसे निकट।
  • सड़क मार्ग: पुराने शहर के कालूपुर क्षेत्र में; ऑटो और AMTS बसें। गलियाँ संकरी हैं, पैदल जाना सुविधाजनक है।
  • हवाई मार्ग: सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 10 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कालूपुर स्वामिनारायण मंदिर का क्या महत्व है?
यह स्वामिनारायण संप्रदाय का पहला मंदिर है, जिसे स्वयं भगवान स्वामिनारायण के आदेश पर बनवाया गया। यह नरनारायण देव गादी का मुख्यालय भी है।
मंदिर कब बना?
निर्माण विक्रम संवत 1876 (1819 ई.) में शुरू हुआ और 24 फ़रवरी 1822 को मंदिर की प्रतिष्ठा हुई। निर्माण का दायित्व आनंदानंद स्वामी को सौंपा गया था।
मंदिर के लिए भूमि किसने दी?
स्वामिनारायण परंपरा के ग्रंथों के अनुसार अहमदाबाद के एक ब्रिटिश अधिकारी ने कालूपुर में भूमि देने का वचन दिया था; अहमदाबाद के पहले ब्रिटिश कलेक्टर जॉन एंड्रयू डनलप ने इसकी स्वीकृति दिलाने में सहायता की।
मंदिर में मुख्य विग्रह किनके हैं?
मुख्य विग्रह श्री नरनारायण देव के हैं, दाहिनी ओर राधाकृष्ण और बाईं ओर धर्मदेव, भक्तिमाता और हरिकृष्ण विराजते हैं।
अहमदाबाद हेरिटेज वॉक कहाँ से शुरू होती है?
अहमदाबाद नगर निगम की हेरिटेज वॉक कालूपुर स्वामिनारायण मंदिर से शुरू होकर जामा मस्जिद पर समाप्त होती है।

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